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कृषि-प्रधान भारत के लिए एआई तकनीक मील का पत्थर: जिलाधिकारी आशिमा मित्तल

कृषि-प्रधान भारत के लिए एआई तकनीक साबित होगी मील का पत्थर: जिलाधिकारी आशिमा मित्तल

जालना:
जालना में आयोजित एक कार्यशाला में जिलाधिकारी आशिमा मित्तल ने कहा कि आज के तेज़ रफ्तार दौर में सूचनाओं का सटीक विश्लेषण और समय पर निर्णय लेना अत्यंत आवश्यक हो गया है। ऐसे में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) कृषि क्षेत्र के लिए एक प्रभावी मार्गदर्शक के रूप में उभर रही है। उन्होंने कहा कि कंप्यूटर क्रांति के बाद एआई भारत का सबसे बड़ा तकनीकी बदलाव है और कृषि-प्रधान देश के लिए यह तकनीक भविष्य में मील का पत्थर साबित होगी।

जिलाधिकारी कार्यालय के जिला नियोजन सभागृह में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से कृषि प्रौद्योगिकी की प्रगति” विषय पर आयोजित इस कार्यशाला की अध्यक्षता जिलाधिकारी आशिमा मित्तल ने की। कार्यक्रम में प्रमुख वक्ता के रूप में आनंद माहुरकर, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, Findability Sciences, उपस्थित रहे। उनके साथ मैजिक के मकरंद कुलकर्णी, रितेश मिश्रा, डॉ. प्रसन्न भोगले, डॉ. मंदर कुलकर्णी, डॉ. दीपक बोरनारे, डॉ. गोपाल शिंदे, प्रसाद कोकिल, सौरभ कदम, पूजा गोशेर, पी.टी. यशराज तथा मैजिक के प्रबंधक डी.एम. राठोड भी मंचासीन थे।

अपने संबोधन में जिलाधिकारी आशिमा मित्तल ने कहा कि भारत कृषि-प्रधान देश है, इसलिए फसल नियोजन, मौसम पूर्वानुमान और कीट नियंत्रण जैसे अहम क्षेत्रों में एआई तकनीक किसानों के लिए अत्यंत उपयोगी साबित हो रही है। मानव बुद्धि की अपनी सीमाएँ होती हैं, जबकि कृत्रिम बुद्धिमत्ता विशाल मात्रा में उपलब्ध डेटा का विश्लेषण कर तेज़ और सटीक निर्णय लेने में मदद करती है। उन्होंने किसानों से अपील की कि एआई आधारित आधुनिक तकनीकों को अपनाकर उत्पादन बढ़ाने और जोखिम कम करने की दिशा में कदम उठाएं।

मुख्य वक्ता आनंद माहुरकर ने कहा कि कई बार जो बातें मानव बुद्धि तुरंत नहीं समझ पाती, उन्हें एआई गहन विश्लेषण के जरिए स्पष्ट कर सकती है। कृषि क्षेत्र में अलग-अलग मौसमों में ली गई फसल की तस्वीरें केवल आंकड़े नहीं होतीं, बल्कि उनसे सीखने वाली मशीनें भविष्य में आने वाले संभावित संकटों का अनुमान भी लगा सकती हैं। बढ़ती खाद्य मांग, मौसम की अनिश्चितता और बाजार के उतार-चढ़ाव जैसी चुनौतियों से निपटने में एआई डेटा आधारित सटीक समाधान उपलब्ध कराती है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आमतौर पर चैटजीपीटी को ही एआई मान लेना एक गलत धारणा है। एआई कोई जादू नहीं, बल्कि वैज्ञानिक तरीके से डेटा का विश्लेषण कर सही निर्णय लेने का एक सक्षम और भरोसेमंद विकल्प है। कृषि क्षेत्र में व्यापक बदलाव और क्रांति लाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता एक प्रभावी साधन बन सकती है।

कार्यशाला के दौरान कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया गया। किसानों और कृषि से जुड़े विभिन्न घटकों को नई तकनीकों से परिचित कराना इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य रहा। एआई के माध्यम से उत्पादन बढ़ाने और जोखिम कम करने के उपायों पर गहन चर्चा की गई। कार्यक्रम का संचालन मैजिक के प्रबंधक डी.एम. राठोड ने किया। इस अवसर पर कृषि उद्यमी, स्टार्टअप प्रतिनिधि, शोधकर्ता, विशेषज्ञ, किसान और विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

