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व्हाट्सऐप पर आपत्तिजनक फोटो भेजना ‘सार्वजनिक’ माना जाएगा, हाईकोर्ट ने एट्रोसिटी मामले में अग्रिम जमानत ठुकराई

व्हाट्सऐप पर आपत्तिजनक फोटो भेजना ‘सार्वजनिक’, एट्रोसिटी एक्ट लागू – एड. महेश धन्नावत
कंप्यूटर द्वारा तैयार हिंदी ऑडियो

जालना. व्हाट्सऐप पर अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी व्यक्ति के आपत्तिजनक फोटो या वीडियो फैलाना ‘सार्वजनिक रूप से’ (पब्लिक व्यू) माना जाएगा और इस पर एट्रोसिटी एक्ट लागू होगा। बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने यह अहम फैसला देते हुए आरोपी की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी। इस फैसले पर जालना के वरिष्ठ अधिवक्ता एड. महेश धन्नावत ने सोशल मीडिया इस्तेमाल करने वालों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

व्हाट्सऐप पर आपत्तिजनक फोटो भेजना ‘सार्वजनिक’, एट्रोसिटी एक्ट लागू – एड. महेश धन्नावत
एड महेश धन्नावत वरिष्ठ अधिवक्ता जालना

क्या था मामला

अदालती मामले के मुताबिक आरोपी निखिल थेपले के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और अनुसूचित जाति-जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम यानी एट्रोसिटी एक्ट की कई धाराओं में मामला दर्ज है। आरोप है कि पीड़ित महिला के इनकार करने पर आरोपी ने उसकी आपत्तिजनक तस्वीरें और वीडियो उसके पति, ननद और रिश्तेदारों को व्हाट्सऐप पर भेज दिए।

आरोपी ने अग्रिम जमानत के लिए नागपुर खंडपीठ में अर्जी दी थी। उसकी ओर से दलील दी गई कि व्हाट्सऐप पर मैसेज भेजना ‘सार्वजनिक स्थान’ के दायरे में नहीं आता।

व्हाट्सऐप पर एट्रोसिटी एक्ट: हाईकोर्ट ने क्या कहा

एकल पीठ के न्यायमूर्ति शिवराज खोब्रागडे ने यह दलील खारिज कर दी। अदालत ने साफ किया कि व्हाट्सऐप जैसे सोशल मीडिया से ऐसी आपत्तिजनक सामग्री भेजना साफ तौर पर ‘पब्लिक व्यू’ के दायरे में आता है, इसलिए इस मामले में एट्रोसिटी एक्ट की धाराएं पहली नजर में लागू होती हैं। मामला दर्ज होने के बाद से आरोपी के फरार रहने का उल्लेख करते हुए अदालत ने उसकी अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी।

  • अदालत: बॉम्बे हाईकोर्ट, नागपुर खंडपीठ (एकल पीठ)
  • फैसला: व्हाट्सऐप पर भेजी गई आपत्तिजनक सामग्री ‘पब्लिक व्यू’; अग्रिम जमानत खारिज
  • वकील: आरोपी की ओर से एड. महेश राय, सरकार की ओर से अतिरिक्त सरकारी वकील जी. एस. उमळे और पीड़िता की ओर से एड. संकेत जोशी

यह भी पढ़ें:

एड. महेश धन्नावत की चेतावनी

एड. धन्नावत ने कहा, “बॉम्बे हाईकोर्ट का यह फैसला सोशल मीडिया का गलत इस्तेमाल करने वालों के लिए साफ और सख्त संदेश है। कई लोग समझते हैं कि व्हाट्सऐप पर निजी मैसेज या ग्रुप में कुछ भी भेजना निजी मामला है और उस पर कार्रवाई नहीं होती। लेकिन अदालत ने साफ कर दिया है कि ऐसा गलत इस्तेमाल ‘पब्लिक व्यू’ माना जाएगा और एट्रोसिटी जैसे सख्त कानून लागू हो सकते हैं।”

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उन्होंने कहा कि हर नागरिक को डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते समय बेहद सावधान और जिम्मेदार रहना चाहिए। किसी के निजी या आपत्तिजनक फोटो-वीडियो फैलाना कानूनी रूप से भारी पड़ सकता है।

एट्रोसिटी एक्ट क्या है

अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 इन वर्गों के लोगों के खिलाफ अपमान और अत्याचार रोकने का कानून है। इसकी कई धाराओं में ‘सार्वजनिक रूप से’ किए गए कृत्य को अपराध की शर्त माना गया है, इसीलिए यह फैसला अहम है। कानून का पूरा पाठ इंडिया कोड पर उपलब्ध है।

और खबरें पढ़ें: अदालत के फैसले

रिपोर्ट: इमरान सिद्दीकी, जालना


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Imran Siddiqui
Imran Siddiqui is a senior journalist and editor of NewsNationOnline, with over 17 years of experience covering news, politics, education and social issues in Maharashtra.

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