जालना (प्रतिनिधि)। शहर में 13 वर्षीय बच्चे का अपहरण कर उसके पिता से पांच करोड़ रुपये की फिरौती मांगने के मामले में जालना बाल न्याय मंडल ने विधि से संघर्षरत एक किशोर को दोषी ठहराया है। 12 अक्टूबर को सुनाए गए फैसले में मंडल ने उसे छह महीने तक जिला सामान्य अस्पताल के बाल वार्ड में प्रत्येक सोमवार और बुधवार को सामुदायिक सेवा करने का आदेश दिया। अभियोजन पक्ष ने सुनवाई के दौरान कुल 17 गवाह पेश किए।
स्कूल जाते समय बच्चा लापता, पिता को आया फिरौती का फोन
मामला 25 जून 2024 का है। शिकायत के अनुसार, उस दिन सुबह करीब आठ बजे पिता ने अपने 13 वर्षीय बेटे को साइकिल से स्कूल भेजा था और स्वयं दुकान पर चले गए। लगभग 11:45 बजे उनके मोबाइल पर अज्ञात व्यक्ति का फोन आया। फोन करने वाले ने बच्चे को बंधक बनाए जाने की बात कहकर पांच करोड़ रुपये की फिरौती मांगी और रकम नहीं देने पर उसकी हत्या करने की धमकी दी।
पिता स्कूल पहुंचे तो कक्षा शिक्षिका ने बताया कि बच्चा उस दिन स्कूल आया ही नहीं था। इसके बाद उन्होंने तत्कालीन अपर पुलिस अधीक्षक आयुष नोपाणी को जानकारी दी। पुलिस ने बच्चे की तलाश के लिए दो टीमें गठित कीं।
पुलिस ने जाल बिछाकर बच्चे को सुरक्षित छुड़ाया
पुलिस टीमों ने शिकायतकर्ता को साथ लेकर फिरौती लेने आने वालों को पकड़ने की योजना बनाई। कार्रवाई के दौरान दो व्यक्तियों को पकड़ा गया और एक ओम्नी कार से बच्चे को सुरक्षित छुड़ाकर परिजनों को सौंप दिया गया। शिकायत में कहा गया था कि बच्चे को सुबह लगभग आठ बजे से रात साढ़े आठ बजे तक बंधक बनाकर रखा गया। उसके साथ मारपीट और जान से मारने की धमकी देने के भी आरोप लगाए गए थे।
पहली पुलिस टीम में सहायक पुलिस निरीक्षक चव्हाण, पुलिस उपनिरीक्षक वाघ तथा पुलिसकर्मी सैम्युअल कांबले, कृष्णा तंगे, हजारे, कोकणे और भोसले शामिल थे। दूसरी टीम में सदर बाजार पुलिस थाने के पुलिस उपनिरीक्षक नरोडे तथा पुलिसकर्मी रंगे, जाधव और शेख शामिल थे।
17 गवाहों के बयान, छह महीने सामुदायिक सेवा
सदर बाजार पुलिस थाने में मामला दर्ज होने के बाद जांच अधिकारी पुलिस उपनिरीक्षक बी. बी. नरोडे ने बाल न्याय मंडल के समक्ष अंतिम रिपोर्ट पेश की। सहायक सरकारी अभियोजक अतीक ई. परकोटे ने अभियोजन पक्ष की पैरवी की। मंडल की प्रमुख दंडाधिकारी एस. एन. पुंड और सदस्य ए. एम. धन्नावत तथा आर. बी. जगताप ने उपलब्ध साक्ष्यों और दलीलों पर विचार किया।
सुनवाई में शिकायतकर्ता, पीड़ित बच्चा, पंच गवाह, तत्कालीन अपर पुलिस अधीक्षक आयुष नोपाणी और जांच अधिकारी बी. बी. नरोडे सहित 17 गवाहों की गवाही हुई। मंडल ने किशोर को भारतीय दंड संहिता की धारा 363, 364-ए, 323, 506 के साथ धारा 34 और 120-बी के तहत दोषी पाया और छह महीने सामुदायिक सेवा का आदेश दिया।
न्यायालयीन कार्यवाही में पुलिस अधिकारियों का सहयोग
न्यायालयीन कार्यवाही में पुलिस अधीक्षक तेघबीर सिंह संधू और अपर पुलिस अधीक्षक विक्रम साली के मार्गदर्शन में पुलिस उपाधीक्षक अनंत कुलकर्णी, सदर बाजार थाने के निरीक्षक संदीप भारती और कोर्ट पैरवी अधिकारी पुलिस हेड कांस्टेबल फिरोज खान ने सहयोग किया।
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कानूनी जानकारी: भारत सरकार का इंडिया कोड विधि पोर्टल।
संपादकीय नोट: बाल न्याय से जुड़े मामले में संबंधित किशोर और पीड़ित बच्चे की पहचान गोपनीय रखी गई है। उपलब्ध तस्वीर में मौजूद व्यक्तियों की पहचान स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं की गई है।
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