आज के अल्फ़ाज़ | 12 अक्टूबर 2026
ज़िंदगी की भागदौड़ में कभी-कभी दो पंक्तियां भी मन को सुकून दे जाती हैं। न्यूज़नेशन ऑनलाइन की नई साहित्यिक श्रृंखला ‘आज के अल्फ़ाज़’ की पहली कड़ी उम्मीद, हौसले और नई शुरुआत को समर्पित है। नीचे दी गई कविता और शेर इस श्रृंखला के लिए मौलिक रूप से लिखे गए हैं।
आज की कविता: उम्मीद का उजाला
रात ने जब रास्तों पर साया गहरा कर दिया,
एक छोटे से दीये ने फिर सवेरा कर दिया।
थक गए कदमों ने पूछा, और कितना चलना है?
दिल ने हंसकर कह दिया, बस हौसला रखना है।
सूखी शाखों पर भी अक्सर नई कोंपल आती है,
धीरे-धीरे ही सही, हर चोट भर जाती है।
जो नहीं मिला, उसी का ग़म लिए कब तक जिएं?
आज की इस रोशनी में फिर नए सपने सिएं।
कल की चिंता छोड़कर यह आज अपना कर चलें,
एक छोटी-सी खुशी को भी ख़ज़ाना कर चलें।
आज का शेर
अंधेरों से कह दो, अभी हार मानी नहीं,
उम्मीद की लौ है, कहानी पुरानी नहीं।
इन अल्फ़ाज़ का मतलब
यह कविता याद दिलाती है कि मुश्किल वक्त हमेशा एक जैसा नहीं रहता। जैसे अंधेरी रात के बाद सुबह आती है, वैसे ही निराशा के बीच भी उम्मीद का रास्ता निकल सकता है। हौसला रखने का अर्थ दर्द को नकारना नहीं, बल्कि अपने लिए अगला छोटा कदम चुनना है।
आज का विचार
नई शुरुआत के लिए हर बार नया दिन नहीं, कभी-कभी नया नज़रिया काफी होता है।
रचनात्मक श्रेय: आज के अल्फ़ाज़, NewsNationOnline। यह कविता, शेर और विचार इस प्रकाशन के लिए तैयार की गई मौलिक रचनाएं हैं; किसी प्रसिद्ध शायर या कवि के नाम से प्रस्तुत नहीं की गई हैं।
ऐसी और रचनाओं के लिए आज के अल्फ़ाज़ का संग्रह पढ़ें।
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