“प्रतिभा एक प्रतिशत प्रेरणा और निन्यानवे प्रतिशत परिश्रम है।”
— थॉमस अल्वा एडिसन (महान अमेरिकी आविष्कारक)
English: “Genius is one percent inspiration and ninety-nine percent perspiration.” — Thomas Alva Edison
इस सुविचार का अर्थ
हम अक्सर सोचते हैं कि सफल लोग जन्म से ही “टैलेंटेड” होते हैं। एडिसन, जिन्होंने बिजली के बल्ब समेत सैकड़ों आविष्कारों पर काम किया, बताते हैं कि अच्छा विचार तो बस शुरुआत है। असली काम उसके बाद शुरू होता है — बार-बार कोशिश करना, गलतियों से सीखना और थकान के बावजूद डटे रहना। यानी सफलता का बड़ा हिस्सा पसीने और लगन से बनता है, किस्मत या जन्मजात प्रतिभा से नहीं।
रोज़मर्रा की ज़िंदगी से एक उदाहरण
जालना के एक सरकारी स्कूल की छात्रा को गणित से डर लगता था। उसने तय किया कि वह हर दिन सिर्फ़ 30 मिनट अभ्यास करेगी, चाहे कुछ भी हो। पहले महीने में कोई खास फर्क नहीं दिखा, लेकिन तीन महीने बाद वही छात्रा कक्षा में सबसे पहले सवाल हल करने लगी। उसके माता-पिता खेत में मज़दूरी करते हैं — उन्होंने उसे यही सिखाया था कि फसल एक दिन में नहीं उगती। पढ़ाई हो या काम, रोज़ की छोटी मेहनत ही बड़ा नतीजा देती है।
लगातार मेहनत से मिली सफलता की एक ताज़ा मिसाल पढ़ें: IIIT Ranchi के सक्षम को Rubrik में ₹1.25 करोड़ का पैकेज।
आज क्या करें
- एक ऐसा काम चुनें जिसे आप टाल रहे हैं, और आज उस पर सिर्फ़ 25 मिनट बिना रुके काम करें।
- आज की एक गलती लिखें और उससे मिली एक सीख भी — असफलता को अभ्यास का हिस्सा मानें।
- बच्चों की तारीफ़ “तुम होशियार हो” कहकर नहीं, “तुमने बहुत मेहनत की” कहकर करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न 1: यह सुविचार किसका है?
उत्तर: यह प्रसिद्ध अमेरिकी आविष्कारक थॉमस अल्वा एडिसन (1847–1931) का कथन है, जिसे उन्होंने प्रतिभा और मेहनत के रिश्ते को समझाने के लिए कहा था।
प्रश्न 2: क्या इसका मतलब है कि प्रतिभा का कोई महत्व नहीं?
उत्तर: नहीं। प्रतिभा और अच्छा विचार ज़रूरी हैं, लेकिन लगातार मेहनत के बिना वे कभी पूरे नहीं होते। मेहनत ही प्रतिभा को नतीजे में बदलती है।
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