अहमदाबाद | NewsNation Online
सरकारी आवास नहीं मिलने के मुद्दे पर फुटपाथ पर सोने की धमकी देने वाली वरिष्ठ सिविल जज ए. एच. दवे की बर्खास्तगी को गुजरात हाईकोर्ट ने बरकरार रखा है। रिपोर्ट के अनुसार, न्यायमूर्ति एन. एस. संजय गौड़ा और न्यायमूर्ति जे. एल. ओडेदरा की खंडपीठ ने 9 अक्टूबर 2026 को उनकी याचिका खारिज कर दी।
क्या था पूरा मामला?
मामला वर्ष 2012 का बताया गया है, जब ए. एच. दवे का वडोदरा से डीसा तबादला हुआ था। उन्होंने नई नियुक्ति पर सरकारी आवास की मांग की, लेकिन उन्हें बताया गया कि न्यायिक अधिकारियों के लिए सरकारी क्वार्टर उपलब्ध नहीं हैं और निजी आवास की व्यवस्था करनी होगी। इसके बाद उन्होंने पालनपुर के प्रधान जिला न्यायाधीश को फैक्स भेजकर फुटपाथ पर रात बिताने की अनुमति मांगी। वरिष्ठ न्यायिक अधिकारियों को लिखे गए पत्रों और कथित आचरण को लेकर विभागीय जांच भी हुई।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने कहा कि प्रत्येक नियुक्ति स्थल पर सरकारी आवास उपलब्ध होना अनिवार्य नहीं है और आवास नहीं मिलने पर नियमानुसार मकान किराया भत्ता लेकर वैकल्पिक व्यवस्था की जा सकती है। विभागीय जांच में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की गई थी। अदालत ने बर्खास्तगी में हस्तक्षेप करने का आधार नहीं पाया।
एडवोकेट महेश धन्नावत की प्रतिक्रिया
एडवोकेट महेश धन्नावत ने कहा, “न्यायपालिका की गरिमा और अनुशासन न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता के मूल आधार हैं। न्यायिक अधिकारियों से उच्च नैतिक मानकों और मर्यादित आचरण की अपेक्षा की जाती है। साथ ही, प्रत्येक विभागीय कार्रवाई में निष्पक्ष जांच और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन भी उतना ही आवश्यक है। यह मामला संस्थागत अनुशासन और जवाबदेही के महत्व को सामने लाता है।”

यह मामला न्यायिक सेवा में संस्थागत अनुशासन और जवाबदेही के महत्व को रेखांकित करता है। साथ ही, विभागीय कार्रवाई में निष्पक्ष प्रक्रिया और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन भी आवश्यक है।
मूल रिपोर्ट: Law Trend
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