जालना: जिले में घटती भूजल पातळी और पानी की उपलब्धता को देखते हुए भूजल प्रबंधन पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें विशेषज्ञों ने कृत्रिम भूजल पुनर्भरण, पानी की बचत करने वाली खेती और सूक्ष्म सिंचाई के अधिक उपयोग की आवश्यकता बताई।
कार्यशाला में बताया गया कि वर्षा पर निर्भर क्षेत्रों में भूजल का संतुलित उपयोग लंबे समय के लिए जरूरी है। बारिश के पानी को स्थानीय स्तर पर रोकने और जमीन में पहुंचाने के उपायों से भूजल स्तर को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
कृषि क्षेत्र में फसल चयन और सिंचाई पद्धति का पानी की उपलब्धता के साथ तालमेल भी महत्वपूर्ण बताया गया। ड्रिप और अन्य सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों के उपयोग से पानी की बचत के साथ फसल उत्पादन को स्थिर रखने का प्रयास किया जा सकता है।
जालना में बारिश की कमी और सूखे जैसी स्थिति के बीच यह मुद्दा और महत्वपूर्ण हो गया है। किसान और ग्रामीण क्षेत्र पानी के दीर्घकालीन प्रबंधन के साथ-साथ तत्काल राहत उपायों पर भी नजर रखे हुए हैं।
इस विषय पर हमारी बारिश की कमी और रबी सीजन वाली रिपोर्ट पढ़ें। जिला प्रशासन की आधिकारिक सूचनाओं के लिए जालना जिला प्रशासन की वेबसाइट देखें।