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“भारत से लड़कर कुछ हासिल नहीं होगा” — CIA अधिकारी की स्वीकारोक्ति, पाकिस्तान की झूठी ताकत का पर्दाफाश

“भारत से लड़कर कुछ हासिल नहीं होगा” — पाकिस्तान में CIA ऑपरेशन चलाने वाले पूर्व अमेरिकी अधिकारी की स्वीकारोक्ति ने हिला दी इस्लामाबाद की नींव

नई दिल्ली: अमेरिकी ख़ुफ़िया एजेंसी CIA में 15 वर्षों तक सेवाएं देने वाले वरिष्ठ अधिकारी जॉन किरीआकू (John Kiriakou) ने एक सनसनीखेज़ बयान देकर भारत का कद और पाकिस्तान की हकीकत दोनों को बेनकाब कर दिया है।

“भारत के साथ लड़ाई पाकिस्तान के लिए आत्महत्या साबित होगी। भारत एक संगठित, शक्तिशाली और नैतिक रूप से श्रेष्ठ राष्ट्र है, जबकि पाकिस्तान अपनी ही नीतियों से टूट चुका है।”

‘भारत के सामने पाकिस्तान टिक नहीं सकता’ — CIA अधिकारी की सच्ची गवाही

किरियाकू, जिन्होंने पाकिस्तान में आतंकवाद विरोधी अभियान का नेतृत्व किया, कहते हैं — “भारत से टकराना किसी भी दृष्टि से पाकिस्तान के हित में नहीं। भारत के पास अनुशासित सेना, तकनीकी श्रेष्ठता, मज़बूत लोकतंत्र और जनता का अटूट विश्वास है। पाकिस्तान के पास केवल अराजकता, आतंक और भ्रम है।”

उन्होंने कहा कि “भारत से नफ़रत की राजनीति ने पाकिस्तान को दुनिया में मज़ाक बना दिया है।”

“पाकिस्तान की परमाणु शक्ति भी अमेरिका के कब्जे में थी”

किरियाकू ने खुलासा किया कि पाकिस्तान की परमाणु हथियार प्रणाली कभी पूरी तरह उसके नियंत्रण में रही ही नहीं। “अमेरिकी जनरल पाकिस्तान की परमाणु नीति की निगरानी करते थे। वॉशिंगटन के आदेश पर इस्लामाबाद काम करता था। पाकिस्तान की तथाकथित ‘परमाणु ताकत’ बस एक दिखावा है।”

ISI को अमेरिकी डॉलर से पाला गया

किरियाकू ने बताया कि अमेरिका ने पाकिस्तान की ISI एजेंसी को करोड़ों डॉलर दिए — “हम जानते थे कि कुछ रुपये फेंको और पाकिस्तान को नचाओ। ISI के कई अफसर अमेरिकी एजेंडे पर काम कर रहे थे।” यह स्वीकारोक्ति बताती है कि पाकिस्तान की विदेश और सुरक्षा नीति कभी उसकी अपनी नहीं थी — वह बस अमेरिका का कठपुतली देश बनकर रह गया था।

मुशर्रफ़ वॉशिंगटन के आदमी थे

किरियाकू ने साफ कहा — “परवेज़ मुशर्रफ़ अमेरिकी आदेशों पर चल रहे थे। 9/11 के बाद उन्होंने अपनी सेना और देश की गरिमा तक बेच दी।” यह बयान पाकिस्तान की राजनीतिक व्यवस्था पर सीधा तमाचा है।

भारत की ताक़त: अनुशासन, लोकतंत्र और आत्मबल

किरियाकू का बयान भारत के लिए एक वैश्विक सम्मानपत्र जैसा है। उन्होंने कहा — “भारत दुनिया का एकमात्र देश है जिसने सैन्य शक्ति के साथ नैतिक नेतृत्व भी कायम रखा है। भारत न तो विस्तारवादी है, न आक्रामक — लेकिन जब अपनी सीमाओं की बात आती है, तो कोई भी ताकत उसे झुका नहीं सकती।”

त्रिशूल अभ्यास का असर – पाकिस्तान में दहशत

हाल ही में भारत की तीनों सेनाओं ने संयुक्त रूप से ‘त्रिशूल’ युद्धाभ्यास किया, जिससे पाकिस्तान ने घबराकर अपने हवाई मार्ग तक बंद कर दिए। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत अब केवल सीमा की रक्षा नहीं कर रहा, बल्कि रणनीतिक नियंत्रण की स्थिति में पहुँच चुका है।

किरियाकू के बयान के बाद यह स्पष्ट है कि “अब युद्ध की बात करने से पहले पाकिस्तान को सौ बार सोचना पड़ेगा।”

पाकिस्तान का सच – न सेना मज़बूत, न अर्थव्यवस्था स्थिर

आज पाकिस्तान आर्थिक संकट, विदेशी कर्ज़ और अंदरूनी कलह में डूबा हुआ है। दूसरी ओर भारत — विश्व की पाँचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, आत्मनिर्भर रक्षा शक्ति और दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। जॉन किरीआकू का यह बयान दरअसल पाकिस्तान के लिए नहीं, भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा का प्रमाण है।

“भारत से शांति ही पाकिस्तान की आख़िरी उम्मीद है”

किरियाकू ने कहा — “अगर पाकिस्तान को अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए कुछ बचाना है, तो उसे भारत से शांति और सहयोग की नीति अपनानी होगी। भारत दुश्मनी नहीं, विकास की भाषा बोलता है — लेकिन जो सुनना न चाहे, वह इतिहास के कूड़े में चला जाता है।”

निष्कर्ष: सच बोल गया CIA का जासूस, झूठ बेनकाब हुआ पाकिस्तान का

जॉन किरीआकू का यह बयान सिर्फ एक “कबूलनामा” नहीं, बल्कि एक वैश्विक सत्य की उद्घोषणा है — कि भारत अब केवल दक्षिण एशिया का नहीं, बल्कि विश्व की शक्ति-संतुलन का केंद्र है। पाकिस्तान के झूठे प्रचार, आतंकवाद की राजनीति और असफल शासन के बीच भारत एक स्थिर, शांतिप्रिय और अजेय राष्ट्र बनकर उभरा है।

“भारत से टकराना अब किसी के बस की बात नहीं।”


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