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जालना में मासूम की मौत के बाद भड़के सामाजिक कार्यकर्ता — नसबंदी योजना को बताया ‘कागज़ी घोड़ा’

जालना में मासूम की मौत के बाद भड़के सामाजिक कार्यकर्ता — महानगरपालिका की नसबंदी योजना को बताया ‘कागज़ी घोड़ा’

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जालना | प्रतिनिधि विशेष रिपोर्ट

जालना शहर में आवारा कुत्तों के हमले में 8 वर्षीय मासूम संध्या की दर्दनाक मौत के बाद जनआक्रोश बढ़ता जा रहा है। इस घटना को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता अजित दादा कोठारी ने जालना महानगरपालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं और इसे ‘भ्रष्ट व लापरवाह नीति’ का परिणाम बताया है।

कोठारी का कहना है कि वे वर्षों से आवारा कुत्तों की नसबंदी और उन्हें शहर से बाहर भेजने की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन महानगरपालिका ने उनकी मांगों को कभी गंभीरता से नहीं लिया। यहां तक कि सूचना के अधिकार (RTI) के तहत कई बार आवेदन देने के बावजूद उन्हें कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।

महत्वपूर्ण आरोप और दस्तावेजी साक्ष्य:

  • 25 अप्रैल 2025 को अजित कोठारी ने महानगरपालिका को पत्र लिखकर नसबंदी योजना और उस पर खर्च की गई राशि की जानकारी मांगी थी।
  • उन्होंने पिछले 5 वर्षों में आवारा कुत्तों पर खर्च हुए फंड का ब्योरा मांगा, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला।
  • RTI के तहत कई बार जानकारी मांगी गई, लेकिन हर बार नियमों को नजरअंदाज किया गया।

कहां खर्च हो रहे हैं लाखों रुपये?

कोठारी के अनुसार, महानगरपालिका हर वर्ष ₹20 लाख से अधिक की राशि आवारा कुत्तों की समस्या पर खर्च करती है, लेकिन शहर में इसका कोई प्रभाव दिखाई नहीं देता। उन्होंने यह भी बताया कि J.E.S. महाविद्यालय के पीछे एक बड़ा पिंजरा बनाया गया था, जहां नसबंदी की योजना थी, लेकिन वह केवल कागज़ी घोड़ा बनकर रह गई।

अन्य शहरों से लाए जा रहे हैं कुत्ते?

सामाजिक कार्यकर्ता ने यह चौंकाने वाला दावा भी किया कि अन्य शहरों से आवारा कुत्तों को लाकर जालना में छोड़ा जा रहा है, जिससे शहर में इनकी संख्या में बेतहाशा वृद्धि हो रही है।

राजनीतिक जवाबदेही की मांग

कोठारी ने स्थानीय नेताओं से सवाल पूछा है कि चुनावों से पहले वोट मांगने वाले जनप्रतिनिधियों ने इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए क्या कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि महानगरपालिका के अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए और जनता को बताया जाए कि उनके टैक्स का पैसा आखिर कहां खर्च हो रहा है।

मासूम संध्या की मौत ने प्रशासनिक प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह है कि क्या महानगरपालिका इन आरोपों के जवाब में पारदर्शिता दिखाएगी या यह मामला भी फाइलों में दफन कर दिया जाएगा।

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Imran Siddiqui

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