एयर इंडिया फ्लाइट 171 जांच में भारत-अमेरिका के बीच गहरा तनाव — ब्लैक बॉक्स को लेकर बड़ा टकराव: रिपोर्ट
अहमदाबाद / वॉशिंगटन: एयर इंडिया फ्लाइट 171 की भीषण दुर्घटना की जांच, शुरुआत से ही भारत और अमेरिका के अधिकारियों के बीच तीखे तनाव का कारण बनी रही। द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, ब्लैक बॉक्स तक पहुंच और उसके विश्लेषण को लेकर दोनों देशों के बीच नाटकीय टकराव तक हो गया।
260 लोगों की मौत — ड्रीमलाइनर की पहली घातक दुर्घटना
12 जून को एयर इंडिया का बोइंग 787 ड्रीमलाइनर टेकऑफ़ के तुरंत बाद नियंत्रण खो बैठा और अहमदाबाद में एक मेडिकल हॉस्टल पर जा गिरा। दुर्घटना में विमान के 242 में से 241 लोग और जमीन पर मौजूद 19 लोग मिलाकर कुल 260 लोगों की मौत हुई। यह ड्रीमलाइनर विमान मॉडल की पहली घातक दुर्घटना थी।

ब्लैक बॉक्स विश्लेषण को लेकर बड़ा टकराव
रिपोर्ट में बताया गया है कि भारतीय अधिकारियों ने अमेरिकी ब्लैक बॉक्स विशेषज्ञों को देर रात एक सैन्य विमान से उत्तर प्रदेश के कोरवा स्थित एक दूरस्थ लैब में ले जाने का निर्णय लिया था। लेकिन अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों द्वारा क्षेत्र में आतंकी खतरे और सैन्य तनाव के अलर्ट के कारण यह प्रस्ताव रोक दिया गया।
NTSB की चेयरवुमन जेनिफर होमेंडी ने इस प्रक्रिया पर कड़ी आपत्ति जताई और अमेरिका के परिवहन सचिव, बोइंग तथा GE एयरोस्पेस के शीर्ष अधिकारियों से तत्काल संपर्क किया। इसके बाद अमेरिकी दूतावास अधिकारियों ने दिल्ली एयरपोर्ट पर NTSB विशेषज्ञों को रोक दिया।
NTSB ने दिया 48 घंटे का अल्टीमेटम
होमेंडी ने भारतीय अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि 48 घंटों के भीतर ब्लैक बॉक्स डेटा विश्लेषण का स्थान (नई दिल्ली या वॉशिंगटन) तय नहीं किया गया तो अमेरिका जांच से अपना समर्थन वापस ले लेगा। आखिरकार भारत ने नई दिल्ली में NTSB के उपकरणों के साथ डेटा विश्लेषण के लिए सहमति दी।
जांच के कारणों पर दोनों देशों में मतभेद
अमेरिकी अधिकारियों का निजी तौर पर मानना है कि शुरुआती साक्ष्य कप्तान सुमीत सभरवाल द्वारा जानबूझकर विमान क्रैश करने की ओर इशारा कर सकते हैं। हालांकि, न तो भारत और न ही अमेरिका की किसी जांच एजेंसी ने अभी तक कोई आधिकारिक निष्कर्ष जारी किया है।
वहीं भारतीय पायलट संघों, नागरिक उड्डयन एजेंसियों और सुप्रीम कोर्ट ने किसी भी पायलट पर दोषारोपण से पहले पूरी जांच का इंतजार करने पर जोर दिया है।
AAIB की प्रारंभिक रिपोर्ट के अहम निष्कर्ष
भारतीय विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) की प्रारंभिक रिपोर्ट में पाया गया कि:
- फ्यूल स्विचों को RUN से CUTOFF में एक-एक सेकंड के अंतराल पर बदला गया।
- कॉकपिट रिकॉर्डिंग में कप्तान शांत सुनाई देते हैं, जबकि फर्स्ट ऑफिसर घबराए हुए लगते हैं।
- अंतिम क्षणों में कप्तान ने योक को पीछे नहीं खींचा, जबकि फर्स्ट ऑफिसर ने विमान को ऊपर उठाने की कोशिश की।
FAA के प्रमुख अन्वेषक पैट्रिक लुश ने यहां तक कहा— “इन 10 सेकंड्स पर दशकों तक बहस होती रहेगी।” बाद में उन्होंने यह टिप्पणी हटा दी।
भारतीय अधिकारियों ने जताई अपनी क्षमता
AAIB प्रमुख GVG युगंधर ने अमेरिकी विशेषज्ञों से कहा— “हम थर्ड वर्ल्ड कंट्री नहीं हैं। हम वह सब कर सकते हैं जो आप कर सकते हैं।”
भारतीय टीम का मानना था कि कोरवा की सुविधा अधिक सक्षम है, जबकि नई दिल्ली में मीडिया की नजरें अधिक रहतीं। वहीं अमेरिकी विशेषज्ञ ब्लैक बॉक्स डेटा तुरंत डाउनलोड करना चाहते थे ताकि यह पता चल सके कि कहीं कोई व्यापक सुरक्षा खतरा तो नहीं है।
जांच जारी, अंतिम रिपोर्ट की प्रतीक्षा
AAIB अभी भी फ्लाइट डेटा, कॉकपिट रिकॉर्डिंग, मेडिकल रिपोर्ट और तकनीकी संकेतों का गहराई से विश्लेषण कर रही है। अंतिम रिपोर्ट आने में समय लग सकता है, और वही यह तय करेगी कि दुर्घटना का वास्तविक कारण क्या था।
रिपोर्टर नोट: यह लेख उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों और प्रारंभिक जांच दस्तावेजों पर आधारित है। अंतिम निष्कर्ष AAIB की विस्तृत रिपोर्ट के बाद सामने आएंगे।
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