जालना: कम बारिश और सूखे जैसी स्थिति का असर अब सिर्फ खेतों और जलाशयों तक सीमित नहीं है. जालना में पशुओं के लिए उपलब्ध चारे का स्टॉक करीब दो महीने से थोड़ा अधिक रहने की रिपोर्ट ने पशुपालकों की चिंता बढ़ा दी है. मराठवाड़ा के बीड और जालना उन जिलों में हैं जहां आने वाले महीनों में चारा प्रबंधन बड़ी चुनौती बन सकता है.
पशुपालन पर दोहरा दबाव
पानी की कमी से हरे चारे का उत्पादन प्रभावित होता है, जबकि सूखे में किसान फसल अवशेषों पर अधिक निर्भर होते हैं. यदि उपलब्ध स्टॉक तेजी से घटता है तो दूध उत्पादन, पशुओं के स्वास्थ्य और किसानों की आय पर असर पड़ सकता है.
जिले में खरीफ फसलों पर असर पहले ही सामने आ चुका है. पढ़ें: सूखे की मार से जालना में फसलें प्रभावित.
अब क्या जरूरी
चारा उपलब्धता की तालुकावार समीक्षा, जरूरत वाले क्षेत्रों की पहचान, पशुओं के लिए पेयजल व्यवस्था और संभावित चारा डिपो की तैयारी समय रहते करना महत्वपूर्ण होगा. संकट लंबा खिंचने पर बाहर से चारा लाने की जरूरत भी पड़ सकती है.
स्रोत: Times of India.
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