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नकली पनीर या डेयरी विकल्प? FSSAI के नए मसौदे से नाम और लेबल पर बड़ा सवाल

Portrait supplied for legal commentary by Adv. Mahesh Dhannawat
कंप्यूटर द्वारा तैयार हिंदी ऑडियो

जालना, 13 अक्टूबर 2026: भारतीय रसोई में पनीर की खास जगह है, लेकिन क्या दूध से अलग सामग्री से बने उत्पाद को भी पनीर कहकर बेचा जा सकता है? भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के सितंबर 2026 के मसौदा संशोधन ने इस सवाल को फिर चर्चा में ला दिया है।

22 सितंबर 2026 की अधिसूचना, जो 23 सितंबर को राजपत्र में प्रकाशित हुई, में ऐसे उत्पादों के लिए ‘पनीर’ नाम के इस्तेमाल पर प्रतिबंध प्रस्तावित है जिनके घटक दूध से प्राप्त नहीं होते। ‘Analogue in Dairy Context’ श्रेणी में पंजीकृत उत्पादों के नाम, लेबल और विपणन में ‘Paneer’ शब्द बंद करने का प्रस्ताव है।

अभी अंतिम कानून नहीं

यह खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की धारा 92 के अंतर्गत जारी मसौदा है। आपत्तियों और सुझावों के लिए 60 दिन की वैधानिक अवधि रखी गई है। इसे अभी से सभी डेयरी विकल्पों पर लागू पूर्ण प्रतिबंध बताना गलत होगा।

असली पनीर, डेयरी एनालॉग और टोफू में अंतर

मौजूदा मानकों में पनीर दूध अथवा दूध के ठोस पदार्थों से निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार बनता है। डेयरी एनालॉग में दूध के कुछ या सभी घटकों के स्थान पर गैर-दुग्ध घटक इस्तेमाल किए जाते हैं। दूसरी ओर सोयाबीन से बनने वाला टोफू एक अलग मानकीकृत खाद्य पदार्थ है; सिर्फ दिखने में समान होने से वह नकली पनीर नहीं हो जाता।

होटल और ऑनलाइन फूड प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी

कारखाने का लेबल सही होने के बावजूद रेस्तरां के मेनू में वास्तविक सामग्री छिप सकती है। यदि डेयरी विकल्प से बनी सब्जी ग्राहक को साधारण ‘पनीर बटर मसाला’ के नाम पर दी जाए, तो भ्रामक प्रस्तुति का सवाल उठ सकता है। कैटरिंग सेवाओं और ऑनलाइन फूड प्लेटफॉर्म को भी स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए।

कानूनी पहलू

खाद्य सुरक्षा कानून की धाराएं 52 और 53 गलत ब्रांडिंग तथा भ्रामक विज्ञापन से संबंधित हैं, जबकि धारा 59 असुरक्षित खाद्य पदार्थ से संबंधित है। हर डेयरी विकल्प को असुरक्षित, मिलावटी या नकली कहना कानूनी रूप से सही नहीं है। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 भी गुणवत्ता और संरचना के बारे में सही जानकारी पाने के अधिकार को मान्यता देता है।

एडवोकेट महेश धन्नावत का बयान

जालना के एडवोकेट महेश धन्नावत ने इस विषय पर उपभोक्ताओं को सही जानकारी देने, रेस्तरां के मेनू में सामग्री स्पष्ट लिखने और जानबूझकर धोखा देने वालों के विरुद्ध निष्पक्ष कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया। उनके अनुसार वैध वैकल्पिक खाद्य पदार्थों की बिक्री रोकी नहीं जानी चाहिए, लेकिन उन्हें दूध से बने असली पनीर के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं है। उन्होंने उपभोक्ता जागरूकता और प्रभावी शिकायत निवारण की भी आवश्यकता बताई। यह उनके अनुरोधित दृष्टिकोण के आधार पर तैयार बयान है, शब्दशः दर्ज उद्धरण नहीं।

मसौदे पर सुझाव देते समय आंशिक रूप से बदले गए घटकों वाले उत्पादों के नाम, रेस्तरां की जानकारी देने की व्यवस्था और कारोबारियों के लिए संक्रमण अवधि जैसे विषय महत्वपूर्ण रहेंगे।

संपर्क: एडवोकेट महेश धन्नावत, शिवकृपा, कालीकुर्ती, आर. पी. रोड, जालना। मोबाइल: 9326704647।

आधिकारिक स्रोत: FSSAI मसौदा अधिसूचनाएं।


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