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२ नवंबर का इतिहास: बालफोर घोषणा, अंतरिक्ष स्टेशन और किंग

NASA illustration of the existing International Space Station, with solar arrays and connected modules.
कंप्यूटर द्वारा तैयार हिंदी ऑडियो

इतिहास में दो नवंबर की तारीख कूटनीति, विज्ञान, नागरिक अधिकारों और अंतरिक्ष अनुसंधान की चार अलग-अलग कहानियां समेटे हुए है. इसी दिन वर्ष १९१७ में ब्रिटेन ने फलस्तीन से जुड़ी बालफोर घोषणा जारी की थी. वर्ष १९४७ में दुनिया के सबसे विशाल प्रायोगिक विमानों में शामिल स्प्रूस गूस ने अपनी इकलौती उड़ान भरी. वर्ष १९८३ में अमेरिका में मार्टिन लूथर किंग जूनियर के सम्मान में संघीय अवकाश बनाने वाले कानून पर हस्ताक्षर हुए. वहीं वर्ष २००० में अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर पहली नियमित अंतरिक्ष यात्री टीम पहुंची.

वर्ष १९१७ : बालफोर घोषणा और फलस्तीन का सवाल

दो नवंबर १९१७ को ब्रिटेन के विदेश मंत्री आर्थर जेम्स बालफोर ने लॉर्ड रोथ्सचाइल्ड को एक पत्र भेजा. इसमें ब्रिटिश सरकार ने फलस्तीन में यहूदी लोगों के लिए राष्ट्रीय घर स्थापित करने के विचार का समर्थन किया. उस समय पहला विश्वयुद्ध चल रहा था और फलस्तीन उस्मानी साम्राज्य का हिस्सा था. इस ऐतिहासिक पत्र का विवरण ब्रिटिश लाइब्रेरी के अभिलेख में मौजूद है. इसका मूल पाठ संयुक्त राष्ट्र के दस्तावेज में भी उपलब्ध है.

घोषणा में यह शर्त भी रखी गई थी कि फलस्तीन में पहले से रहने वाले गैर यहूदी समुदायों के नागरिक और मज़हबी अधिकारों को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए. दूसरे देशों में रहने वाले यहूदियों के अधिकार और राजनीतिक दर्जे की रक्षा का भी उल्लेख था. हालांकि पत्र में स्थानीय अरब आबादी के राष्ट्रीय आत्मनिर्णय और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के प्रश्न का स्पष्ट समाधान नहीं दिया गया था.

यहूदी राष्ट्रीय आंदोलन के समर्थकों ने इसे अपने ऐतिहासिक और राष्ट्रीय दावों की अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना. यूरोप सहित विभिन्न क्षेत्रों में यहूदियों के साथ हुए भेदभाव और उत्पीड़न की पृष्ठभूमि भी इस आंदोलन को समझने में जरूरी है. दूसरी ओर, फलस्तीनी अरबों के लिए यह सवाल गंभीर था कि एक विदेशी ताकत उनकी जमीन के भविष्य पर उनकी सहमति के बिना फैसला कैसे कर सकती है.

बाद में इस घोषणा को ब्रिटिश शासनादेश की व्यवस्था में शामिल किया गया. आगे चलकर वर्ष १९४८ में इजराइल की स्थापना, फलस्तीनियों के विस्थापन और लंबे संघर्ष जैसी घटनाओं ने पूरे क्षेत्र का इतिहास बदल दिया. लेकिन यह समझना जरूरी है कि वर्ष १९१७ का पत्र स्वयं किसी स्वतंत्र देश की स्थापना का आदेश नहीं था. उसके बाद के फैसले, युद्ध और राजनीतिक प्रक्रियाएं भी निर्णायक थीं. इतिहास की संतुलित समझ में यहूदी लोगों की सुरक्षा और राष्ट्रीय आकांक्षाओं के साथ फलस्तीनी जनता के अधिकारों तथा अनुभवों को भी जगह मिलनी चाहिए.

वर्ष १९४७ : विशाल स्प्रूस गूस विमान की पहली और आखिरी उड़ान

दो नवंबर १९४७ को अमेरिकी उद्योगपति और विमान निर्माता हॉवर्ड ह्यूजेस ने कैलिफोर्निया के लॉन्ग बीच में विशाल जलविमान की उड़ान का प्रदर्शन किया. इस विमान का औपचारिक नाम ह्यूजेस एच चार हरक्यूलिस था, जबकि दुनिया उसे स्प्रूस गूस के नाम से जानने लगी. स्मिथसोनियन संस्थान के अभिलेख पुष्टि करते हैं कि इस विमान ने इसी तारीख को अपनी एकमात्र उड़ान भरी थी.

दूसरे विश्वयुद्ध में सैनिकों और सामान को समुद्र पार ले जाने के लिए इस विशाल जलविमान की योजना बनी थी. युद्धकालीन धातु की कमी के कारण इसे मुख्य रूप से लकड़ी से बनाया गया.

परियोजना इतनी लंबी चली कि विमान तैयार होने तक युद्ध समाप्त हो चुका था. उसकी उपयोगिता और लागत पर सवाल उठने लगे. ह्यूजेस यह दिखाना चाहते थे कि भारी आकार के बावजूद विमान उड़ सकता है. परीक्षण के दौरान विमान पानी से ऊपर उठा, लगभग एक मील की दूरी तय की और फिर सुरक्षित उतर गया. इस प्रदर्शन ने उसकी उड़ान क्षमता साबित की, लेकिन लंबी दूरी पर नियमित परिवहन के लिए आवश्यक विश्वसनीयता सिद्ध नहीं की.

