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नशे के शिकार को केवल अपराधी न समझें: सुप्रीम कोर्ट ने ड्रग सप्लाई चेन तोड़ने पर दिया जोर

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कंप्यूटर द्वारा तैयार हिंदी ऑडियो

सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी में कहा है कि मादक पदार्थों की आपूर्ति श्रृंखला के अंतिम छोर पर मौजूद लोगों को केवल अपराधी मानकर दंडित करना उचित दृष्टिकोण नहीं है। न्यायमूर्ति जे. बी. पारडीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि कानून प्रवर्तन का मुख्य ध्यान नशीले पदार्थों की उपलब्धता रोकने और उनकी आपूर्ति श्रृंखला तोड़ने पर होना चाहिए।

यह टिप्पणी उस मामले में आई जिसमें एक महिला पर कॉलेज के पास दो कथित विक्रेताओं से गांजे का पैकेट लेने का आरोप था। पुलिस ने अन्य आरोपियों के पास अधिक मात्रा में गांजा मिलने की बात कही, लेकिन महिला या उसके बैग से कोई मादक पदार्थ बरामद नहीं हुआ। महिला के विरुद्ध मामला मुख्य रूप से सह-आरोपियों के बयानों और कथित स्वीकारोक्ति पर आधारित था।

अदालत ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में मुकदमा जारी रखने से कोई उपयोगी उद्देश्य पूरा नहीं होगा और महिला के खिलाफ कार्यवाही रद्द करते हुए अपील स्वीकार कर ली। पीठ ने यह चिंता भी जताई कि विचाराधीन कैद में रहने के दौरान बने संपर्क किसी नशा-पीड़ित को आगे चलकर मादक पदार्थों के कारोबार में धकेल सकते हैं।

प्रकाशन हेतु प्रस्तावित प्रतिक्रिया — एडवोकेट महेश धन्नावत, जालना: ‘नशे की लत से जूझ रहे व्यक्ति और संगठित ड्रग तस्करी करने वाले के बीच स्पष्ट अंतर होना चाहिए। तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के साथ नशा-पीड़ितों के उपचार, परामर्श और पुनर्वास की व्यवस्था मजबूत करना भी जरूरी है।’

यह फैसला एनडीपीएस कानून के सभी मामलों में स्वतः राहत का आधार नहीं है। हर मामले का निर्णय उसके साक्ष्यों और लागू कानूनी प्रावधानों पर निर्भर करेगा।


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dhannawatlaw

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