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हेड कॉन्स्टेबल से जुड़ी ₹68 करोड़ की संपत्तियों की जांच; महाराष्ट्र में भी कब होगी पड़ताल? — एडवोकेट महेश धन्नावत

Representative photograph of Indian police vehicles, not connected to the Indore Lokayukta investigation
कंप्यूटर द्वारा तैयार हिंदी ऑडियो

इंदौर के एक प्रधान आरक्षक से जुड़े करोड़ों रुपये के संपत्ति दस्तावेजों ने बड़ा सवाल खड़ा किया है: सीमित वेतन वाले कर्मचारी के आसपास इतना विशाल संपत्ति नेटवर्क कैसे बना? अब जांच का केंद्र जमीन की खरीद और पैसों के स्रोत हैं।

शाही शादी के वीडियो की चर्चा, पर शिकायत का अलग आधार

बेटी की भव्य शादी में नोट उड़ाने का कथित वीडियो चर्चा में आया। हालांकि रिपोर्टों में भूमि विवाद से संबंधित शिकायत के बाद लोकायुक्त कार्रवाई की बात है; वीडियो ही कार्रवाई की वजह था, यह स्थापित नहीं है।

51 संपत्तियों की जांच, ₹100 करोड़ का दावा अपुष्ट

शुरुआती छापों के बाद जांच का दायरा बढ़ता गया। 24 अक्टूबर तक 51 अचल संपत्तियों का अनुमानित बाजार मूल्य करीब ₹68.01 करोड़ बताया गया। बाजार मूल्य को सिद्ध अवैध आय नहीं माना जा सकता।

इंदौर पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय में चालक के रूप में पदस्थ प्रधान आरक्षक फिरोज खान से संबंधित ठिकानों पर मध्य प्रदेश लोकायुक्त ने 14 अक्टूबर 2026 को छापे मारे। 24 अक्टूबर तक जांच में 51 अचल संपत्तियों का अनुमानित बाजार मूल्य ₹68.01 करोड़ बताया गया। 24 वर्षों की सेवा में वेतन से करीब ₹75 लाख तथा कुल वैध आय लगभग ₹1.94 करोड़ होने का प्रारंभिक आकलन सामने आया है। मकान, कृषि भूमि, आवासीय एवं व्यावसायिक भूखंडों के दस्तावेजों की जांच जारी है। रिपोर्टों के अनुसार पत्नी हिना खान और युवराज पंवार से जुड़ी स्पार्कवेव रियल्टी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के नाम भी भूमि खरीदी गई। रिश्तेदारों, सहयोगियों और कर्मचारियों के नाम संपत्तियों की वास्तविक मिल्कियत तथा भुगतान के स्रोत जांचे जा रहे हैं। बेटी की शादी में खर्च और नोट उड़ाने के कथित वीडियो की चर्चा है, लेकिन उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार भूमि विवाद से संबंधित शिकायत के बाद जांच हुई; वीडियो को छापे का निर्णायक कारण बताना पुष्ट नहीं है। ₹100 करोड़ का आंकड़ा अभी प्रमाणित नहीं है।

रियल एस्टेट कंपनी और अन्य नामों पर संपत्ति

इंदौर, देवास और उज्जैन में मकान, खेत और भूखंडों के दस्तावेज जांचे जा रहे हैं। कंपनी, परिवार और सहयोगियों के नाम संपत्ति का वास्तविक स्वामित्व और धन का स्रोत तय होना बाकी है।

महाराष्ट्र में भी जांच की जरूरत — एडवोकेट धन्नावत

जालना के अधिवक्ता महेश धन्नावत का प्रकाशन हेतु प्रस्तावित बयान: “यदि एक हेड कॉन्स्टेबल के मामले में इतनी संपत्ति पर सवाल उठते हैं तो भ्रष्ट वरिष्ठ अधिकारियों के पास कितनी संपत्ति हो सकती है? महाराष्ट्र में भी ऐसे कर्मचारी होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन इसका मतलब सभी पुलिसकर्मियों को भ्रष्ट कहना नहीं है। संदिग्ध संपत्ति विवरणों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। छापे के बाद गैरकानूनी संपत्ति आखिर कब कानून के अनुसार जब्त होकर सरकार के पास जाएगी और उसकी बिक्री से जनता को लाभ कब मिलेगा? कहीं फिर भ्रष्टाचार के कारण दोषी बच तो नहीं निकलेंगे? अपराध सिद्ध होने पर सजा और संपत्ति पर अंतिम कानूनी कार्रवाई दोनों जरूरी हैं।”

छापे के बाद जब्ती और न्यायिक प्रक्रिया

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत जांच और मुकदमा चल सकता है। छापा, अस्थायी कुर्की और न्यायिक प्रक्रिया के बाद अंतिम जब्ती अलग-अलग चरण हैं। दोष सिद्ध होने तक आरोपी निर्दोष माना जाता है। जनता को जांच, आरोपपत्र, अदालती आदेश और संपत्ति के अंतिम निस्तारण की जानकारी मिलनी चाहिए।

संपादकीय टिप्पणी: आरोप जांच के अधीन हैं, दोष सिद्ध नहीं हुआ है। अधिवक्ता का बयान प्रकाशन हेतु तैयार मसौदा है।

Sources: Free Press Journal, October 24; PTI/Moneycontrol, October 24; New Indian Express, October 21.


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dhannawatlaw Lawyer.

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