नई दिल्ली: INDIA bloc के विरोध प्रदर्शन के बीच दिल्ली पुलिस ने मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली इलाके में फ्रंटलाइन ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को बॉडी-वॉर्न कैमरों के साथ उतारा। इन कैमरों का इस्तेमाल खास तौर पर भीड़ प्रबंधन, प्रदर्शन स्थलों और चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर जाने वाले रास्तों पर तैनात कर्मियों द्वारा किया जा रहा है। पुलिस सूत्रों के अनुसार इसका उद्देश्य पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच होने वाली घटनाओं का वीडियो रिकॉर्ड तैयार करना है, ताकि किसी विवाद या misconduct के आरोप की जांच में रिकॉर्डिंग का इस्तेमाल किया जा सके।
क्यों अहम है बॉडी कैमरों का इस्तेमाल?
यह फैसला ऐसे समय आया है जब हाल के विरोध प्रदर्शनों में सुरक्षा कर्मियों पर ज्यादती के आरोप लगे हैं। बॉडी कैमरे मौके पर पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीत का रिकॉर्ड उपलब्ध करा सकते हैं। इससे बाद में सामने आने वाले आरोपों की जांच में घटनाक्रम को समझने में मदद मिल सकती है। दिल्ली हाई कोर्ट में भी विरोध प्रदर्शन और crowd-control duty के दौरान दिल्ली पुलिस तथा RAF कर्मियों के लिए body-worn cameras अनिवार्य करने की मांग वाली एक PIL दाखिल की गई है।
तीन महिला पत्रकारों ने लगाए थे गंभीर आरोप
इस कदम की पृष्ठभूमि में तीन महिला पत्रकारों की शिकायतें भी हैं। पत्रकारों ने जंतर-मंतर के पास मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हुए एक पिछले प्रदर्शन की कवरेज के दौरान पुलिसकर्मियों पर कथित यौन उत्पीड़न और बदसलूकी के आरोप लगाए थे। दिल्ली पुलिस ने इन शिकायतों की जांच Crime Branch को सौंपी है। अधिकारियों के अनुसार महिलाओं के बयान दर्ज किए गए हैं और संबंधित CCTV फुटेज की जांच की जानी है। आरोपों की जांच अभी जारी है, इसलिए उन्हें स्थापित तथ्य नहीं माना गया है।
INDIA bloc का चुनाव आयोग के खिलाफ मार्च
मंगलवार को INDIA bloc के सांसदों और नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) से जुड़े मुद्दों को लेकर मार्च किया। नई दिल्ली में बड़ी संख्या में पुलिस और सुरक्षा बल तैनात किए गए तथा कई रास्तों पर बैरिकेडिंग की गई। प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया।
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पुलिस और प्रदर्शनकारी—दोनों के लिए रिकॉर्ड
Body-worn camera पुलिसकर्मी की वर्दी पर लगाया जाने वाला छोटा वीडियो कैमरा है। विरोध प्रदर्शन जैसी परिस्थितियों में इसकी रिकॉर्डिंग पुलिस कार्रवाई, बातचीत और मौके पर हुई घटनाओं का दस्तावेज तैयार कर सकती है। दिल्ली में मौजूदा तैनाती को हाल के विवादों के बाद जवाबदेही और साक्ष्य सुरक्षित रखने की दिशा में उठाए गए कदम के रूप में देखा जा रहा है।
मामले में आगे क्या?
महिला पत्रकारों की शिकायतों पर Crime Branch की जांच जारी है। इस बीच बॉडी कैमरों की रिकॉर्डिंग भविष्य के विरोध प्रदर्शनों में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच विवादित घटनाओं की जांच में अहम सामग्री बन सकती है। दिल्ली में चुनाव आयोग और SIR को लेकर जारी राजनीतिक विरोध के कारण सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी बनी हुई है।
Sources: The Hindu की मूल रिपोर्ट के साथ The Indian Express, Reuters, The New Indian Express और अन्य सार्वजनिक रिपोर्टों से तथ्यों का cross-check किया गया है।
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