जालना, संवाददाता: पंजाब के होशियारपुर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने पुरानी कार के विक्रेता को ₹2.51 लाख वापस करने और ₹7,500 मुकदमे का खर्च देने का आदेश दिया है। आयोग ने वाहन के कानूनी इतिहास की उचित जांच न करने को सेवा में कमी माना।
आयोग के अध्यक्ष नवीन पुरी और सदस्य हरविमल डोगरा तथा प्रेम सिंह सलारिया ने 21 अक्टूबर 2026 को आदेश दिया।
क्या था मामला?
जुलाई 2022 में ग्राहक ने लगभग ₹2.51 लाख में पुरानी कार खरीदी थी। डीलर ने गाड़ी के दस्तावेज वैध बताए। लेकिन 6 दिसंबर 2022 को अहमदगढ़ वाहन पंजीकरण प्राधिकरण ने बताया कि कार पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय की कार्यवाही से संबंधित आदेश के तहत ब्लैकलिस्ट थी।
शिकायत के बाद भी समस्या नहीं सुलझी। मार्च 2023 में खरीदार ने कार डीलर को सौंप दी। डीलर ने बाद में ₹2,51,700 में कार वापस खरीदने का प्रस्ताव दिया, लेकिन खरीदार ने अतिरिक्त खर्च का हवाला देकर इसे ठुकराया।
केवल मध्यस्थ होने का बचाव अस्वीकार
डीलर ने कहा कि आरसी ट्रांसफर हो चुकी थी और वह केवल लेनदेन में मध्यस्थ था। आयोग ने माना कि व्यावसायिक रीसेलर को पंजीकरण रिकॉर्ड और वाहन की पूर्व कानूनी स्थिति की उचित जांच करनी चाहिए। अतिरिक्त खर्च का पर्याप्त प्रमाण नहीं मिलने के कारण खरीद मूल्य और ₹7,500 मुकदमे के खर्च का ही आदेश हुआ। रिफंड इस पुष्टि पर निर्भर है कि कार डीलर के कब्जे में है।
महाराष्ट्र के खरीदारों के लिए सबक
पुरानी गाड़ी खरीदने से पहले आरसी, मालिकाना रिकॉर्ड, लोन, हाइपोथिकेशन, बीमा, लंबित चालान, ब्लैकलिस्ट स्थिति और कानूनी प्रतिबंध जांचना जरूरी है। सभी रसीदें और लिखित आश्वासन सुरक्षित रखें। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के तहत परिस्थितियों के अनुसार शिकायत की जा सकती है।
Adv. Mahesh Dhannawat का बयान: “पुरानी गाड़ी खरीदना केवल आर्थिक लेन-देन नहीं, बल्कि कानूनी जिम्मेदारियों से जुड़ा व्यवहार भी है। डीलर को वाहन की सही जानकारी देना और खरीदार को दस्तावेजों की जांच करना आवश्यक है। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत सेवा में कमी होने पर उपभोक्ता उचित राहत मांग सकता है।”
समाचार स्रोत: Law Trend, 2 नवंबर 2026।
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