NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद के बाद CJP के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शन पर अभिनेता Mukesh Khanna ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने प्रदर्शन में शामिल कुछ लोगों के व्यवहार की आलोचना की, आंदोलन को लेकर गंभीर आरोप लगाए और युवाओं से सोच-समझकर फैसले लेने की अपील की।
CJP विवाद पर Mukesh Khanna की प्रतिक्रिया
अभिनेता मुकेMukesh Khannaश खन्ना ने इंस्टाग्राम पर साझा किए गए एक वीडियो में कहा कि वह भले ही इस समय भारत से बाहर हैं, लेकिन सोशल मीडिया के जरिए पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने वाले लोग वास्तविक छात्र नहीं थे और वे उन छात्रों का प्रतिनिधित्व नहीं करते जो परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग कर रहे थे।
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‘प्रदर्शन के पीछे राजनीतिक मकसद हो सकता है’
वीडियो में Mukesh Khanna ने आरोप लगाया कि आंदोलन में शामिल कुछ लोगों के राजनीतिक उद्देश्य थे। उन्होंने कहा कि उनके अनुसार यह केवल छात्रों का आंदोलन नहीं था, बल्कि एक “स्पॉन्सर्ड” विरोध प्रदर्शन था। हालांकि, उन्होंने अपने इन आरोपों के समर्थन में कोई स्वतंत्र साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि भी उपलब्ध नहीं है।
तीखी टिप्पणी और युवाओं को सलाह
सोशल मीडिया पोस्ट भी बनी चर्चा का विषय
वीडियो के साथ साझा किए गए अपने पोस्ट में Mukesh Khanna ने प्रदर्शनकारियों के लिए कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया। उनके इस बयान पर सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। जहां कुछ लोगों ने उनकी बात का समर्थन किया, वहीं कई यूजर्स ने उनकी भाषा और टिप्पणियों पर सवाल भी उठाए।
सरकार की घोषणा के बाद समाप्त हुआ आंदोलन
Mukesh Khanna का बयान ऐसे समय में आया है जब कथित NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले को लेकर CJP के नेतृत्व में चल रहा विरोध प्रदर्शन समाप्त हो चुका है। सरकार द्वारा कुछ प्रमुख मांगों पर सहमति जताए जाने के बाद आंदोलन वापस ले लिया गया। इनमें प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों पर कार्रवाई को लेकर आश्वासन शामिल बताया गया।
Mukesh Khanna के बयान ने छात्र आंदोलनों, विरोध की भाषा और लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति को लेकर नई बहस छेड़ दी है। एक ओर उन्होंने युवाओं को सतर्क रहने और अपने भविष्य पर ध्यान देने की सलाह दी, वहीं उनके आरोप और तीखी टिप्पणियां भी चर्चा का विषय बनी हुई हैं। ऐसे मामलों में तथ्यों, जिम्मेदार संवाद और शांतिपूर्ण अभिव्यक्ति का महत्व सबसे अधिक रहता है
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