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फॉर्म-6 में बदलाव पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी सफाई: न मंजूरी दी, न खारिज किया; जानिए SIR विवाद की पूरी कहानी

नई दिल्ली स्थित भारत के सुप्रीम कोर्ट का भवन, फॉर्म-6 और एसआईआर विवाद की खबर के लिए
कंप्यूटर द्वारा तैयार हिंदी ऑडियो

विशेष रिपोर्ट | NewsNationOnline

सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि बिहार एसआईआर पर उसके पुराने फैसले को संशोधित फॉर्म-6 की न्यायिक मंजूरी नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि नए फॉर्म की वैधता का प्रश्न अभी विचाराधीन है।

नई दिल्ली, 12 अक्टूबर 2026।

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बीच चुनाव आयोग के संशोधित फॉर्म-6 को लेकर चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि उसने नए फॉर्म-6 में जोड़ी गई घोषणा की वैधता पर अभी कोई न्यायिक फैसला नहीं किया है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि अदालत ने इन बदलावों को मंजूरी दे दी है या इन्हें खारिज कर दिया है।

नई दिल्ली में भारत का सुप्रीम कोर्ट भवन, फॉर्म-6 एसआईआर विवाद
सुप्रीम कोर्ट भवन की फाइल फोटो। Subhashish Panigrahi / Wikimedia Commons / CC BY-SA 4.0

तीन न्यायाधीशों की पीठ ने क्या कहा?

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के समक्ष याचिकाकर्ता के वकील ने चुनाव आयोग के उस दावे का उल्लेख किया जिसमें संशोधित फॉर्म-6 को सुप्रीम कोर्ट के पहले के फैसले से समर्थन मिलने की बात कही गई थी। न्यायमूर्ति बागची ने स्पष्ट किया कि नए फॉर्म-6 पर कोई न्यायिक निर्णय नहीं हुआ है। बिहार एसआईआर मामले का फैसला सुनाते समय विवादित नया फॉर्म अदालत के सामने था ही नहीं। इसीलिए उस फैसले को नए बदलाव की स्वीकृति अथवा अस्वीकृति के तौर पर नहीं पढ़ा जा सकता।

5 अक्टूबर की टिप्पणी से क्या भ्रम पैदा हुआ?

पांच अक्टूबर की सुनवाई में मुख्य न्यायाधीश ने कहा था कि अदालत ने संशोधित फॉर्म-6 को मंजूरी नहीं दी है और संबंधित रिकॉर्ड सामने आने पर यह देखा जाएगा कि किसने क्या बदलाव किया। सोमवार को पीठ ने स्पष्ट किया कि उस टिप्पणी का अर्थ यह था कि अदालत ने संशोधित घोषणा की जांच नहीं की थी। न्यायिक परीक्षण न होने और किसी प्रावधान को अवैध ठहराने में अंतर है।

फॉर्म-6 क्या है और बदलाव किस बात का है?

फॉर्म-6 वह आवेदन है जिसके माध्यम से पात्र नागरिक मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन करते हैं। विवाद चुनाव आयोग के ऑनलाइन आवेदन में जोड़ी गई अतिरिक्त घोषणा से जुड़ा है। रिपोर्टों के अनुसार आवेदकों से पूछा गया कि उनका, उनके माता-पिता या दादा-दादी/नाना-नानी का नाम पिछले विशेष गहन पुनरीक्षण की मतदाता सूची में था या नहीं। आलोचकों का कहना है कि इससे नए मतदाताओं, खासकर पुराने पारिवारिक रिकॉर्ड उपलब्ध न होने की स्थिति में, अतिरिक्त कठिनाई पैदा हो सकती है। हालांकि किसी आवेदन पर वास्तविक असर संबंधित नियमों, निर्देशों और चुनाव पंजीकरण अधिकारी की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

चुनाव आयोग का पक्ष क्या रहा?

