UCC को लेकर जालना की गुलजार मस्जिद से उठी आवाज; निकाह, तलाक और विरासत में शरीअत के तहफ़्फ़ुज़ की मांग.
जालना (प्रतिनिधि). मुसलमानों को अपने मज़हब, कुरान और हदीस के मुताबिक ज़िंदगी गुज़ारने की आज़ादी मिलनी चाहिए. यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) के नाम पर ऐसा कोई कानून नहीं लाया जाना चाहिए, जिससे मुस्लिम समाज को निकाह, तलाक, विरासत और जायदाद के बंटवारे जैसे खानदानी मामलों में शरीअत के मुताबिक अमल करने में मुश्किलें पेश आएं. यह बात जालना शहर के मंगल बाजार स्थित गुलजार मस्जिद के पेश इमाम मौलाना गुलाम जिलानी मिस्बाही ने शुक्रवार को जुमे के बयान में कही.
मौलाना ने सरकार से अपील की कि मुस्लिम समाज की मज़हबी भावनाओं और संवैधानिक अधिकारों का एहतराम करते हुए UCC से जुड़े कदमों पर दोबारा गौर किया जाए. उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान अलग-अलग मज़हबों, तहज़ीबों और परंपराओं वाला मुल्क है. किसी भी नए कानून में नागरिकों की मज़हबी आज़ादी और पहचान का खयाल रखा जाना चाहिए.
शरीअत के मुताबिक ज़िंदगी गुज़ारना मुसलमानों के ईमान का हिस्सा
मौलाना मिस्बाही ने कहा कि मुसलमानों के लिए कुरान और हदीस ज़िंदगी गुज़ारने की बुनियाद हैं. निकाह, तलाक, विरासत, जायदाद और खानदानी रिश्तों से जुड़े मसाइल में इस्लाम ने अपने उसूल बताए हैं. उन्होंने आशंका जताई कि एक जैसे निजी कानून लागू होने पर कुछ मामलों में मुसलमानों को अपने मज़हबी अहकाम पर अमल करने में कानूनी रुकावटों का सामना करना पड़ सकता है. उनके मुताबिक किसी भी कानून का मकसद इंसाफ और अधिकारों की हिफाज़त होना चाहिए.
निकाह, तलाक और विरासत के मामलों में दखल से बढ़ सकती हैं मुश्किलें
उन्होंने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ में निकाह, तलाक, तलाक के बाद की जिम्मेदारियों, विरासत और जायदाद के बंटवारे की अपनी अहमियत है. शरीअत से अलग व्यवस्था लागू होने की स्थिति में मुस्लिम परिवारों को मुश्किलें पेश आने की आशंका है. उन्होंने मांग की कि मुस्लिम समाज की चिंताओं को सुना जाए और पर्सनल लॉ को प्रभावित करने वाले प्रस्तावों पर पुनर्विचार किया जाए.
संविधान ने दी मज़हबी आज़ादी, उसका एहतराम हो
मौलाना मिस्बाही ने कहा कि संविधान नागरिकों को बराबरी और मज़हबी आज़ादी के अधिकार देता है. सरकार की जिम्मेदारी है कि संबंधित समाज की राय और चिंताओं को नजरअंदाज न करे. उन्होंने कहा कि मुसलमान देश के कानून और संविधान का एहतराम करते हैं तथा उसी के दायरे में रहकर अपने मज़हबी अधिकारों के तहफ़्फ़ुज़ के लिए आवाज उठाना चाहते हैं.
कानूनी तरीके से एतराज दर्ज कराने की अपील
मौलाना ने समाज से कहा कि UCC पर केवल चिंता जताने के बजाय उपलब्ध सरकारी प्रक्रियाओं में सुझाव और एतराज दर्ज कराएं. दस्तखत मुहिम और शांतिपूर्ण जागरूकता अभियानों में हिस्सा लें. अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाते समय सब्र, समझदारी और जिम्मेदारी बरतें.
सुन्नी जमीयत उलमा और रज़ा एकेडमी की कोशिशों का साथ दें
उन्होंने सुन्नी जमीयत उलमा और रज़ा एकेडमी जैसी तंजीमों की कोशिशों का जिक्र किया. मौलाना ने कहा कि जो तंजीम कानूनी और शांतिपूर्ण तरीके से मुस्लिम समाज के अधिकारों और शरीअत के तहफ़्फ़ुज़ के लिए काम कर रही हो, उसकी सकारात्मक कोशिशों का साथ देना चाहिए. किसी अच्छे काम का विरोध सिर्फ इसलिए न किया जाए कि उसे दूसरी तंजीम कर रही है.
समाज के इत्तेहाद पर दिया जोर
मौलाना ने कहा कि बड़े फैसलों का असर किसी एक जमात या व्यक्ति पर नहीं, पूरे समाज पर पड़ता है. इसलिए आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर जागरूकता, इत्तेहाद और कानूनी कोशिशों के जरिए सरकार तक अपनी बात पहुंचाना जरूरी है.
पाँच जुमों से नशे के खिलाफ जारी है जागरूकता
गुलजार मस्जिद के पेश इमाम पिछले पाँच जुमों से शराब और दूसरी नशीली चीज़ों से सेहत, खानदानी ज़िंदगी और समाज को होने वाले नुकसान पर बयान दे रहे हैं. यह सिलसिला आने वाले कई जुमों तक जारी रहेगा. शुक्रवार को उन्होंने बयान के आखिरी हिस्से में UCC, मुस्लिम पर्सनल लॉ और मज़हबी आज़ादी से जुड़े सवाल उठाए तथा समाज से संवैधानिक और शांतिपूर्ण रास्ते अपनाने की अपील की.
यह भी पढ़ें: गुलजार मस्जिद में जागरूकता का संदेश | शरीअत और कानून के पालन पर मौलाना की अपील.
Discover more from NewsNation Online
Subscribe to get the latest posts sent to your email.

















Leave a Reply