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जालना चेक बाउंस मामला: महिला को 2 साल की सजा, ₹18.71 लाख मुआवज़ा

जालना चेक बाउंस मामला.

चेक बाउंस मामले में महिला दोषी, दो वर्ष का कारावास; ब्याज सहित ₹18.71 लाख मुआवज़ा अदा करने का आदेश

जालना | प्रतिनिधि:
धनादेश अनादर (चेक बाउंस) से जुड़े एक महत्वपूर्ण प्रकरण में जालना की चतुर्थ प्रथम वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत ने आरोपी महिला को दोषी ठहराते हुए दो वर्ष के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने इसके साथ ही चेक की मूल राशि पर ब्याज जोड़कर कुल ₹18,71,583 का मुआवज़ा शिकायतकर्ता को अदा करने का भी आदेश दिया है।

प्रकरण के अनुसार, शिकायतकर्ता दयालदास डेम्बडा ने व्यवसाय और परमिट रूम के लाइसेंस से संबंधित कार्यों के लिए आरोपी महिला को दो चरणों में चेक के माध्यम से कुल ₹10 लाख 50 हजार की राशि दी थी। बाद में उक्त राशि की वापसी के लिए आरोपी महिला ने 28 दिसंबर 2016 को समान रकम का चेक शिकायतकर्ता को सौंपा। हालांकि, जब यह चेक बैंक में प्रस्तुत किया गया, तो खाते में पर्याप्त धनराशि न होने के कारण चेक अनादरित होकर वापस आ गया। जालना चेक बाउंस मामला.

इसके बाद शिकायतकर्ता की ओर से विधिक प्रक्रिया के तहत आरोपी महिला को नोटिस भेजा गया, लेकिन इसके बावजूद भी महिला ने न तो राशि लौटाई और न ही कोई संतोषजनक जवाब दिया। अंततः शिकायतकर्ता ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स अधिनियम की धारा 138 के अंतर्गत न्यायालय में मामला दर्ज कराया।

मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से प्रस्तुत सभी दलीलों को अदालत ने अस्वीकार कर दिया। न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों, दस्तावेज़ों और दोनों पक्षों के तर्कों पर विस्तार से विचार करने के बाद आरोपी महिला को दोषी ठहराया। अदालत ने आदेश में स्पष्ट किया कि आरोपी महिला को शिकायतकर्ता को मूल राशि के साथ ब्याज सहित कुल ₹18,71,583 मुआवज़ा अदा करना होगा।

न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया कि यदि आरोपी महिला निर्धारित तीन माह की अवधि में मुआवज़े की राशि अदा नहीं करती है, तो उसे अतिरिक्त चार माह का साधारण कारावास भुगतना पड़ेगा। इस निर्णय से चेक बाउंस मामलों में सख्त रुख अपनाने का स्पष्ट संकेत मिलता है।

फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कानूनी विशेषज्ञों ने कहा कि इस तरह के निर्णयों से चेक के माध्यम से होने वाले वित्तीय लेन-देन की विश्वसनीयता और मजबूत होगी। उनका कहना है कि बैंकिंग चैनल के जरिए किए गए लेन-देन की जिम्मेदारी से कोई भी व्यक्ति तकनीकी बहानों के आधार पर नहीं बच सकता। ऐसे फैसलों से व्यावसायिक अनुशासन को बढ़ावा मिलेगा और चेक के दुरुपयोग पर प्रभावी अंकुश लगेगा। जालना चेक बाउंस मामला.

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