चार श्रम संहिताओं के खिलाफ हुंकार: 12 फरवरी को देश थमेगा, जालना बनेगा संघर्ष का केंद्र
- AICCTU के देशव्यापी आंदोलन को समर्थन, जालना में जिलाधिकारी कार्यालय के सामने होगा जोरदार धरना *
जालना:
केंद्र सरकार द्वारा लागू की गई चार श्रम संहिताओं के खिलाफ देशभर में उठ रही मजदूरों की आवाज अब जालना में भी सड़कों पर उतरने जा रही है। मजदूर संगठनों का कहना है कि ये श्रम संहिताएं सीधे तौर पर श्रमिक अधिकारों पर हमला हैं और इससे लाखों कामगारों की नौकरी, वेतन और सामाजिक सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। चार श्रम संहिताओं के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन.
इसी के विरोध में All India Central Council of Trade Unions (AICCTU) ने 12 फरवरी 2026 को देशव्यापी हड़ताल और आंदोलन का आह्वान किया है। इस देशव्यापी आंदोलन के समर्थन में मराठवाड़ा सर्व श्रमिक संगठन की ओर से जालना में जिलाधिकारी कार्यालय के सामने जोरदार धरना आंदोलन किया जाएगा और प्रशासन को ज्ञापन सौंपा जाएगा।

नियोजन बैठक में बनी आंदोलन की रणनीति
देशव्यापी हड़ताल को सफल बनाने और आंदोलन की विस्तृत रूपरेखा तय करने के लिए रविवार, 8 फरवरी 2026 को मराठवाड़ा सर्व श्रमिक संगठन के कार्यालय में एक अहम नियोजन बैठक आयोजित की गई। यह बैठक संगठन के सहसचिव कॉमरेड सोहम प्रकाश बोदवडे के नेतृत्व में संपन्न हुई।
बैठक में चार श्रम संहिताओं के दुष्परिणामों पर गंभीर चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि इन कानूनों से श्रमिकों की संगठन बनाने की स्वतंत्रता, न्यूनतम वेतन का अधिकार, सामाजिक सुरक्षा, रोजगार की स्थिरता और संघर्ष का संवैधानिक अधिकार कमजोर हो रहा है। नेताओं का आरोप है कि ये संहिताएं कॉर्पोरेट और पूंजीवादी हितों को ध्यान में रखकर बनाई गई हैं, जिससे मजदूर असुरक्षा और शोषण की स्थिति में पहुंच जाएंगे।
शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक आंदोलन का आह्वान
बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि प्रस्तावित धरना आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से किया जाएगा। इसमें मजदूरों, कर्मचारियों, असंगठित क्षेत्र के कामगारों, खेत मजदूरों, महिलाओं, युवाओं, प्रगतिशील संगठनों और लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले नागरिकों से बड़ी संख्या में भाग लेने की अपील की गई।
आंदोलन का कार्यक्रम
- दिनांक: 12 फरवरी 2026
- समय: दोपहर 3.30 बजे
- स्थान: जिलाधिकारी कार्यालय, जालना
इस दौरान धरना देकर चार श्रम संहिताओं को वापस लेने सहित अन्य मांगों का ज्ञापन प्रशासन को सौंपा जाएगा।

इनकी रही प्रमुख उपस्थिति
नियोजन बैठक में संगठन के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। इनमें कॉ. शंकर लोखंडे (तालुकाध्यक्ष, जाफराबाद), कॉ. गुलाबराव जाधव (सचिव, घनसावंगी), कॉ. ज्ञानदेव घोडे (तालुकाध्यक्ष, मंठा), कॉ. जिजा घायतडक (तालुका युवा अध्यक्ष, घनसावंगी), कॉ. बेबी चव्हाण (महिला मोर्चा), कॉ. शोभा लिहिणार, कॉ. उमा सराटे, कॉ. सुंदरा साठे, कॉ. छबु सराटे, कॉ. शेषराव भालेराव, कॉ. दिलीप पांडव, कॉ. वामन आठवले, कॉ. बन्सी जाधव, कॉ. भीमराव राठोड, कॉ. प्रल्हाद जाधव सहित बड़ी संख्या में अन्य मजदूर और कार्यकर्ता शामिल थे।

संघर्ष तेज करने का संकल्प
बैठक का समापन AICCTU के देशव्यापी आंदोलन को सफल बनाने, चारों श्रम संहिताओं के खिलाफ निर्णायक प्रतिकार खड़ा करने और मजदूरों के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष को और अधिक तेज करने के संकल्प के साथ किया गया।
Key Points (Highlights)
- चार श्रम संहिताओं के विरोध में देशव्यापी आंदोलन का आह्वान किया गया है।
- AICCTU ने 12 फरवरी 2026 को देशभर में हड़ताल और प्रदर्शन की घोषणा की है।
- आंदोलन के तहत जालना में जिलाधिकारी कार्यालय के सामने धरना दिया जाएगा।
- मराठवाड़ा सर्व श्रमिक संगठन ने आंदोलन को श्रमिक एकता और लोकतांत्रिक अधिकारों की लड़ाई बताया।
- श्रम संहिताओं से न्यूनतम वेतन, सामाजिक सुरक्षा और रोजगार सुरक्षा प्रभावित होने का आरोप।
- नेताओं का कहना है कि नए कानून कॉर्पोरेट और पूंजीवादी हितों को बढ़ावा देते हैं।
- आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से किया जाएगा।
- मजदूरों, कर्मचारियों, असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों, खेत मजदूरों, महिलाओं और युवाओं से बड़ी भागीदारी की अपील।
- 12 फरवरी 2026, दोपहर 3.30 बजे धरना और ज्ञापन सौंपने का कार्यक्रम।
- बैठक में आंदोलन को सफल बनाने और संघर्ष तेज करने का संकल्प लिया गया।

FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
Q1. यह आंदोलन किसके आह्वान पर किया जा रहा है?
यह आंदोलन All India Central Council of Trade Unions (AICCTU) के आह्वान पर किया जा रहा है, जिसे मराठवाड़ा सर्व श्रमिक संगठन का समर्थन प्राप्त है।
Q2. आंदोलन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
आंदोलन का मुख्य उद्देश्य केंद्र सरकार द्वारा लागू की गई चार श्रम संहिताओं का विरोध करना है, जिन्हें मजदूर-विरोधी और कॉर्पोरेट हितों को बढ़ावा देने वाला बताया जा रहा है।
Q3. चार श्रम संहिताओं से मजदूरों को क्या नुकसान होगा?
श्रमिक संगठनों के अनुसार इन संहिताओं से न्यूनतम वेतन, सामाजिक सुरक्षा, रोजगार की स्थिरता, संगठन बनाने की स्वतंत्रता और संघर्ष के अधिकार कमजोर होंगे।
Q4. जालना में आंदोलन कब और कहां होगा?
जालना में धरना आंदोलन 12 फरवरी 2026 को दोपहर 3.30 बजे, जिलाधिकारी कार्यालय के सामने आयोजित किया जाएगा।
Q5. क्या यह आंदोलन हिंसक होगा?
नहीं। आयोजकों के अनुसार यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से किया जाएगा।
Q6. इस आंदोलन में कौन-कौन शामिल हो सकते हैं?
मजदूर, कर्मचारी, असंगठित क्षेत्र के श्रमिक, खेत मजदूर, महिलाएं, युवा, प्रगतिशील संगठन और लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले सभी नागरिक इसमें शामिल हो सकते हैं।
Q7. आंदोलन के दौरान क्या किया जाएगा?
धरना प्रदर्शन किया जाएगा और चार श्रम संहिताओं के विरोध में संबंधित मांगों का ज्ञापन प्रशासन को सौंपा जाएगा।
Q8. क्या यह केवल जालना तक सीमित है?
नहीं। यह आंदोलन देशव्यापी स्तर पर किया जा रहा है और जालना इसका एक महत्वपूर्ण केंद्र है।
क्या हैं चार श्रम संहिता? (What are the Four Labour Codes)
चार श्रम संहिता भारत सरकार द्वारा पुराने श्रम कानूनों को मिलाकर बनाए गए नए कानूनों का समूह है। इनका उद्देश्य श्रम कानूनों को सरल और एकरूप बनाना बताया गया, लेकिन श्रमिक संगठनों का आरोप है कि इससे मजदूरों के अधिकार कमजोर होते हैं।
ये संहिताएं Government of India द्वारा 29 पुराने श्रम कानूनों को समेटकर बनाई गई हैं।
चार श्रम संहिता कौन-कौन सी हैं?
1️⃣ मजदूरी संहिता (Code on Wages, 2019)
- न्यूनतम वेतन, समय पर भुगतान और समान काम के लिए समान वेतन से जुड़ी है।
- पूरे देश में न्यूनतम वेतन का ढांचा तय करने का प्रावधान।
2️⃣ औद्योगिक संबंध संहिता (Industrial Relations Code, 2020)
- ट्रेड यूनियन, हड़ताल और तालाबंदी से संबंधित नियम तय करती है।
- हड़ताल से पहले नोटिस अनिवार्य करने का प्रावधान।
- बड़े उद्योगों में छंटनी को आसान बनाए जाने का आरोप।
3️⃣ सामाजिक सुरक्षा संहिता (Code on Social Security, 2020)
- PF, ESI, पेंशन, ग्रेच्युटी जैसी योजनाओं से जुड़ी।
- गिग वर्कर्स और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को शामिल करने का दावा।
**4️⃣ व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य व कार्य परिस्थितियां संहिता
(Occupational Safety, Health and Working Conditions Code, 2020)**
- फैक्ट्री, खदान, निर्माण क्षेत्र में काम करने की स्थितियों से जुड़ी।
- काम के घंटे, सुरक्षा मानक और कार्यस्थल नियम तय करती है।
मजदूर संगठन इनका विरोध क्यों कर रहे हैं?
- हड़ताल और यूनियन अधिकार कमजोर होने का आरोप
- छंटनी और ठेका प्रथा आसान बनाए जाने की आशंका
- न्यूनतम वेतन और सामाजिक सुरक्षा पर स्पष्ट गारंटी नहीं
- असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को पर्याप्त संरक्षण नहीं
सरकार का क्या कहना है?
सरकार का दावा है कि:
- कानून सरल होंगे
- निवेश और रोजगार बढ़ेगा
- श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा मिलेगी
जबकि मजदूर संगठनों का कहना है कि ये कानून कॉर्पोरेट हितों के पक्ष में हैं और श्रमिकों के संवैधानिक अधिकारों पर असर डालते हैं।
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