ईरान में सत्ता के लिए सबसे बड़ी चुनौती: तीसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुके जनआंदोलन, दमन पर विरोधाभासी दावे
तेहरान | अंतरराष्ट्रीय डेस्क
ईरान की सत्तारूढ़ व्यवस्था इस समय बीते कई वर्षों की सबसे गंभीर आंतरिक चुनौती का सामना कर रही है। देशभर में जारी विरोध प्रदर्शन तीसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुके हैं, जबकि सुरक्षा बलों की कार्रवाई को लेकर अलग-अलग और परस्पर विरोधी दावे सामने आ रहे हैं।
विदेश से संचालित ईरानी विपक्षी वेबसाइट ईरान इंटरनेशनल ने दावा किया है कि हाल के दिनों में ईरानी सुरक्षा बलों की कार्रवाई में कम से कम 12,000 लोगों की मौत हुई है। वेबसाइट ने इसे “ईरान के आधुनिक इतिहास की सबसे बड़ी सामूहिक हत्या” बताया है। हालांकि मानवाधिकार संगठनों के अनुसार मृतकों की संख्या अब तक कई सौ बताई जा रही है।
ईरान इंटरनेशनल के अनुसार यह जानकारी सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल, राष्ट्रपति कार्यालय से जुड़े सूत्रों, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC), चिकित्सा अधिकारियों और प्रत्यक्षदर्शियों से प्राप्त कर कई चरणों में सत्यापित की गई है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अधिकतर हत्याएं IRGC और बसीज बलों द्वारा की गईं, जो कथित रूप से सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के आदेश पर कार्रवाई कर रहे थे। सबसे अधिक मौतें 8 और 9 जनवरी की रात को हुईं और यह हिंसा सुनियोजित थी। मारे गए अधिकांश लोग 30 वर्ष से कम आयु के बताए गए हैं।
आर्थिक असंतोष से राजनीतिक विद्रोह तक
विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत 28 दिसंबर को तेहरान के ऐतिहासिक बाजार में हुई हड़तालों से हुई थी। इसके बाद यह आंदोलन देश के कई बड़े शहरों में फैल गया। पहले ये प्रदर्शन महंगाई और बेरोजगारी के खिलाफ थे, लेकिन अब ये ईरान की धार्मिक शासन प्रणाली के खिलाफ खुले राजनीतिक विद्रोह में बदल चुके हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, इन प्रदर्शनों की खासियत उनका दायरा ही नहीं बल्कि उनकी स्पष्ट राजनीतिक मांगें हैं।
इंटरनेट बंदी और सूचना संकट
ईरानी सरकार ने कई दिनों तक इंटरनेट सेवाएं बंद रखीं, जिससे विरोध प्रदर्शनों और हताहतों की स्वतंत्र पुष्टि कठिन हो गई। सोशल मीडिया पर सीमित वीडियो और प्रत्यक्षदर्शी सामने आ पाए हैं, जिससे अलग-अलग दावे और भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि सैकड़ों लोगों की मौत हुई है, लेकिन संचार प्रतिबंधों के कारण वास्तविक आंकड़े सामने नहीं आ पा रहे हैं।
निर्णायक मोड़ अभी दूर
विश्लेषकों का मानना है कि आंदोलन का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि क्या यह निर्णायक जनसंख्या स्तर तक पहुंच पाता है। फिलहाल आंदोलन बढ़ रहा है, लेकिन अभी सत्ता परिवर्तन के लिए आवश्यक स्तर तक नहीं पहुंचा है।
संगठित नेतृत्व और स्थायी नेटवर्क की कमी को आंदोलन की सबसे बड़ी कमजोरी माना जा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय दबाव और उत्तराधिकार का प्रश्न
इस संकट के बीच अंतरराष्ट्रीय दबाव भी बढ़ रहा है। अमेरिका ने ईरान के व्यापारिक साझेदारों पर 25 प्रतिशत शुल्क लगाने की घोषणा की है। वहीं 86 वर्षीय सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के उत्तराधिकार को लेकर भी अटकलें तेज हो गई हैं।
फिलहाल ईरान का भविष्य कठोर दमन और बढ़ते जनआक्रोश के बीच झूल रहा है। यह संकट किस दिशा में जाएगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन इसके परिणाम दूरगामी हो सकते हैं।

