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मैदान की आख़िरी गेंद: बचपन के क्रिकेट और दोस्ती की यादें | आज के अल्फ़ाज़

सुनहरी शाम में मोहल्ले का खाली क्रिकेट मैदान, बल्ला और गेंद—बचपन के खेल पर हिंदी कविता
कंप्यूटर द्वारा तैयार हिंदी ऑडियो

28 अक्टूबर 2026 | मौलिक हिंदी कविता

किसी मोहल्ले के छोटे-से मैदान में खेली गई आख़िरी गेंद कई बार पूरे दिन की सबसे प्यारी याद बन जाती है। दो ईंटों का विकेट, धूल भरी पिच, दोस्तों की आवाज़ें और घर लौटने से पहले एक और ओवर की ज़िद—आज की कविता उन्हीं पलों को समर्पित है, जहाँ खेल के साथ दोस्ती और अपनापन भी पनपता है।

आज की कविता: मैदान की आख़िरी गेंद

शाम ने मैदान पर
सुनहरी चादर बिछाई थी,
गली के मोड़ से दौड़ती
बच्चों की टोली आई थी।

दो ईंटें विकेट बनी थीं,
मिट्टी पर खिंची थी एक लकीर,
किसी के हाथ में पुराना बल्ला,
किसी की आँखों में जीत की तस्वीर।

जिसे बल्ला पकड़ना नहीं आता था,
उसे भी खेलने की बारी मिली,
एक छोटी-सी तारीफ़ से
उसकी झिझक पहली बार हिली।

कभी गेंद झाड़ियों में खोई,
कभी हँसते-हँसते खेल रुका,
हार-जीत के बीच न जाने कब
सबका मन एक-दूसरे से जुड़ा।

फिर आवाज़ आई—आख़िरी गेंद!
पेड़ों के पीछे सूरज उतर रहा था,
हर चेहरा गेंद की राह देखता,
जैसे समय भी वहीं ठहर रहा था।

गेंद उछली, बल्ले से टकराई,
और शाम की ओर उड़ चली,
किसने जीता, किसने हारा—
उस पल यह बात छोटी लगी।

घर लौटते हुए किसी ने कहा,
“कल फिर यहीं मिलेंगे!”
दो ईंटें मैदान में रह गईं,
और सपने साथ-साथ चल दिए।

कविता का भावार्थ

यह कविता मोहल्ले के साधारण खेल में छिपी बड़ी सीख को सामने लाती है। मैदान केवल जीत और हार की जगह नहीं होता। वहाँ बच्चे बारी का इंतज़ार करना, नए साथी को मौका देना, छोटी असहमति के बाद फिर साथ खेलना और एक-दूसरे का उत्साह बढ़ाना सीखते हैं। आख़िरी गेंद का नतीजा चाहे जो हो, साथ बिताया समय सबसे कीमती याद बन जाता है।

आज का विचार

बचपन के खेल में सबसे यादगार वह रन नहीं होता जो हमने बनाया, बल्कि वह साथी होता है जिसने हमें खेलने की जगह दी।

यह रचना NewsNationOnline की ‘आज के अल्फ़ाज़’ साहित्यिक श्रृंखला के लिए मौलिक रूप से लिखी गई है। इसका श्रेय किसी अन्य कवि को नहीं दिया गया है।

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Imran Siddiqui
Imran Siddiqui is a senior journalist and editor of NewsNationOnline, with over 17 years of experience covering news, politics, education and social issues in Maharashtra.

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