4 नवंबर 2026 | मौलिक देवनागरी शायरी
कभी-कभी किसी अनजान इंसान के लिए रखा गया एक गिलास पानी भी बड़ी बात बन जाता है। मदद छोटी हो सकती है, लेकिन उसके पीछे की संवेदना अनमोल होती है। आज की मौलिक शायरी रोज़मर्रा की ऐसी ही ख़ामोश नेकी और इंसानियत को समर्पित है।
आज की शायरी: एक गिलास पानी
प्यासे की तरफ़ बढ़ा जो पानी का गिलास,
उस छोटे-से काम में छिपा था कितना एहसास।
न नाम पूछा, न किसी शुक्रिए की चाह रखी,
बस राहगीर के हिस्से में थोड़ी-सी राहत रखी।
बड़ी बातों से कभी दिल का पता मिलता नहीं,
एक छोटी मदद से बड़ा फ़ासला रहता नहीं।
जिसे ज़रूरत थी, उसने मुस्कुराकर देख लिया,
बिन बोले ही दो अजनबियों ने हाल कह दिया।
नेकी का हिसाब रखना ज़रूरी तो नहीं,
हर एहसान का इश्तिहार भी ज़रूरी तो नहीं।
कभी किसी की थकन को थोड़ा कम कर देना,
अपने हिस्से की मुहब्बत यूँ भी बाँट देना।
दुनिया बदलने की बातें बहुत सुनाई देती हैं,
कुछ ख़ामोश मेहरबानियाँ राह दिखाई देती हैं।
शायरी का भावार्थ
इन शेरों में किसी बड़े दान या मशहूर काम की चर्चा नहीं है। एक प्यासे राहगीर को पानी देना मामूली लग सकता है, लेकिन ज़रूरत के समय यही छोटा-सा काम राहत देता है। किसी की मदद करने के लिए उसका नाम जानना, बदले में धन्यवाद पाना या अपनी नेकी का प्रचार करना ज़रूरी नहीं। इंसानियत कई बार बिना शोर किए अपना असर छोड़ती है।
आज का विचार
अच्छाई का आकार नहीं, उसका सही समय पर किसी तक पहुँचना मायने रखता है।
यह शायरी NewsNationOnline की ‘आज के अल्फ़ाज़’ श्रृंखला के लिए मौलिक रूप से लिखी गई है। इसे किसी प्रसिद्ध शायर के नाम से नहीं जोड़ा गया है।
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