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शेख वहीद का सपना: बदलती जिंदगी और शिक्षा


“उम्मीदों का आशियाना” — बना औरंगाबाद का मतिमंद निवासी विद्यालय

शेख वहीद की दूरदृष्टि और मॉडल एज्युकेशन सोसायटी की अनूठी पहल से मतिमंद बच्चों के लिए शिक्षा, सम्मान और भविष्य की नई परिभाषा

एक अनोखी शुरुआत : जहाँ उम्मीद ने लिया आकार

छत्रपति संभाजीनगर की सुंदरवाडी बीड बाईपास रोड पर स्थित यह मतिमंद निवासी विद्यालय किसी साधारण संस्थान जैसा नहीं है — यह उम्मीदों का आशियाना है।
विद्यालय में प्रवेश करते ही बच्चों की चमकती आँखें और मासूम मुस्कान हर आगंतुक को छू लेती है। यहाँ सिर्फ देखभाल नहीं, बल्कि बच्चों को जीवन की दिशा, सम्मान और पहचान सिखाई जा रही है।

इस संस्था की नींव जालना के समाजसेवी और पूर्व नगरसेवक शेख वहीद ने रखी — जिनकी दूरदृष्टि और मानवता ने यह अनोखा मॉडल संभव किया।

शेख वहीद : संघर्षों से निकला एक मार्गदर्शक

शेख वहीद का जीवन प्रेरणादायक है — गरीबी और कठिनाइयों के बीच उन्होंने 10वीं तक पढ़ाई की और बाद में शिक्षा के क्षेत्र में समर्पित सेवा की। हुदा उर्दू स्कूल के सफल संचालन के बाद उन्होंने समाज के उस वर्ग की विशेष पहचान की जिसे मदद की सबसे अधिक आवश्यकता थी — मतिमंद बच्चे।

उनकी पहल से जालना के साथ-साथ छत्रपति संभाजीनगर, बीड, लातूर, नेवासा और पुणे में कुल मिलाकर १७ स्कूल स्थापित हो चुके हैं। परंतु इस विद्यालय के पीछे का उद्देश्य सिर्फ शिक्षा नहीं, बल्कि सम्मान और आत्मनिर्भरता देना रहा।

महाराष्ट्र का पहला आधुनिक मतिमंद निवासी विद्यालय — प्रमुख सुविधाएँ

  • राज्य का पहला एसी हॉस्टल — आरामदायक और सुरक्षित आवास, जिससे बच्चे घर जैसा महसूस करें।
  • आधुनिक क्लासरूम — नामी इंग्लिश मीडियम स्कूलों जैसे सुविधायुक्त कक्षा-कक्ष।
  • तीन समय का पौष्टिक भोजन — शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए संतुलित आहार।
  • विशाल खेल मैदान — विशेष खेल और गतिविधियाँ जो बौद्धिक तथा शारीरिक विकास बढ़ाएँ।
  • समर्पित प्रशिक्षित स्टाफ — हर बच्चे की व्यक्तिगत जरूरतों के अनुरूप मार्गदर्शन।

सफलता का पैमाना : पहले ही वर्ष में 178 दाखिले

इस संस्था की लोकप्रियता का अंदाज़ इस बात से लगाया जा सकता है कि पहले वर्ष में ही 5 से 15 वर्ष आयु वर्ग के 178 बच्चों का दाखिला हुआ।
राज्यभर से अभिभावक और शिक्षाविद संस्था का अवलोकन करने आते हैं और इसकी प्रशंसा करते हैं।

“जब माता-पिता अपने बच्चों को आत्मविश्वास से भरे और खुश देखते हैं, तो उनकी आँखों में जो चमक आती है, वही हमारी सबसे बड़ी सफलता है।”

— शेख वहीद

होस्टल : बच्चों का सच्चा घर

विद्यालय का हॉस्टल सिर्फ बिस्तर और छाया नहीं देता — यह बच्चों को सुरक्षा, अपनापन और पारिवारिक माहौल देता है। इसी माहौल में बच्चे सहज होकर सीखते हैं और उनकी ग्रोथ तेज़ होती है।

