जालना, 16 अक्टूबर (प्रतिनिधि)। महाराष्ट्र में सूखे से जूझ रहे किसानों को राहत देने के लिए शिवसेना विधायक अर्जुन खोतकर ने एक नई मांग उठाई है। उनका प्रस्ताव है कि राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन महासंघ (नाफेड) ने पिछले सीजन में किसानों से खरीदी गई उपज बाद में अधिक कीमत पर बेची हो, तो खरीद लागत और जरूरी खर्च घटाने के बाद बची शुद्ध अतिरिक्त राशि किसानों को बोनस के रूप में दी जाए। इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को ज्ञापन देकर केंद्र सरकार के स्तर पर पहल करने का आग्रह किया है।
इस प्रस्ताव का मूल सवाल है: किसान से उपज खरीदने के बाद उसकी कीमत बढ़े, तो उस बढ़ोतरी का लाभ किसान को भी मिलना चाहिए या नहीं? हालांकि यह अभी विधायक की मांग है, कोई स्वीकृत सरकारी योजना नहीं।
नाफेड के मुनाफे से बोनस देने का प्रस्ताव क्या है?
खोतकर ने मांग की कि नाफेड पिछले सीजन की फसलवार खरीद कीमत, खरीदी गई मात्रा, वास्तविक बिक्री मूल्य, शेष भंडार और संचालन संबंधी आवश्यक खर्च का प्रमाणित विवरण उपलब्ध कराए। इन आंकड़ों से यदि शुद्ध अतिरिक्त आय निकलती है, तो पूरी राशि संकटग्रस्त किसानों की सहायता के लिए इस्तेमाल करने पर विचार किया जाए।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केवल आज के बाजार भाव और पिछले खरीद भाव के अंतर को सीधे बोनस नहीं मानना चाहिए। वास्तविक बिक्री और खर्च का लेखा-जोखा तैयार होने के बाद ही संभावित सहायता की राशि निर्धारित की जा सकती है। शेष उपज आगे अधिक कीमत पर बिकने की स्थिति में उससे होने वाली अतिरिक्त शुद्ध आय को भी इस व्यवस्था में शामिल करने का सुझाव दिया गया है।
गन्ना उत्पादकों की तर्ज पर दूसरे किसानों को राहत क्यों?
विधायक ने गन्ना उत्पादकों को मिलने वाले अतिरिक्त भुगतान का उदाहरण देते हुए कहा कि अन्य फसल उत्पादकों को भी मूल्यवृद्धि का लाभ पहुंचाने का रास्ता तलाशना चाहिए। उनका तर्क है कि किसान अपनी उपज बेचने के बाद कीमत बढ़ने का फायदा नहीं उठा पाता, जबकि उत्पादन का जोखिम और खेती की लागत उसी ने उठाई होती है। प्रस्तावित मॉडल लागू करने के लिए नाफेड की वास्तविक आय, खरीद संबंधी नियम और केंद्र की आवश्यक स्वीकृति की समीक्षा जरूरी होगी।
जालना के सूखाग्रस्त किसानों को क्या फायदा हो सकता है?
जालना सहित सूखाग्रस्त क्षेत्रों में फसल नुकसान और आय में कमी के कारण किसान परिवारों के सामने घर का खर्च, बच्चों की पढ़ाई और अगली बुआई के लिए रकम जुटाने की चुनौती है। खोतकर का कहना है कि यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो यह सहायता ऐसे परिवारों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।
इस बीच महाराष्ट्र में किसानों के लिए घोषित अन्य राहत उपायों को समझना भी जरूरी है। पढ़ें: महाराष्ट्र के किसानों को पांच हजार रुपये की राहत: पात्रता और भुगतान पर सवाल। जलवायु और खेती पर विस्तृत संदर्भ के लिए देखें: एल नीनो और महाराष्ट्र के सूखे का संबंध।
छोटे किसानों को प्राथमिकता और सीधे खाते में भुगतान की मांग
खोतकर ने सुझाव दिया कि राज्य सरकार शुरुआती सहायता निधि उपलब्ध कराने की संभावना देखे। केंद्र की आवश्यक मंजूरी मिलने पर पात्र किसानों के बैंक खातों में सीधे भुगतान किया जाए। कम जमीन वाले तथा अधिक फसल नुकसान झेलने वाले किसानों को प्राथमिकता देने की भी मांग की गई है। हालांकि पात्रता, भुगतान की राशि और समयसीमा अभी तय नहीं हैं।
क्या नाफेड बोनस योजना मंजूर हो गई है?
नहीं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह विधायक अर्जुन खोतकर द्वारा सरकार के समक्ष रखा गया प्रस्ताव है। नाफेड की ओर से ऐसी बोनस योजना मंजूर होने, लाभार्थियों की सूची बनने या भुगतान शुरू होने की आधिकारिक घोषणा की पुष्टि नहीं हुई है। विधायक के कार्यालय ने इसे राज्य में इस तरह की पहली मांग बताया है, लेकिन इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि भी नहीं हुई है।
अब ध्यान इस बात पर रहेगा कि राज्य सरकार नाफेड से विस्तृत आंकड़े मंगाती है या नहीं और केंद्र सरकार प्रस्ताव पर क्या रुख अपनाती है। नाफेड के बारे में आधिकारिक जानकारी नाफेड की वेबसाइट तथा कृषि नीतियों और योजनाओं की जानकारी केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण विभाग पर उपलब्ध है।
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