सिडको प्रोजेक्ट फिर अधर में! मुख्यमंत्री सचिवालय ने शुरू की जांच
(CIDCO Project Inquiry | Maharashtra Real Estate | Land Acquisition News)
जालना, महाराष्ट्र: जालना में प्रस्तावित सिडको (CIDCO) प्रोजेक्ट एक बार फिर संकट में आ गया है। पिछले 15 वर्षों से यह परियोजना अटकी हुई है और अब इसकी जांच के आदेश दिए गए हैं। शिवसेना (उबाठा) के पूर्व विधायक संतोष सांबरे ने आरोप लगाया कि यह प्रोजेक्ट भूमि अधिग्रहण (Land Acquisition) की प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही नियमों को दरकिनार करके आगे बढ़ाया गया था। उन्होंने हाल ही में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से इस मामले की जांच की मांग की थी।
मुख्यमंत्री सचिवालय की कार्रवाई (Maharashtra Government Action)
सांबरे की शिकायत के बाद, मुख्यमंत्री सचिवालय ने इस मामले में सक्रियता दिखाई है। उप सचिव माया पाटोळे ने CIDCO Administration को पत्र जारी कर जल्द से जल्द निष्पक्ष जांच करने और स्पष्ट रिपोर्ट (Inquiry Report) प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। इस आदेश के बाद यह संभावना बढ़ गई है कि खरपुडी CIDCO प्रोजेक्ट एक बार फिर लंबित हो सकता है।
15 वर्षों से अधर में लटका है प्रोजेक्ट (Urban Development Maharashtra)
इस प्रोजेक्ट के पीछे एक लंबी कहानी है:
प्रारंभिक योजना: तत्कालीन नगर विकास राज्यमंत्री राजेश टोपे (Rajesh Tope) ने सिडको प्रोजेक्ट को साकार करने के लिए पहल की थी।
स्थान परिवर्तन: कई बार स्थान बदला गया और अंततः खरपुडी (Kharpudi) क्षेत्र को अंतिम रूप दिया गया। यह क्षेत्र जालना शहर (Jalna City) से मात्र 5 किलोमीटर दूर स्थित है।
भूमि अधिग्रहण: 247 हेक्टेयर भूमि (247 Hectare Land) के अधिग्रहण की प्रक्रिया जालना उपविभागीय अधिकारी (Jalna Sub-Divisional Officer) के तहत शुरू की गई थी।
2019 में रद्द, 2023 में फिर से अधिसूचना (CIDCO Land Acquisition Notification)
यह प्रोजेक्ट 2019 में आर्थिक रूप से अव्यवहारिक मानते हुए रद्द (Project Cancelled) कर दिया गया था। लेकिन फरवरी 2023 में, इसे फिर से शुरू करने के लिए अधिसूचना जारी की गई। दो निजी कंपनियों ने इस क्षेत्र का Survey and Feasibility Study भी किया था।
किसानों की नाराजगी और रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट (Farmers Protest & Real Estate Market)
इस प्रोजेक्ट को लेकर Real Estate Investors पहले से ही खरपुडी क्षेत्र में जमीन खरीद (Land Investment in CIDCO Project) रहे हैं।
ग्रीन ज़ोन (Green Zone) और यलो ज़ोन (Yellow Zone) के बीच मूल्य अंतर से किसान नाराज हैं।

अब जब इस प्रोजेक्ट की जांच शुरू हो गई है, तो यह फिर से कानूनी पचड़ों में फंस सकता है।
क्या सरकार कोई ठोस निर्णय लेगी? (Maharashtra Urban Development Update)
अब सवाल उठता है कि क्या महाराष्ट्र सरकार इस प्रोजेक्ट को साकार करेगी या यह योजना फिर से ठंडे बस्ते में चली जाएगी?
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