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सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को याद दिलाई कानूनी प्रक्रिया, मेट्रो-इंटरनेट और आवाजाही पर भी अहम निर्देश

AI-generated illustration of a peaceful youth protest near India Gate in New Delhi, with Indian flags and security barricades.
कंप्यूटर द्वारा तैयार हिंदी ऑडियो

न्यूज नेशन ऑनलाइन | राष्ट्रीय समाचार

नई दिल्ली, 11 अक्टूबर 2026। जंतर-मंतर प्रदर्शन और व्यापक पुलिस प्रतिबंधों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने रविवार को विशेष सुनवाई की। न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा कि किसी भी व्यक्ति की हिरासत विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुरूप ही होनी चाहिए।

लाइवलॉ की रिपोर्ट के अनुसार अदालत ने विशेष रूप से शांतिपूर्ण और निहत्थे लोगों की सभाओं के मामले में गैरकानूनी हिरासत से बचने को कहा, खासकर उन इलाकों में जहां भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लागू नहीं है। अदालत ने यह भी माना कि वास्तविक कानून-व्यवस्था की स्थिति में वैधानिक प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।

पीठ ने मेट्रो और रेल सेवाएं सामान्य रखने, इंटरनेट सेवाओं को कानून के अनुरूप निर्बाध बनाए रखने और नागरिकों की आवाजाही सुनिश्चित करने पर जोर दिया। सड़क पर लगाए गए बैरिकेड की समीक्षा कानून-व्यवस्था और यातायात की आवश्यकताओं के आधार पर करने के निर्देश दिए गए।

क्या है नया घटनाक्रम?

सुनवाई में याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि पूर्व आदेश के बावजूद सार्वजनिक परिवहन प्रभावित हुआ और लोगों को गैरकानूनी ढंग से हिरासत में लिया गया। अदालत ने कथित अवमानना संबंधी याचिका पर संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा। नोटिस जारी होना अपने आप में आरोप सिद्ध होना नहीं है।

हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार पीठ ने हिरासत के मामलों में तीन पहलुओं पर अधिकारियों से जवाब चाहा: किन परिस्थितियों में हिरासत हुई, कार्रवाई किस तरीके से की गई और उसका औचित्य क्या था। मामले में अगली सुनवाई 13 अक्टूबर के लिए सूचीबद्ध बताई गई है।

इस आदेश का व्यावहारिक अर्थ यह नहीं कि हर स्थान पर बिना शर्त प्रदर्शन किया जा सकता है। इसका अर्थ यह है कि शांतिपूर्ण विरोध और आवागमन पर कोई भी प्रतिबंध कानूनी आधार, आवश्यकता और अनुपातिकता की कसौटी पर परखा जाएगा। दिल्ली पुलिस तथा संबंधित विभागों के जवाब के बाद विवाद के तथ्य अधिक स्पष्ट हो सकेंगे।

संबंधित खबरें: सुप्रीम कोर्ट का विस्तृत आदेश | एसआईआर और मतदाता सूची का विवाद | दिल्ली प्रदर्शन पर संयुक्त राष्ट्र की प्रतिक्रिया

मूल स्रोत और आगे पढ़ें

संपादकीय नोट: हिरासत और कथित दुर्व्यवहार संबंधी आरोपों को आरोप के रूप में प्रस्तुत किया गया है। उपलब्ध आधिकारिक जवाब और अदालती निर्देशों के आधार पर रिपोर्ट अपडेट की जा सकती है।


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Imran Siddiqui

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