जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची अगले महीने भारत की महत्वपूर्ण यात्रा पर आ सकती हैं। प्रधानमंत्री बनने के बाद यह उनका पहला द्विपक्षीय भारत दौरा होगा। रिपोर्ट्स के अनुसार, वह 1 से 3 जुलाई के बीच असम की राजधानी गुवाहाटी पहुंच सकती हैं, जहां उनकी मुलाकात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से होने की संभावना है। इस दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, रक्षा सहयोग और पूर्वोत्तर भारत में विकास परियोजनाओं पर व्यापक चर्चा हो सकती है। ताकाइची के साथ करीब 50 प्रमुख जापानी उद्योगपति और कारोबारी प्रतिनिधि भी भारत आने वाले हैं, जिनमें सुज़ुकी मोटर के अध्यक्ष तोशिहिरो सुज़ुकी का नाम भी शामिल है।
गुवाहाटी को क्यों चुना गया?
सूत्रों के अनुसार गुवाहाटी को बैठक स्थल के रूप में चुनने के पीछे भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ और जापान की पूर्वोत्तर भारत में बढ़ती भागीदारी प्रमुख कारण हैं। जापान लंबे समय से पूर्वोत्तर राज्यों में आधारभूत ढांचे, कनेक्टिविटी और विकास परियोजनाओं में निवेश कर रहा है। माना जा रहा है कि इस दौरे में दोनों देश क्षेत्रीय विकास, आर्थिक सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने के लिए नए समझौतों पर भी चर्चा कर सकते हैं।
मोदी और ताकाइची के बीच पहले भी हो चुकी हैं कई मुलाकातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सनाए ताकाइची के बीच पिछले आठ महीनों में कई बार मुलाकात हो चुकी है। पिछले वर्ष अक्टूबर में दोनों नेताओं ने आर्थिक सुरक्षा, रक्षा सहयोग और प्रतिभा आदान-प्रदान जैसे विषयों पर चर्चा की थी। इसके बाद जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान भी दोनों नेताओं की मुलाकात हुई थी। हाल ही में जी-7 सम्मेलन के दौरान भी दोनों देशों के नेताओं ने संबंधों को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई थी। प्रधानमंत्री मोदी ने जापान को भारत का विश्वसनीय रणनीतिक साझेदार बताते हुए व्यापार और निवेश बढ़ाने पर जोर दिया था।
शिंजो आबे की नीतियों को आगे बढ़ाने की उम्मीद
सनाए ताकाइची को जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे का करीबी और उनकी नीतियों का समर्थक माना जाता है। भारत को उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में भी दोनों देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक सहयोग की गति बनी रहेगी। अगस्त 2025 में प्रधानमंत्री मोदी के जापान दौरे के दौरान दोनों देशों ने रक्षा सहयोग और आर्थिक साझेदारी को बढ़ावा देने के लिए 10 वर्षीय रोडमैप पर सहमति जताई थी। अब भारत चाहता है कि ताकाइची सरकार भी इन समझौतों को आगे बढ़ाए और दोनों देशों के संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाए।
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