18 अक्टूबर 2026 | मौलिक हिंदी कविता
जब शहर ने हाथ बढ़ाया
तेज़ रफ़्तार शहरों में कभी किसी अजनबी की छोटी-सी मदद पूरे दिन की सबसे यादगार घटना बन जाती है। आज की कविता इंसानियत और बिना स्वार्थ के बढ़े हाथों को समर्पित है।
सुबह की जल्दी में उसका थैला फट गया,
फुटपाथ पर किताबों का छोटा संसार बिखर गया।
बस की ओर बढ़ते कदम एक पल को ठहर गए,
बच्चे की आँखों में जैसे सौ सवाल उतर गए।
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