Gita: A book for the welfare of the entire humanity – Hanumanprasad Bharuka
गीता जयंती बुधवार, 11 दिसंबर को
जालना – गीता केवल एक धर्मग्रंथ नहीं है, बल्कि यह संपूर्ण मानवता के कल्याण के लिए एक सार्वभौमिक ग्रंथ है. यह विचार आध्यात्मिक लेखक और लॉयन्स क्लब ऑफ जालना संस्कृती के पूर्व अध्यक्ष हनुमानप्रसाद भारुका ने व्यक्त किए.
उन्होंने जानकारी दी कि गीता जयंती बुधवार, 11 दिसंबर को मनाई जाएगी. इस अवसर पर उन्होंने कहा कि गीता का जन्म मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी, जिसे मोक्षदा एकादशी कहते हैं, पर धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र में हुआ था. गीता एक ऐसा ग्रंथ है, जो किसी विशेष देश, काल, धर्म, जाति या समुदाय के लिए नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए है.
भारुका ने बताया कि योगेश्वर श्रीकृष्ण ने इस महान ग्रंथ की रचना की, जो आज भी मानवता के लिए एक अमूल्य धरोहर है. गीता के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को न केवल धैर्य प्रदान किया, बल्कि उसे जीवन जीने की कला सिखाई. उन्होंने कहा, “गीता एक अक्षय खजाना है, जिससे पीढ़ियों तक नई-नई शिक्षाएं और मूल्यवान ज्ञान प्राप्त होता रहेगा. यह ग्रंथ श्रीकृष्ण की जीवनदृष्टि, धार्मिक नीतियों और उनके कार्यों का परिचय देता है.”

18 अध्यायों वाले इस छोटे से ग्रंथ में श्रीकृष्ण ने पूरे ब्रह्मांड को जीवन का दर्शन समझाया. गीता में दिए गए विचार अन्य किसी भी धर्मग्रंथ में नहीं मिलते.उन्होंने इसमें यह भी स्पष्ट किया कि भगवान कौन हैं और उन्हें क्या चाहिए.
श्रीकृष्ण का संदेश “कर्म ही ब्रह्म है” आज भी प्रासंगिक है. गीता के अध्ययन से हमें आत्मज्ञान प्राप्त होता है और जीवन की गहराई को समझने की शक्ति मिलती है. उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का वैश्विक महत्व केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि संपूर्ण विश्व उनकी शिक्षाओं और लीलाओं से प्रेरणा लेता है.
हनुमानप्रसाद भारुका ने कहा कि गीता मानवता के लिए अमूल्य धरोहर है, जो 5000 वर्षों के बाद भी प्रत्येक भारतीय को गौरव का अनुभव कराती है.
