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आज के अल्फ़ाज़: सुनने का सलीक़ा | 1 नवंबर की मौलिक शायरी

सुबह की रोशनी में आमने-सामने रखी दो कुर्सियाँ और चाय के कुल्हड़, सुनने के सलीक़े पर शायरी का प्रतीकात्मक चित्र
कंप्यूटर द्वारा तैयार हिंदी ऑडियो

1 नवंबर 2026 | मौलिक देवनागरी शायरी

हम अक्सर किसी की बात सुनते हुए ही अपना जवाब तैयार करने लगते हैं। ऐसे में सामने वाले के लफ़्ज़ तो कानों तक पहुँचते हैं, लेकिन उसकी असली परेशानी या ख़ुशी हमसे छूट जाती है। आज के ‘आज के अल्फ़ाज़’ में सुनने के इसी छोटे मगर अहम सलीक़े पर सात मौलिक शेर प्रस्तुत हैं।

आज की शायरी: सुनने का सलीक़ा

वो बोलता रहा, मैं जवाब बुनता रहा,
उसकी बात छूटती गई, मैं ख़ुद को सुनता रहा।
किसी की बात को पूरा उतरने दिया करो,
अपनी राय को कुछ देर ठहरने दिया करो।
हर शिकवे में कोई इल्ज़ाम नहीं होता,
कभी दिल को बस सुनने वाला इंसान चाहिए।
हर चुप्पी को रज़ामंदी न समझो यार,
कुछ लोग हिम्मत जोड़ते हैं बोलने से पहले।
मशवरा बाद में देना, पहले हाल पूछना,
किसी की आँख का मौसम भी कभी पढ़ना।
लफ़्ज़ सुन लेना ही काफ़ी नहीं होता,
उनके पीछे की थकान को समझना भी होता।
बात जीतने की ज़िद में रिश्ता न हारो,
ज़रा उसकी भी सुनो, फिर अपनी बात सँवारो।

इन शेरों का भावार्थ

किसी को ध्यान से सुनना केवल शिष्टाचार नहीं, दूसरे के अनुभव को महत्व देने का तरीका है। हर बातचीत का मक़सद बहस जीतना या तुरंत सलाह देना नहीं होता। कभी सामने वाले को अपनी बात पूरी करने के लिए थोड़ा समय चाहिए होता है। उसकी बात बीच में काटने से अर्थ बदल सकता है, और जल्दबाज़ी में दी गई सलाह उसके मन की असली उलझन तक पहुँच ही नहीं पाती।

इन शेरों का आशय यह भी नहीं कि हर बात से सहमत होना ज़रूरी है। असहमति भी अदब के साथ रखी जा सकती है। पहले पूरी बात सुनना, फिर सोचकर जवाब देना—यही बातचीत को अधिक भरोसेमंद बनाता है। रिश्तों में कई बार सबसे उपयोगी वाक्य कोई बड़ा मशवरा नहीं, बल्कि एक सरल सवाल होता है: “क्या तुम अपनी बात और बताना चाहोगे?”

आज का विचार

किसी को बोलने की जगह देना भी इंसानियत की एक ख़ूबसूरत ज़बान है।

रचनात्मक श्रेय: यह शायरी NewsNationOnline की ‘आज के अल्फ़ाज़’ साहित्यिक श्रृंखला के लिए मौलिक रूप से लिखी गई है। इसे किसी प्रसिद्ध शायर के नाम से प्रस्तुत नहीं किया गया है।

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Imran Siddiqui
Imran Siddiqui is a senior journalist and editor of NewsNationOnline, with over 17 years of experience covering news, politics, education and social issues in Maharashtra.

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