JPC meeting on Wakf Bill, Darul Uloom Deoband gave suggestions
नई दिल्ली: वक्फ विधेयक पर जेपीसी की बैठक, दारुल उलूम देवबंद ने दिए सुझाव
संवेदनशील वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 पर संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की बैठक बुधवार को आयोजित की गई। इस बैठक में समिति के अध्यक्ष जगदंबिका पाल समेत सभी प्रमुख सदस्य शामिल हुए। बैठक में दारुल उलूम देवबंद के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और अपने सुझाव प्रस्तुत किए।
दारुल उलूम देवबंद की भागीदारी
बैठक में दारुल उलूम देवबंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी और वाइस चांसलर मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी मौजूद रहे।
जेपीसी के अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने कहा:
“दारुल उलूम देवबंद एक ऐतिहासिक संस्थान है, जो 150 वर्षों से अधिक पुराना है। हमने उनकी भागीदारी सुनिश्चित की ताकि इस विधेयक पर उनके सुझाव और चिंताओं को समझा जा सके।”
प्रतिनिधियों ने विधेयक को लेकर अपने लिखित सुझाव प्रस्तुत किए और कई संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा की।
जेपीसी का विस्तारित कार्यकाल
वक्फ विधेयक पर जेपीसी की रिपोर्ट संसद के शीतकालीन सत्र में प्रस्तुत होनी थी। हालांकि, समिति को अपनी रिपोर्ट तैयार करने के लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता बताई गई।
जेपीसी अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने कहा:”हमारी रिपोर्ट लगभग तैयार है, लेकिन कुछ बिंदुओं पर और विचार-विमर्श की आवश्यकता है।”

संसद में प्रस्ताव पारित कर समिति का कार्यकाल बजट सत्र 2025 के अंतिम दिन तक बढ़ा दिया गया है।
बैठक के मुख्य बिंदु
1. दारुल उलूम देवबंद के सुझाव:
मौलाना अरशद मदनी ने विधेयक में कई बिंदुओं पर सुधार की आवश्यकता बताई।
“विधेयक में वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा और स्वायत्तता सुनिश्चित करने की गारंटी होनी चाहिए।”
2. संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा:
वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और कलेक्टर को अधिकार देने जैसे विवादास्पद प्रावधानों पर दारुल उलूम ने आपत्ति जताई।
3. रिपोर्ट का प्रस्तुतिकरण:
जेपीसी अब अपनी रिपोर्ट बजट सत्र 2025 में प्रस्तुत करेगी, जिसमें सभी सुझावों और संशोधनों पर विचार किया जाएगा।
जेपीसी का कार्यकाल क्यों बढ़ा?
संसदीय कार्यवाही में विपक्षी दलों ने समिति के कार्यकाल बढ़ाने की मांग की थी, ताकि वक्फ विधेयक पर अधिक व्यापक चर्चा हो सके। बीजेपी सांसद जगदंबिका पाल ने दावा किया कि रिपोर्ट तैयार है, लेकिन विस्तृत सुझावों पर विचार के लिए समय की आवश्यकता है।
विधेयक का भविष्य
वक्फ विधेयक को लेकर अब व्यापक चर्चा और विचार-विमर्श की आवश्यकता है। क्या यह विधेयक वक्फ संपत्तियों की पारदर्शिता सुनिश्चित करेगा, या मुस्लिम समुदाय के अधिकारों पर खतरा बनेगा? इस पर अंतिम निर्णय बजट सत्र 2025 में लिया जाएगा।
देश और समाज की नजर अब इस रिपोर्ट और सरकार के अगले कदम पर टिकी है।
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