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सुप्रीम कोर्ट ने जहाज़ की गिरफ्तारी का आदेश रद्द किया, कहा- वैध बेयरबोट चार्टर खत्म होते ही डिमाइस चार्टर भी समाप्त

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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने समुद्री और एडमिरल्टी कानून से जुड़े एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि जहाज़ का मालिक अनुबंध की शर्तों के मुताबिक बेयरबोट चार्टर (Bareboat Charter) को वैध रूप से समाप्त कर देता है, तो डिमाइस चार्टर भी उसी समय खत्म हो जाता है। इसके लिए जहाज़ का भौतिक कब्जा उसी क्षण वापस लेना जरूरी नहीं है। अदालत ने इसी आधार पर M.V. Nereus Progress की गिरफ्तारी (arrest) का आदेश रद्द कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने सुनाया फैसला

यह फैसला भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने 25 सितंबर 2026 को सुनाया। मामला Owners and Parties Interested in M.V. Nereus Progress बनाम Om Freight Forwarders Ltd. से संबंधित था। फैसला एडमिरल्टी (समुद्री दावों का अधिकार क्षेत्र और निपटान) अधिनियम, 2017 की धारा 5(1)(b) और 5(2) के संदर्भ में आया।

क्या था पूरा मामला?

Nereides Marine Services, BIMCO BARECON 2017 चार्टरपार्टी के तहत M.V. Nereus Progress की डिमाइस चार्टरर थी। चार्टर के तहत जहाज़ का संचालन और नियंत्रण चार्टरर के पास था। लेकिन Nereides ने जहाज़ का किराया समय पर नहीं चुकाया।

किराया भुगतान में लगातार चूक के बाद जहाज़ के मालिक ने 6 नवंबर 2025 को Anti-Technicality Notice जारी किया। इसके बाद अनुबंध की Clause 31 के तहत 13 नवंबर 2025 को चार्टर समाप्त करने का नोटिस दिया गया। 19 नवंबर को मालिक ने जहाज़ का कब्जा वापस लेने के लिए Repossession Notice भी जारी किया।

इसी बीच, तूतीकोरिन में जहाज़ का भौतिक कब्जा मालिक को मिलने से पहले Om Freight Forwarders Ltd. ने 4 दिसंबर 2025 को M.V. Nereus Progress की गिरफ्तारी का आदेश हासिल कर लिया। कंपनी का दावा Nereides से जुड़े अलग समुद्री चार्टर की बकाया देनदारी से संबंधित था।

मद्रास हाईकोर्ट के फैसले से सुप्रीम कोर्ट ने असहमति जताई

मद्रास हाईकोर्ट ने जहाज़ की गिरफ्तारी हटाने से इनकार करते हुए माना था कि डिमाइस चार्टर सामान्यतः तब तक जारी रह सकता है, जब तक जहाज़ का वास्तविक कब्जा मालिक को वापस न मिल जाए या जहाज़ की औपचारिक redelivery न हो जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने इस दृष्टिकोण को स्वीकार नहीं किया। CJI सूर्यकांत द्वारा लिखे गए फैसले में BARECON 2017 की Clause 32 पर विशेष जोर दिया गया। इस क्लॉज के अनुसार, चार्टर समाप्त होने के बाद और वास्तविक कब्जा वापस मिलने तक चार्टरर जहाज़ को मालिक के लिए केवल gratuitous bailee के रूप में रखता है।

Termination और Repossession में अंतर

सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि चार्टर की समाप्ति (termination) और जहाज़ का भौतिक कब्जा वापस लेना (repossession) दो अलग-अलग घटनाएं हैं। वैध termination से पक्षों के बीच डिमाइस चार्टर का संविदात्मक संबंध समाप्त हो जाता है। इसके बाद repossession जहाज़ का वास्तविक नियंत्रण वापस लेने की व्यावहारिक प्रक्रिया है।

अदालत के अनुसार, यदि termination के बाद चार्टरर को केवल gratuitous bailee के रूप में जहाज़ रखने की अनुमति है, तो वह उसी समय डिमाइस चार्टरर के रूप में भी नहीं रह सकता। इसलिए सिर्फ यह तथ्य कि मालिक ने अभी तक जहाज़ पर भौतिक कब्जा नहीं लिया है, समाप्त हो चुके चार्टर को जारी नहीं रखता।

जहाज़ की गिरफ्तारी क्यों रद्द हुई?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एडमिरल्टी एक्ट की धारा 5(1)(b) और 5(2) के तहत किसी डिमाइस चार्टरर की देनदारी के आधार पर जहाज़ को गिरफ्तार करने के लिए यह दिखाना जरूरी है कि गिरफ्तारी के समय संबंधित व्यक्ति अभी भी डिमाइस चार्टरर था।

इस मामले में Nereides का चार्टर 13 नवंबर 2025 को वैध रूप से समाप्त हो चुका था, जबकि जहाज़ की गिरफ्तारी 4 दिसंबर 2025 को हुई। यानी गिरफ्तारी के समय Nereides लगभग तीन सप्ताह पहले ही डिमाइस चार्टरर नहीं रह गई थी। वह केवल जहाज़ के भौतिक कब्जे के हस्तांतरण तक gratuitous bailee के रूप में जहाज़ रख रही थी।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी माना कि मालिक ने भुगतान चूक के बाद समय पर कार्रवाई की और जहाज़ का कब्जा वापस लेने के लिए लगातार प्रयास किए। कब्जा लेने में हुई देरी को मालिक की गलती नहीं माना गया।

सुप्रीम कोर्ट का निष्कर्ष

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि Clause 31(a) और Anti-Technicality mechanism के तहत जारी वैध termination notice ही डिमाइस चार्टर को समाप्त करने के लिए पर्याप्त था। इसके बाद physical repossession केवल जहाज़ का वास्तविक नियंत्रण वापस लेने की प्रक्रिया थी।

इसी आधार पर अदालत ने गिरफ्तारी के आदेश को टिकाऊ नहीं माना और उसे रद्द कर दिया। फैसले का महत्व विशेष रूप से उन समुद्री विवादों में है, जहां जहाज़ की गिरफ्तारी का आधार किसी चार्टरर की देनदारी होती है और इस बात पर विवाद उठता है कि गिरफ्तारी के दिन वह व्यक्ति कानूनी रूप से डिमाइस चार्टरर था या नहीं।

फैसले का महत्व

  • वैध termination notice से डिमाइस/बेयरबोट चार्टर समाप्त हो सकता है।
  • चार्टर समाप्त होने के लिए हर स्थिति में तत्काल physical repossession जरूरी नहीं है।
  • Termination और repossession को कानूनी रूप से अलग-अलग घटनाओं के रूप में देखा जाएगा।
  • डिमाइस चार्टरर की देनदारी के आधार पर जहाज़ की गिरफ्तारी के समय उसकी वास्तविक कानूनी स्थिति महत्वपूर्ण होगी।

मामला: Owners and Parties Interested in M.V. Nereus Progress vs. Om Freight Forwarders Ltd.

निर्णय: 25 सितंबर 2026
रिपोर्टेड सिटेशन: 2026 LiveLaw (SC) 991

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आधिकारिक और स्रोत लिंक

सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया | LiveLaw Hindi की मूल रिपोर्ट

यह खबर उपलब्ध न्यायिक रिकॉर्ड और प्रकाशित रिपोर्ट के आधार पर तैयार की गई है। कानूनी मामलों में मूल आदेश/निर्णय को प्राथमिक स्रोत माना जाना चाहिए।

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Imran Siddiqui

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