डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर फ्लाईओवर पर कंटेनर दुर्घटना ने शहर को झकझोर दिया है। इस हादसे में पुल की सुरक्षा दीवार एक बार फिर टूट गई। इसके साथ ही उसी दीवार की मरम्मत के लिए एडवोकेट महेश धन्नावत द्वारा पूर्व में किए गए लगातार प्रयास चर्चा में आ गए हैं।
दो वर्षों से अधिक समय तक टूटी रही दीवार
एडवोकेट धन्नावत के अनुसार, पहले भी इसी पुल पर हुए एक हादसे में सुरक्षा दीवार टूट गई थी। जालना महानगरपालिका ने दो वर्षों से अधिक समय तक उसकी मरम्मत नहीं की। आंबेडकर जयंती के अवसर पर पुल के शेष हिस्से की रंगाई-पुताई हुई, लेकिन टूटी हुई सुरक्षा दीवार की मरम्मत नहीं हुई।
पहले सुरक्षा, फिर रंगाई-पुताई
धन्नावत ने अधिकारियों के समक्ष बार-बार यह मुद्दा उठाया कि डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के नाम पर बने पुल का वास्तविक सम्मान केवल रंग करने में नहीं, बल्कि नागरिकों की जान की सुरक्षा सुनिश्चित करने में है। उनके अनुसार, निरंतर प्रयासों के बाद महानगरपालिका ने आखिरकार सुरक्षा दीवार की मरम्मत कराई।
अब फिर टूटी दीवार; भाग्यनगर की इमारतों पर खतरे की आशंका
वर्तमान दुर्घटना में कंटेनर की टक्कर से वही सुरक्षा दीवार फिर क्षतिग्रस्त हो गई। एडवोकेट धन्नावत का आकलन है कि दीवार के मौजूद होने से वाहन की गति या दिशा पर कुछ असर पड़ा होगा। उनके अनुसार, यदि दीवार नहीं होती तो कंटेनर भाग्यनगर क्षेत्र की इमारतों से टकराकर भारी जनहानि और संपत्ति की क्षति कर सकता था। यह संभावित खतरे के बारे में उनका आकलन है; इसकी पुष्टि तकनीकी जांच से ही हो सकती है।
हादसे से प्रशासन को सबक लेने की जरूरत
इस दुर्घटना में हुई मौतें बेहद दुखद हैं। फ्लाईओवर की संरचनात्मक जांच, मजबूत सुरक्षा दीवार, तीखे मोड़ पर चेतावनी संकेत, गति नियंत्रण और भारी वाहनों की आवाजाही की समीक्षा तुरंत होनी चाहिए।
रंग से बढ़कर इंसान की जिंदगी
एडवोकेट महेश धन्नावत के प्रयास यह संदेश देते हैं कि सार्वजनिक सुरक्षा के लिए नागरिकों की आवाज और निरंतर प्रयास महत्वपूर्ण हैं। पुराने पत्राचार और मरम्मत का आधिकारिक रिकॉर्ड भी जांचा जाना चाहिए। अब क्षतिग्रस्त दीवार की सुरक्षित पुनर्निर्माण व्यवस्था प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।
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