चुनाव आयोग ने 26 सितंबर को जारी अपने बयान में बिहार एसआईआर से संबंधित मई 2026 के सुप्रीम कोर्ट फैसले का हवाला देते हुए कहा था कि एसआईआर के लिए फॉर्म-6 से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा को अदालत ने बरकरार रखा है। आयोग का यह भी कहना रहा है कि मूल वैधानिक फॉर्म में संशोधन के बजाय एसआईआर के लिए अतिरिक्त घोषणा जोड़ी गई थी। अब अदालत के ताजा स्पष्टीकरण से यह स्पष्ट है कि विशिष्ट संशोधित घोषणा की वैधता पर अभी अलग से निर्णय होना बाकी है।

दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों की रिपोर्ट

द इंडियन एक्सप्रेस की जांच के अनुसार चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू ने फॉर्म-6 में बदलाव की प्रक्रिया पर आपत्ति दर्ज की थी। रिपोर्ट में कहा गया कि संबंधित आपत्तियां निर्वाचन पंजीकरण नियम, 1960 में निर्धारित प्रक्रिया से जुड़ी थीं। ये प्रकाशित रिपोर्ट और याचिका में उठाए गए आरोप हैं; अदालत ने सोमवार की टिप्पणी में इन सभी आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया।

याचिका में क्या मांग की गई है?

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार प्रिया मिश्रा की याचिका में चुनाव आयोग के भीतर सामूहिक निर्णय लेने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। याचिका में करीब 14 निर्णयों से जुड़े मूल रिकॉर्ड, बैठक कार्यवृत्त, असहमति नोट और पत्राचार पेश करने की मांग की गई है। फॉर्म-6 की अतिरिक्त घोषणा भी विवाद के प्रमुख मुद्दों में शामिल है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि किसी वैधानिक आवेदन की शर्तों में बदलाव निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करके ही किया जाना चाहिए।

पहली बार वोट देने वालों के लिए इसका क्या मतलब?

इस स्पष्टीकरण का अर्थ यह नहीं है कि सभी नए आवेदन अमान्य हो गए हैं या फॉर्म-6 भरना बंद हो गया है। मतदाता पंजीकरण की व्यवस्था जारी रहती है। लेकिन यदि किसी आवेदक से पुराने एसआईआर रिकॉर्ड या पारिवारिक जानकारी के आधार पर अतिरिक्त घोषणा मांगी जाती है, तो उसकी कानूनी वैधता और प्रक्रिया को लेकर उठे प्रश्न अभी पूरी तरह सुलझे नहीं हैं। आवेदकों को आधिकारिक निर्वाचन आयोग पोर्टल पर उपलब्ध वर्तमान निर्देश देखना चाहिए और जरूरत पड़ने पर अपने निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी से संपर्क करना चाहिए।

आगे क्या होगा?

लाइव लॉ के अनुसार पीठ ने संबंधित याचिका पर नोटिस जारी करने पर सहमति जताई और इसे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से संबंधित अन्य याचिकाओं के साथ 27 अक्टूबर 2026 के लिए सूचीबद्ध किया। आगे की सुनवाई में रिकॉर्ड, बदलाव की प्रक्रिया और कानूनी आधार से जुड़े सवालों पर अधिक स्पष्टता आ सकती है। फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यही है कि सुप्रीम कोर्ट ने संशोधित फॉर्म-6 की वैधता पर कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है।

यह भी पढ़ें: एसआईआर और चुनाव आयोग से जुड़ी खबरें

संबंधित आधिकारिक और विश्वसनीय स्रोत

भारतीय निर्वाचन आयोग का मतदाता सेवा पोर्टल | लाइव लॉ: 12 अक्टूबर की सुनवाई | बार एंड बेंच: सुप्रीम कोर्ट का स्पष्टीकरण | द इंडियन एक्सप्रेस: फॉर्म-6 विवाद की पृष्ठभूमि

एसआईआर और चुनाव आयोग से जुड़ी अन्य खबरें पढ़ें: NewsNationOnline की एसआईआर कवरेज।

संपादकीय नोट: यह रिपोर्ट 12 अक्टूबर 2026 की अदालती कार्यवाही पर प्रकाशित विश्वसनीय रिपोर्टों के आधार पर तैयार की गई है। आरोपों को न्यायालय के निष्कर्ष के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है।


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Imran Siddiqui

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