जालना: महाराष्ट्र सरकार ने सूखे और कमजोर मानसून को देखते हुए 16 अक्टूबर से राज्य के शहरी और ग्रामीण स्थानीय निकायों में कम से कम 10 प्रतिशत पानी की कटौती लागू करने का निर्देश दिया है. जालना में पहले से घटते जलस्रोत और अनियमित आपूर्ति के कारण इस फैसले का स्थानीय असर विशेष रूप से महत्वपूर्ण होगा.
पीने के पानी को प्राथमिकता
राज्य की जल प्रबंधन नीति में पीने के पानी और पशुधन की जरूरत को प्राथमिकता दी गई है. सिंचाई के लिए पानी का उपयोग आवश्यक जरूरतें पूरी होने के बाद ही करने की बात कही गई है. उद्योगों को भी पानी के पुन: उपयोग पर जोर देने के निर्देश हैं.
जालना प्रशासन पहले ही हर गांव का वॉटर ऑडिट कराने और शहर में पानी की बर्बादी पर जुर्माना लगाने की तैयारी कर चुका है.
नागरिकों के लिए क्या बदल सकता है
स्थानीय निकाय उपलब्ध जलसाठे के हिसाब से सप्लाई का अंतराल, अवधि या मात्रा तय कर सकते हैं. इसलिए नागरिकों को आधिकारिक जलापूर्ति कार्यक्रम पर नजर रखने, लीकेज तुरंत ठीक कराने और पानी का अनावश्यक उपयोग रोकने की जरूरत है.
स्रोत: Indian Express.
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