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जालना में ड्रोन से कृत्रिम बारिश का प्रयोग: इस्लामवाडी की पहाड़ी से 400 मीटर की ऊंचाई पर छिड़काव

जालना के पास इस्लामवाडी की पहाड़ी पर ड्रोन से कृत्रिम बारिश (क्लाउड सीडिंग) परीक्षण के दौरान प्रिम एरोस्पेस की टीम
कंप्यूटर द्वारा तैयार हिंदी ऑडियो

जालना, 31 अक्टूबर 2026 — जिले में गहराते सूखे और पानी की किल्लत के बीच कृत्रिम बारिश की संभावनाएं तलाशने के लिए प्रिम एरोस्पेस कंपनी ने स्वदेशी ड्रोन तकनीक से जालना में क्लाउड सीडिंग का परीक्षण किया है. कंपनी ने 28 अक्टूबर को जालना शहर के पास इस्लामवाडी की पहाड़ी से ड्रोन उड़ाकर करीब 400 मीटर की ऊंचाई पर नमक आधारित विशेष पदार्थ का छिड़काव किया. कंपनी के अनुसार, यह प्रायोगिक परीक्षण तकनीकी रूप से सफल रहा.

जालना के पास इस्लामवाडी की पहाड़ी पर ड्रोन से क्लाउड सीडिंग परीक्षण के दौरान प्रिम एरोस्पेस की टीम
इस्लामवाडी की पहाड़ी पर परीक्षण से पहले ड्रोन और टीम

इस दौरान प्रिम एरोस्पेस के प्रद्युम्न मानधानी और संजीवनी अस्पताल के संचालक डॉ. बलिराम बागल सहित अन्य लोग उपस्थित थे.

  • कब: 28 अक्टूबर 2026
  • कहां: इस्लामवाडी की पहाड़ी, जालना
  • ऊंचाई: करीब 400 मीटर
  • पदार्थ: नमक आधारित विशेष पदार्थ
  • नतीजा: तकनीकी रूप से सफल (कंपनी के अनुसार); बारिश बढ़ने की पुष्टि अभी नहीं

क्लाउड सीडिंग से बादलों में बारिश बढ़ाने का प्रयोग

क्लाउड सीडिंग तकनीक में अनुकूल बादलों के भीतर विशेष कण छोड़े जाते हैं, जिससे पानी की बूंदें बनने और बढ़ने की प्रक्रिया को मदद मिल सकती है. हालांकि, इसका असर बादलों की स्थिति, तापमान और वातावरण में मौजूद नमी पर निर्भर करता है.

कंपनी का उद्देश्य ड्रोन के जरिए इस प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक और लक्षित बनाना है. अब तक ड्रोन का उपयोग मुख्य रूप से रक्षा, खेती और व्यावसायिक क्षेत्रों में होता रहा है. प्रिम एरोस्पेस इस तकनीक को मौसम संबंधी प्रयोगों में भी इस्तेमाल करने की संभावनाएं तलाश रही है. क्लाउड सीडिंग की सामान्य जानकारी यहां पढ़ी जा सकती है.

जालना में कृत्रिम बारिश प्रयोग के दौरान बादलों के नीचे उड़ता ड्रोन
करीब 400 मीटर की ऊंचाई पर छिड़काव के लिए उड़ान भरता ड्रोन

सूखाग्रस्त क्षेत्रों को राहत देने की कोशिश

प्रिम एरोस्पेस के प्रद्युम्न मानधानी ने बताया कि इस पहल का मकसद सूखे से जूझ रहे किसानों और पानी की कमी का सामना कर रहे क्षेत्रों के लिए नए तकनीकी विकल्प तलाशना है. ड्रोन आधारित क्लाउड सीडिंग की प्रभावशीलता जांचने के लिए आगे भी वैज्ञानिक परीक्षण और मूल्यांकन किए जाएंगे.

हालांकि, इस परीक्षण से वास्तविक बारिश होने या वर्षा की मात्रा बढ़ने की पुष्टि नहीं हुई है. वैज्ञानिक नतीजे सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सूखा निवारण के प्रयासों में यह तकनीक कितनी उपयोगी साबित हो सकती है.

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जालना के सूखे से जुड़ी सभी खबरें पढ़ने के लिए जालना न्यूज़ सेक्शन देखें.

रिपोर्ट: इमरान सिद्दीकी, जालना


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Imran Siddiqui
Imran Siddiqui is a senior journalist and editor of NewsNationOnline, with over 17 years of experience covering news, politics, education and social issues in Maharashtra.

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