A group of individuals at a formal gathering, celebrating an award presentation. The scene features a woman in a yellow sari receiving a trophy, while several others, including men in shirts and formal attire, applaud in the background. The backdrop includes a decorative wall with a logo and the words in Marathi.
Workshop on AI in agriculture with officials and speakers in attendance

🔹 Key Points

  • जालना में आयोजित कार्यशाला में जिलाधिकारी आशिमा मित्तल ने कृषि क्षेत्र में एआई की भूमिका पर प्रकाश डाला।
  • आशिमा मित्तल ने कहा कि कंप्यूटर क्रांति के बाद एआई भारत का सबसे बड़ा तकनीकी बदलाव है।
  • कृषि-प्रधान भारत के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) भविष्य में मील का पत्थर साबित होगी।
  • फसल नियोजन, मौसम पूर्वानुमान और कीट नियंत्रण में एआई किसानों के लिए अत्यंत उपयोगी।
  • एआई विशाल डेटा का विश्लेषण कर तेज़ और सटीक निर्णय लेने में मदद करती है।
  • किसानों से एआई आधारित आधुनिक तकनीक अपनाने का आह्वान।
  • कार्यशाला का विषय: “कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से कृषि प्रौद्योगिकी की प्रगति”।
  • मुख्य वक्ता आनंद माहुरकर ने कहा—एआई भविष्य के कृषि संकटों का पूर्वानुमान लगा सकती है।
  • बढ़ती खाद्य मांग, मौसम की अनिश्चितता और बाजार उतार-चढ़ाव से निपटने में एआई सहायक।
  • चैटजीपीटी को ही एआई समझना गलत धारणा, एआई डेटा विश्लेषण का वैज्ञानिक माध्यम।
  • एआई कोई जादू नहीं, बल्कि निर्णय लेने का सशक्त और भरोसेमंद विकल्प।
  • कार्यशाला में किसानों, स्टार्टअप्स, शोधकर्ताओं, विशेषज्ञों और छात्रों की भागीदारी।
A conference room filled with seated attendees, engaging in a Q&A session, with large screens displaying the title 'Q&A' at the front.
Participants engaged in a workshop on artificial intelligences role in agriculture in Jalna

❓ FAQ

Q1. एआई (Artificial Intelligence) क्या है और यह कृषि में कैसे उपयोगी है?
A: एआई एक ऐसी तकनीक है जो बड़े डेटा का विश्लेषण कर सटीक निर्णय लेने में मदद करती है। कृषि में इसका उपयोग फसल नियोजन, मौसम पूर्वानुमान, कीट नियंत्रण और उत्पादन बढ़ाने के लिए किया जाता है।

Q2. कृषि-प्रधान भारत के लिए एआई तकनीक क्यों महत्वपूर्ण है?
A: भारत कृषि-प्रधान देश है। एआई के जरिए जोखिम कम कर, लागत घटाकर और उत्पादकता बढ़ाकर किसानों की आय में सुधार किया जा सकता है।

Q3. जिलाधिकारी आशिमा मित्तल ने एआई को लेकर क्या कहा?
A: आशिमा मित्तल ने कहा कि कंप्यूटर क्रांति के बाद एआई भारत का सबसे बड़ा तकनीकी बदलाव है और यह कृषि-प्रधान भारत के लिए मील का पत्थर साबित होगी।

Q4. एआई किन-किन कृषि क्षेत्रों में मदद कर सकती है?
A: एआई फसल नियोजन, मौसम की सटीक जानकारी, कीट व रोग पहचान, उत्पादन बढ़ाने और बाजार जोखिम कम करने में
सहायक है।

Q5. क्या चैटजीपीटी ही एआई है?
A: नहीं। चैटजीपीटी एआई का केवल एक उदाहरण है। एआई कोई जादू नहीं, बल्कि डेटा के वैज्ञानिक विश्लेषण के माध्यम से निर्णय लेने की तकनीक है।

Q6. कार्यशाला कहां आयोजित की गई थी?
A: यह कार्यशाला जालना के जिलाधिकारी कार्यालय में आयोजित की गई थी।

Q7. किसानों को एआई अपनाने से क्या लाभ होगा?
A: एआई अपनाने से किसान उत्पादन बढ़ा सकते हैं, मौसम और बाजार के जोखिम कम कर सकते हैं और समय पर सही निर्णय ले सकते हैं।

Q8. इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य क्या था?
A: किसानों और कृषि से जुड़े लोगों को आधुनिक तकनीकों से परिचित कराना और एआई के माध्यम से कृषि में नवाचार को बढ़ावा देना।


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