छत्रपति संभाजीनगर (प्रतिनिधि). जीवन में सफलता पाने के लिए केवल परीक्षा में अच्छे अंक हासिल करना काफी नहीं है. अनुशासन, समय का सही उपयोग, अच्छे संस्कार और समाज के प्रति जिम्मेदारी भी उतनी ही जरूरी है. यह संदेश भारतीय आर्थिक सेवा (आईईएस) की अधिकारी श्रद्धा नरवडे ने रेयान इंटरनेशनल स्कूल समूह के विद्यार्थियों को दिया. उन्होंने विद्यार्थियों को नियमित अध्ययन के साथ सकारात्मक आदतें विकसित करने और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने की सलाह दी.
रेयान इंटरनेशनल स्कूल समूह की ओर से 24 अक्टूबर 2026 को आयोजित विशेष ऑनलाइन संवाद में भारत के विभिन्न हिस्सों और दुबई के विद्यार्थियों ने भाग लिया. श्रद्धा नरवडे ने छत्रपति संभाजीनगर (पूर्व में औरंगाबाद) स्थित रेयान समूह के सेंट जॉन्स स्कूल में पढ़ाई से लेकर भारत सरकार के वित्त मंत्रालय तक के अपने सफर के अनुभव साझा किए.
पढ़ाई के साथ अन्य गतिविधियां भी जरूरी
कार्यक्रम की शुरुआत में नरवडे ने रेयान स्कूल समूह के चेयरमैन डॉ. ए.एफ. पिंटो के 12 सूत्रीय विजन और मैनेजिंग डायरेक्टर ग्रेस पिंटो की शैक्षणिक सोच का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास भी है. खेलकूद, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और अन्य गतिविधियों में भाग लेने से आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और निर्णय लेने की योग्यता विकसित होती है.
डायरी लिखने और अगले दिन की योजना बनाने से मिला लाभ
अपने अनुभव साझा करते हुए नरवडे ने बताया कि स्कूल के दिनों से उन्हें प्रतिदिन डायरी लिखने और संवाद कार्यक्रमों में भाग लेने की आदत थी. वे अगले दिन के कार्यों की सूची तैयार करती थीं और पूरे हुए तथा अधूरे कार्यों की समीक्षा करती थीं. इस अभ्यास ने भारतीय आर्थिक सेवा की परीक्षा की तैयारी के दौरान अध्ययन को व्यवस्थित रखने और लक्ष्य पूरे करने में मदद की.
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे रोज अपनी प्राथमिकताएं तय करें, समय का सदुपयोग करें और दिन के अंत में अपने काम की समीक्षा करें. नरवडे ने सफलता में माता-पिता और शिक्षकों के मार्गदर्शन की भूमिका का भी उल्लेख किया. उनके अनुसार वास्तविक सफलता ऊंचे पद तक पहुंचने के साथ अच्छा इंसान बनने और समाज के काम आने में भी है.
अखबार पढ़ने और देश-दुनिया की घटनाएं समझने की सलाह
श्रद्धा नरवडे ने विद्यार्थियों को नियमित समाचार पत्र पढ़ने और समसामयिक घटनाओं के कारण तथा प्रभाव समझने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि इससे सामान्य ज्ञान बढ़ने के साथ सोच का दायरा व्यापक होता है और भविष्य में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में भी मदद मिलती है.

देश और दुबई के विद्यार्थियों ने पूछे सवाल
संवाद के दौरान विभिन्न स्कूलों के विद्यार्थियों ने शिक्षा, करियर, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और सफलता के अनुभवों से जुड़े सवाल पूछे. नरवडे ने उनके प्रश्नों के जवाब दिए और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया. कार्यक्रम के अंत में श्रीमती मार्गरेट ने आभार व्यक्त किया.
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