टाटा समूह ने ₹500 करोड़ का ट्रस्ट बनाया एयर इंडिया दुर्घटना पीड़ितों के लिए
मुंबई, 18 जुलाई 2025 — कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व का परिचय देते हुए, टाटा समूह ने एयर इंडिया विमान दुर्घटना के पीड़ितों के लिए ₹500 करोड़ का कल्याणकारी ट्रस्ट स्थापित करने की घोषणा की है। यह ट्रस्ट न केवल प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता देगा बल्कि बी. जे. मेडिकल कॉलेज हॉस्टल के पुनर्निर्माण में भी सहयोग करेगा।
दुर्घटना की पृष्ठभूमि
दिल्ली से पुणे जा रही एयर इंडिया की फ्लाइट इस महीने की शुरुआत में लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इस हादसे में कई लोगों की मौत हुई और अनेक यात्री घायल हुए। साथ ही पास में स्थित बी. जे. मेडिकल कॉलेज हॉस्टल को भी गंभीर नुकसान हुआ।
ट्रस्ट के उद्देश्य
ट्रस्ट के माध्यम से निम्नलिखित सहायता उपलब्ध कराई जाएगी:
- मृतकों के परिजनों को आर्थिक मदद और मासिक पेंशन
- गंभीर रूप से घायल लोगों के लिए दीर्घकालिक इलाज
- पीड़ित परिवारों के बच्चों को छात्रवृत्तियाँ
- मानसिक स्वास्थ्य और काउंसलिंग सेवाएँ
- बी. जे. मेडिकल कॉलेज हॉस्टल का आधुनिक पुनर्निर्माण
शासन व्यवस्था और पारदर्शिता
इस ट्रस्ट का संचालन एक स्वतंत्र ट्रस्टी बोर्ड द्वारा किया जाएगा, जिसमें टाटा समूह, एयर इंडिया, कानूनी विशेषज्ञ और सामाजिक क्षेत्र के प्रतिनिधि शामिल होंगे। सभी कार्यों की नियमित रूप से ऑडिट रिपोर्ट प्रकाशित की जाएगी और शिकायत निवारण प्रणाली भी स्थापित की जाएगी।
टाटा समूह का वक्तव्य
टाटा समूह के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने कहा: “यह ट्रस्ट हमारे दायित्व का प्रतीक है। हम इस दुखद समय में प्रभावित परिवारों के साथ हैं और उनका जीवन फिर से संवारने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
सरकार और जन प्रतिक्रिया
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा, “यह एक उदाहरण है जिसे अन्य कंपनियों को भी अपनाना चाहिए।” सोशल मीडिया और जनसमूहों ने भी टाटा समूह की इस सहानुभूतिपूर्ण पहल की प्रशंसा की है।
आगे की योजना
अगले 30 दिनों में ट्रस्ट द्वारा राहत राशि देना प्रारंभ किया जाएगा। अगस्त के अंत तक हॉस्टल पुनर्निर्माण का कार्य भी आरंभ होगा। साथ ही एक हेल्पलाइन और वेबसाइट के माध्यम से पीड़ित परिवार संपर्क कर सकेंगे।
निष्कर्ष: टाटा समूह का यह कदम कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व की मिसाल बनकर उभरा है। यह ट्रस्ट न केवल राहत का साधन है, बल्कि पुनर्निर्माण और पुनर्जीवन की दिशा में एक संवेदनशील प्रयास भी है।