यह विमान कभी व्यावसायिक या सैन्य सेवा में नहीं आया. इसके बावजूद विमानन इतिहास में उसका विशेष स्थान है. उसकी कहानी बताती है कि किसी आविष्कार का असाधारण आकार या तकनीकी साहस अपने आप उसे सफल परिवहन साधन नहीं बना देता. लागत, बदलती जरूरतें, सुरक्षा और लगातार संचालन की क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती हैं.

वर्ष १९८३ : मार्टिन लूथर किंग के सम्मान में कानून

दो नवंबर १९८३ को अमेरिका के राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन ने नागरिक अधिकारों के नेता मार्टिन लूथर किंग जूनियर की स्मृति में संघीय अवकाश स्थापित करने वाले कानून पर हस्ताक्षर किए. रीगन राष्ट्रपति पुस्तकालय में उस समारोह का आधिकारिक विवरण सुरक्षित है. इस कानून को पारित कराने के लिए लंबे समय तक सामाजिक और राजनीतिक अभियान चलाना पड़ा था.

मार्टिन लूथर किंग ने अमेरिका में नस्ली भेदभाव और अलगाव के खिलाफ अहिंसक संघर्ष को नई ताकत दी. वे बसों में भेदभाव के विरोध, मतदान अधिकारों की मांग और समान नागरिक अधिकारों के आंदोलन से जुड़े रहे. वर्ष १९६३ में वाशिंगटन में हुए ऐतिहासिक मार्च ने उनके संदेश को विश्व स्तर पर पहचान दिलाई. वर्ष १९६८ में उनकी हत्या के बाद उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित करने की मांग तेज हुई.

किंग की पत्नी कोरेटा स्कॉट किंग, सांसदों और नागरिक संगठनों ने लंबे समय तक अवकाश की मांग की. आर्थिक लागत और राजनीतिक मतभेदों पर बहस के बाद कानून पारित हुआ.

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इस अवकाश का पहला संघीय आयोजन जनवरी १९८६ में हुआ. आज यह हर वर्ष जनवरी के तीसरे सोमवार को मनाया जाता है. अमेरिकी राष्ट्रीय अभिलेखागार में इसकी पुष्टि मिलती है. यहां तारीख का अंतर समझना जरूरी है. दो नवंबर कानून पर हस्ताक्षर का दिन है, न कि किंग का जन्मदिन या अवकाश मनाने की निर्धारित तारीख.

वर्ष २००० : अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर पहली स्थायी टीम

दो नवंबर २००० को अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री विलियम शेफर्ड और रूसी अंतरिक्ष यात्री यूरी गिदजेंको तथा सर्गेई क्रिकालेव अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर पहुंचे. उनका अंतरिक्ष यान इकतीस अक्टूबर को रवाना हुआ था. नासा के आधिकारिक इतिहास के अनुसार, इस टीम ने स्टेशन से जुड़ने के बाद वहां रहने और काम करने के पहले लंबे अभियान की शुरुआत की.

उस समय स्टेशन छोटा था. टीम को जीवन रक्षक उपकरण, संचार और जरूरी प्रणालियां चालू करनी थीं. लक्ष्य केवल अंतरिक्ष यात्रा नहीं, बल्कि वहां लगातार रहकर काम करने की व्यवस्था विकसित करना था.

इस परियोजना में अमेरिका और रूस के साथ कई दूसरे अंतरराष्ट्रीय भागीदार भी जुड़े. शीतयुद्ध के बाद दोनों देशों का तकनीकी अनुभव साझा करना सहयोग का महत्वपूर्ण उदाहरण बना. पृथ्वी पर राजनीतिक मतभेद पूरी तरह समाप्त नहीं हुए, लेकिन अंतरिक्ष में संयुक्त संचालन, सुरक्षा और अनुसंधान के लिए व्यवहारिक व्यवस्था बनी. पहली टीम ने अगले दल को जिम्मेदारी सौंपने के बाद मार्च २००१ में पृथ्वी पर वापसी की.

दो नवंबर की ऐतिहासिक विशेषता अंतरिक्ष स्टेशन पर लगातार मानव मौजूदगी की शुरुआत है. इसे स्टेशन के पहले हिस्से के प्रक्षेपण या अंतरिक्ष यात्रियों की इकतीस अक्टूबर वाली उड़ान से अलग समझना चाहिए. उस पहले प्रक्षेपण की चर्चा हमारे इकतीस अक्टूबर के इतिहास वाले लेख में भी की गई है.

आज की तारीख से क्या सीख मिलती है

बालफोर घोषणा दिखाती है कि कूटनीतिक भाषा के दूरगामी राजनीतिक और मानवीय परिणाम हो सकते हैं. स्प्रूस गूस विमान तकनीकी प्रयोगों की संभावनाओं के साथ उनकी सीमाएं भी बताता है. मार्टिन लूथर किंग के सम्मान में बना कानून याद दिलाता है कि समान अधिकारों की लड़ाई में लंबा जनसंघर्ष जरूरी होता है. अंतरिक्ष स्टेशन की कहानी साझा वैज्ञानिक प्रयास की ताकत सामने रखती है.

ऐतिहासिक घटना और उसके बाद के परिणाम अलग-अलग समझने चाहिए. संबंधित घटनाओं के लिए एक नवंबर का इतिहास भी पढ़ें.

प्रमुख ऐतिहासिक स्रोत : संयुक्त राष्ट्र, ब्रिटिश लाइब्रेरी, स्मिथसोनियन संस्थान, रीगन पुस्तकालय और नासा.

यह खबर पढ़ें: English


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Imran Siddiqui
Imran Siddiqui is a senior journalist and editor of NewsNationOnline, with over 17 years of experience covering news, politics, education and social issues in Maharashtra.

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