शेख वहीद का सपना : विश्व स्तरीय संस्था की ओर

शेख वहीद का विज़न स्पष्ट है — यह विद्यालय महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि पूरे भारत और विश्व के लिए एक मॉडल इंस्टीट्यूशन बने। इसके लिए वे अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का अध्ययन कर सर्वोत्तम सुविधाएँ यहाँ लाना चाहते हैं।

इंटरव्यू : शेख वहीद से सीधी बात

प्रश्न: आपको यह स्कूल शुरू करने की प्रेरणा कहाँ से मिली?

शेख वहीद: “मैंने खुद तंगदस्ती में जिंदगी बिताई और केवल 10वीं तक पढ़ पाया। हालात सुधरने के बाद हुदा उर्दू स्कूल को खड़ा किया। लेकिन जब मतिमंद बच्चों का दर्द देखा, तो लगा कि उनकी तरक्की के लिए कुछ खास करना जरूरी है। यही से इस स्कूल का सपना शुरू हुआ।”

प्रश्न: इस स्कूल की सबसे बड़ी खासियत क्या है?

शेख वहीद: “यह राज्य का पहला एसी हॉस्टल है। यहां बच्चों को पौष्टिक भोजन, आधुनिक क्लासरूम, विशाल खेल मैदान और प्रशिक्षित स्टाफ मिलता है। हम सिर्फ शिक्षा नहीं दे रहे, बल्कि बच्चों को सम्मान और आत्मनिर्भरता का माहौल दे रहे हैं।”

प्रश्न: आपको बच्चों से मिलने पर कैसा अनुभव होता है?

शेख वहीद: “जब बच्चे मुझे देखकर दौड़ के गले लगते हैं, तो सारी थकान मिट जाती है। उनकी मुस्कान ही मेरी सबसे बड़ी कमाई है।”

प्रश्न: आपके भविष्य की योजनाएं क्या हैं?

शेख वहीद: “मेरा सपना है कि यह संस्था विश्व स्तरीय मॉडल बने। इसके लिए अगर मुझे दुनिया की बेहतरीन संस्थाओं का दौरा करना पड़े, तो मैं करूंगा। मेरा मकसद है कि मतिमंद बच्चों को वही सुविधा मिले, जो किसी भी बच्चे को दुनिया में मिलनी चाहिए।”

केस स्टडी : बच्चों की जिंदगी में आया बदलाव

कहानी — “आरव” (काल्पनिक नाम)

आरव, 12, दाखिले से पहले बेहद चुप और अलग-थलग था। विद्यालय की खेल गतिविधियों और संगीत सत्र ने उसे बदल दिया।
आज आरव आत्मविश्वास से भरा है और संगीत में अपनी प्रतिभा दिखा रहा है। उसके माता-पिता की आँखों में खुशी के आँसू हैं — उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि उनका बेटा कभी सामान्य जीवन जी पाएगा, पर अब वह बदल चुका है।

कहानी — “रिया” (काल्पनिक नाम)

रिया, 9, पढ़ाई में पीछे थी। विशेष शिक्षकों और व्यक्तिगत मार्गदर्शन ने उसकी सीखने की क्षमता दोगुना कर दी। अब वह न केवल पढ़ाई में बेहतर है बल्कि चित्रकला में भी अव्वल रही है।

निष्कर्ष

मतिमंद निवासी विद्यालय सिर्फ एक स्कूल नहीं, बल्कि नई सोच और उम्मीद का प्रतीक है। यहाँ हर बच्चा न सिर्फ पढ़ता है बल्कि अपनी पहचान, आत्मविश्वास और भविष्य गढ़ रहा है।
यह कहानी बताती है कि दूरदर्शी सोच और नेक इरादे समाज के सबसे कमजोर बच्चों के लिए भी सुनहरा कल बना सकते हैं — और इसके पीछे हैं शेख वहीद जैसे मानवतावादी।

 फोटो क्रेडिट: NewsNationOnline


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