जालना, 25 अक्टूबर 2026. जिले में बच्चों और किशोरों को पेट के कीड़ों से बचाने के लिए 27 अक्टूबर को राष्ट्रीय कृमिनाशक अभियान चलाया जाएगा. जिला स्वास्थ्य विभाग ने इस अभियान के तहत 7 लाख 44 हजार 426 बच्चों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा है. जो बच्चे निर्धारित दिन दवा नहीं ले पाएंगे, उनके लिए 3 नवंबर 2026 को मॉप-अप दिवस रखा गया है. यह जानकारी जिला सूचना कार्यालय की 23 अक्टूबर की आधिकारिक विज्ञप्ति में दी गई है.
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए अलग लक्ष्य
जिला स्वास्थ्य विभाग के नियोजन के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में 4 लाख 32 हजार 738, अन्य शहरी क्षेत्रों में 2 लाख 37 हजार 39 और जालना महानगरपालिका क्षेत्र में 74 हजार 653 बच्चों को अभियान के दायरे में रखा गया है. इन तीनों श्रेणियों का कुल लक्ष्य 7 लाख 44 हजार 430 बनता है, जबकि आधिकारिक विज्ञप्ति में जिले का कुल लक्ष्य 7 लाख 44 हजार 426 दर्ज है. यानी उपश्रेणियों और घोषित कुल संख्या में चार का अंतर है. इस छोटे अंतर के बारे में विभागीय स्पष्टीकरण उपलब्ध नहीं है; इसलिए यहां दोनों आंकड़े उसी रूप में बताए जा रहे हैं.
27 अक्टूबर को छूट गए बच्चों के लिए 3 नवंबर को दूसरा मौका
अभियान का मुख्य दिन मंगलवार, 27 अक्टूबर तय किया गया है. किसी वजह से उस दिन दवा नहीं ले पाने वाले बच्चों के लिए मंगलवार, 3 नवंबर को विशेष मॉप-अप दिवस होगा. अभिभावक अपने बच्चे के स्कूल, आंगनवाड़ी या स्थानीय स्वास्थ्य कर्मी से कार्यक्रम की व्यवस्था और समय की पुष्टि कर सकते हैं.
4,084 कर्मचारियों की मदद से अभियान
जिला प्रशासन के अनुसार इस स्वास्थ्य अभियान के लिए 4 हजार 84 कर्मियों की व्यवस्था की गई है. ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के स्वास्थ्य कर्मचारी, आशा सेविकाएं तथा आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया गया है. इनकी मदद से पात्र बच्चों तक दवा पहुंचाने और अभियान की निगरानी का नियोजन किया गया है.
पेट के कीड़ों से बच्चों को क्या नुकसान हो सकता है?
स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि पेट के कीड़ों का संक्रमण बच्चों में खून की कमी, कुपोषण तथा शारीरिक और मानसिक विकास पर प्रतिकूल असर डाल सकता है. इसी वजह से कृमिनाशक अभियान बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ा महत्वपूर्ण सार्वजनिक कार्यक्रम है. स्वच्छता, हाथ धोने की आदत और सुरक्षित पानी भी संक्रमण से बचाव के लिए उपयोगी हैं.
दवा देने से पहले स्वास्थ्य कर्मी की सलाह जरूरी
अभिभावक बच्चों को स्वयं अनुमान लगाकर दवा या खुराक न दें. उम्र, स्वास्थ्य स्थिति और अभियान के आधिकारिक प्रोटोकॉल के अनुसार प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मी से मार्गदर्शन लें. यदि बच्चा बीमार है, किसी दवा से पहले गंभीर प्रतिक्रिया हुई है या कोई चिकित्सकीय चिंता है, तो दवा देने से पहले डॉक्टर अथवा अधिकृत स्वास्थ्य कर्मी को जानकारी दें.
जिला विज्ञप्ति में एक स्थान पर लक्षित आयु वर्ग 0 से 19 वर्ष बताया गया है, जबकि जिला स्वास्थ्य अधिकारी की अपील में 1 से 19 वर्ष का उल्लेख है. ऐसे में विशेष रूप से एक वर्ष से छोटे शिशुओं के संबंध में अभिभावक स्थानीय स्वास्थ्य विभाग के निर्देशों की पुष्टि करें; उन्हें इस समाचार के आधार पर दवा न दें.
जिला स्वास्थ्य अधिकारी ने की सहयोग की अपील
जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जयश्री भुसारे ने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए अभियान में सहयोग करें. स्कूल और आंगनवाड़ी स्तर पर सूचना मिलने पर बच्चे की पात्रता तथा दवा देने की प्रक्रिया के बारे में संबंधित कर्मचारियों से बात करें.
अभिभावक किन बातों का ध्यान रखें?
- अपने बच्चे के स्कूल, आंगनवाड़ी या नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से अभियान का समय पूछें.
- बच्चे की उम्र और किसी बीमारी या दवा संबंधी चिंता की जानकारी स्वास्थ्य कर्मी को दें.
- 27 अक्टूबर को दवा न मिल पाए तो 3 नवंबर के मॉप-अप दिवस की जानकारी लें.
- किसी असामान्य स्वास्थ्य परेशानी पर तत्काल चिकित्सा सलाह लें.
- सोशल मीडिया पर प्रसारित अपुष्ट खुराक संबंधी सलाह का पालन न करें.
आधिकारिक स्रोत: जिला सूचना कार्यालय, जालना की 23 अक्टूबर 2026 की विज्ञप्ति. जिले की अन्य प्रशासनिक सूचनाओं के लिए जालना जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट देखें. यह समाचार अभियान शुरू होने से पहले की योजना पर आधारित है, अभियान पूरा होने की रिपोर्ट नहीं.
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