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‘क्या लोकतंत्र की जड़ें दूषित हो रही हैं?’ चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पर पूर्व न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ का बड़ा सवाल

Advocate Mahesh Dhannawat
कंप्यूटर द्वारा तैयार हिंदी ऑडियो

नई दिल्ली/संवाददाता: सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस कुरियन जोसेफ ने चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और चुनाव कराने वाले पदाधिकारियों की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। इंडियन एसोसिएशन ऑफ लॉयर्स, केरलम द्वारा आयोजित ‘Independence of Election Commission of India: Compromised?’ विषयक संगोष्ठी के उद्घाटन भाषण में उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की स्वायत्तता को संविधान में मजबूत सुरक्षा मिलनी चाहिए।

संविधान सभा की चेतावनी

उन्होंने संविधान सभा के सदस्य हृदय नाथ कुंजरू की उस चेतावनी का उल्लेख किया कि यदि चुनाव कराने वालों की ईमानदारी पर भरोसा न हो तो लोकतंत्र अपने स्रोत पर ही दूषित हो सकता है। उन्होंने डॉ. बी.आर. आंबेडकर और सिब्बन लाल सक्सेना की नियुक्ति संबंधी चिंताओं को भी याद किया।

नियुक्ति प्रक्रिया पर बहस

अनुच्छेद 324 चुनाव आयोग को मतदाता सूची और चुनाव संचालन के व्यापक अधिकार देता है। जोसेफ का मत है कि मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य आयुक्तों की नियुक्ति तथा सेवा शर्तों के लिए संवैधानिक गारंटी जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने 2023 के अनूप बरनवाल निर्णय में अंतरिम चयन समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा के विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश को रखा था। बाद में संसद के कानून ने मुख्य न्यायाधीश की जगह प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय मंत्री को सदस्य बनाया। नए कानून को चुनौती न्यायालय में लंबित है।

सभी आयुक्तों को समान सुरक्षा

वर्तमान संवैधानिक व्यवस्था में मुख्य चुनाव आयुक्त को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जैसी हटाने की सुरक्षा प्राप्त है, जबकि अन्य आयुक्तों को मुख्य चुनाव आयुक्त की सिफारिश के बिना नहीं हटाया जा सकता। जोसेफ ने सभी आयुक्तों को एक समान सुरक्षा देने की वकालत की। उनका कहना था कि संवैधानिक शक्ति किसी व्यक्ति की निजी शक्ति नहीं, बल्कि संस्था की जिम्मेदारी है।

अत्यधिक केंद्रीकरण पर चेतावनी

उन्होंने चुनाव संबंधी शक्तियों के अत्यधिक केंद्रीकरण पर भी सवाल उठाए और कहा कि नागरिकों की निरंतर सतर्कता लोकतंत्र के लिए जरूरी है।

अधिवक्ता महेश धन्नावत की प्रतिक्रिया

अधिवक्ता महेश सीताराम धन्नावत (बी.कॉम., एलएल.एम.) के लिए तैयार प्रतिक्रिया में चुनाव आयुक्तों की निष्पक्ष नियुक्ति, पारदर्शिता और समान संवैधानिक सुरक्षा पर व्यापक चर्चा की आवश्यकता रेखांकित की गई है। लोकतंत्र में जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए स्वतंत्र चुनाव व्यवस्था अनिवार्य है।

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संपर्क: अधिवक्ता महेश धन्नावत, जालना, महाराष्ट्र। मोबाइल: 9326704647।

संपादकीय नोट: न्यायमूर्ति जोसेफ के वक्तव्य का विवरण उपलब्ध समाचार सामग्री पर आधारित है। अधिवक्ता धन्नावत की प्रतिक्रिया प्रकाशन हेतु तैयार मसौदा है, उनका सत्यापित प्रत्यक्ष उद्धरण नहीं।


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