नई दिल्ली: भारत में सैटेलाइट के जरिए हाई-स्पीड इंटरनेट सेवा शुरू होने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. डिजिटल कम्युनिकेशंस कमीशन (DCC) ने सैटेलाइट कम्युनिकेशन के लिए स्पेक्ट्रम आवंटन से जुड़ी Telecom Regulatory Authority of India (TRAI) की ज्यादातर सिफारिशों को मंजूरी दे दी है. इससे Elon Musk की Starlink, Eutelsat OneWeb और Reliance Jio Satellite Communications जैसी कंपनियों के भारत में सैटेलाइट ब्रॉडबैंड शुरू करने का रास्ता काफी हद तक साफ हो गया है.
DCC की मंजूरी क्यों है महत्वपूर्ण?
सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करने के लिए कंपनियों के पास केवल लाइसेंस होना पर्याप्त नहीं है. उन्हें इस्तेमाल किए जाने वाले रेडियो स्पेक्ट्रम का आवंटन भी जरूरी है. DCC की मंजूरी इसी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण कदम है. अब दूरसंचार विभाग (DoT) स्पेक्ट्रम की कीमत और आवंटन की अंतिम प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा और इसके लिए केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी ली जाएगी.
Starlink, OneWeb और Jio को फायदा
- Starlink — Elon Musk की कंपनी.
- Eutelsat OneWeb — Bharti Group से जुड़ी कंपनी.
- Jio Satellite Communications — Reliance Industries से जुड़ी कंपनी.
DoT के रिकॉर्ड के अनुसार Jio Satellite Communications, OneWeb India Communications और Starlink Satellite Communication के पास GMPCS service authorization है. हालांकि commercial service के लिए spectrum allocation और अन्य जरूरी मंजूरियां भी आवश्यक हैं.
5% तक हो सकता है Spectrum Charge
रिपोर्टों के मुताबिक DCC ने satellite communication कंपनियों के लिए सालाना spectrum usage charge को adjusted gross revenue (AGR) के 5% के स्तर पर रखने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है. सरकार की ओर से notified rural और remote क्षेत्रों में सेवा देने वाले operators को 1 percentage point की राहत मिल सकती है, जिससे प्रभावी charge 4% रह सकता है.
5 साल के लिए मिल सकता है Spectrum
उभरते regulatory framework के तहत satellite spectrum को non-auction route से पांच साल के लिए allocate करने का प्रस्ताव है. इसे आगे दो साल तक बढ़ाने का विकल्प हो सकता है. अंतिम व्यवस्था Cabinet approval और detailed rules के बाद स्पष्ट होगी.
क्या अब तुरंत शुरू होगा Starlink का Internet?
नहीं. DCC की मंजूरी को commercial launch की अंतिम मंजूरी नहीं माना जा सकता. अभी spectrum allocation की अंतिम प्रक्रिया, Union Cabinet approval और जरूरी security clearances जैसे कदम बाकी हैं. इसलिए आम ग्राहकों के लिए Starlink, OneWeb या Jio की satellite broadband service शुरू होने में अभी कुछ समय लग सकता है.
गांव और दूरदराज के इलाकों को हो सकता है बड़ा फायदा
Satellite internet का सबसे बड़ा फायदा उन इलाकों को हो सकता है जहां fiber cable या mobile tower पहुंचाना मुश्किल है. पहाड़ी क्षेत्र, सीमावर्ती इलाके, द्वीप और दूरदराज के गांवों में satellite connectivity एक महत्वपूर्ण विकल्प बन सकती है. इसी वजह से remote और hard-to-connect क्षेत्रों में सेवा देने वाले operators के लिए राहत का प्रावधान महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
भारत में Satellite Internet की बढ़ेगी Competition
DCC के फैसले के बाद भारत के satellite broadband market में competition बढ़ने की संभावना है. Starlink, OneWeb और Jio Satellite पहले से इस क्षेत्र में तैयारी कर रहे हैं. आगे चलकर दूसरी global कंपनियां भी भारतीय बाजार में प्रवेश कर सकती हैं.
ग्राहकों के लिए असली मुकाबला केवल technology का नहीं होगा. Monthly price, installation cost, satellite terminal की कीमत, speed, latency और coverage जैसे factors यह तय करेंगे कि कौन सी कंपनी भारतीय बाजार में मजबूत स्थिति बना पाती है.
Bottom Line
भारत में satellite internet की राह अब पहले से काफी साफ हो गई है. DCC की मंजूरी के बाद spectrum allocation की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी. लेकिन Cabinet approval, spectrum assignment और security clearance पूरी होने के बाद ही commercial services शुरू हो पाएंगी. इसलिए इसे Starlink या Jio के तत्काल launch की खबर के बजाय भारत में satellite internet launch की दिशा में एक बड़ा regulatory breakthrough कहना ज्यादा सही होगा.
Source: Department of Telecommunications, TRAI और उपलब्ध ताजा मीडिया रिपोर्ट्स.