Call for awareness on Human Rights Day
*सभी भारतीयों में बंधुत्व की भावना विकसित होनी चाहिए – सरकारी अभियोजक वर्षा मुकीम
जालना: 10 दिसंबर को हर साल मानव अधिकार दिवस के रूप में मनाया जाता है. इस अवसर पर भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा भारतीय संविधान में उल्लिखित स्वतंत्रता, समानता, बंधुता और न्याय के सिद्धांतों को समझने और अपनाने पर जोर दिया गया. सरकारी अभियोजक वर्षा मुकीम ने कहा कि हर नागरिक को अपने और दूसरों के अधिकारों का सम्मान करते हुए, बंधुत्व की भावना को अपने दिल में जगह देनी चाहिए.
जिला कलेक्टर कार्यालय के राजस्व भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में अपर जिलाधिकारी रीता मैत्रेवार, निवासी उपजिलाधिकारी गणेश महाडिक, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के एड महेश धन्नावत और तहसीलदार प्रणाली तायडे सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे.
अपने संबोधन में वर्षा मुकीम ने कहा कि 1948 में संयुक्त राष्ट्र संघ ने 30 मानवाधिकारों का घोषणा पत्र स्वीकार किया, और 1993 में भारत ने मानवाधिकार कानून लागू कर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की स्थापना की. उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों का हनन होने पर उन्हें सुनिश्चित करने का कार्य मानवाधिकार आयोग करता है। मानवता की प्रगति के लिए सभी को समान रूप से जीने का अधिकार मिलना आवश्यक है.
निवासी उपजिलाधिकारी गणेश महाडिक ने कहा कि भारतीय संविधान ने जन्म से ही सभी नागरिकों को समान मूलभूत अधिकार दिए हैं. उन्होंने बताया कि अधिकारों का उपयोग जिम्मेदारी के साथ करना महत्वपूर्ण है और भारतीय संविधान ने सभी को खुशहाल जीवन जीने का अवसर प्रदान किया है.

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के एड महेश धन्नावत ने गरीब और जरूरतमंद नागरिकों से आग्रह किया कि न्यायालय में निःशुल्क कानूनी सहायता के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से संपर्क करें.
कार्यक्रम का प्रारंभिक परिचय तहसीलदार प्रणाली तायडे ने दिया. इस अवसर पर जिला कलेक्टर कार्यालय के विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे.
