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जमीयत उलमा जालना ने यूनिफॉर्म सिविल कोड का विरोध किया, मुसलमानों से राय भेजने की अपील

यूनिफॉर्म सिविल कोड प्रश्नावली पर राय देने की अपील वाला जमीयत उलमा महाराष्ट्र का पोस्टर
कंप्यूटर द्वारा तैयार हिंदी ऑडियो

जालना, 3 नवंबर — जमीयत उलमा (अरशद मदनी) जिला जालना ने महाराष्ट्र में यूनिफॉर्म सिविल कोड (समान नागरिक संहिता) लागू करने की कोशिशों का विरोध किया है और इसे इस्लाम में दखलअंदाजी बताया है. संगठन के जिला उपाध्यक्ष मौलाना ईसा खान काशिफी की ओर से जारी प्रेस नोट के मुताबिक, संगठन ने मुसलमानों से इस मुद्दे पर अपनी राय दर्ज कराने की अपील की है.

यूनिफॉर्म सिविल कोड प्रश्नावली पर राय देने की अपील वाला जमीयत उलमा महाराष्ट्र का पोस्टर
जमीयत उलमा की ओर से जारी पोस्टर

मौलाना सोहेल नदवी: यूनिफॉर्म सिविल कोड मंजूर नहीं

जमीयत उलमा मराठवाड़ा के उपाध्यक्ष मौलाना सोहेल नदवी ने कहा कि यूनिफॉर्म सिविल कोड मुसलमानों को मंजूर नहीं है. उनके मुताबिक यह धर्म में दखल है और देश में रहने वाले अलग-अलग धर्मों के लोगों के लिए चिंता की वजह है. मौलाना ने कहा कि हर मुसलमान का धार्मिक और कानूनी फर्ज है कि वह शरीअत की हिफाजत की कोशिश करे.

उन्होंने कहा कि यह कानून संविधान की मूल भावना और अनुच्छेद 25 में दी गई धार्मिक आजादी के खिलाफ है. उनका कहना है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ के नियम, जैसे शादी, तलाक, खुला और विरासत, किसी समाज या व्यक्ति ने नहीं बनाए, बल्कि ये कुरआन और हदीस से लिए गए धार्मिक आदेशों का हिस्सा हैं.

मौलाना नदवी के मुताबिक ज्यादातर लोग इस मुद्दे को सिर्फ मुसलमानों के नजरिए से देखते हैं, जबकि दूसरे समुदाय भी इसके खिलाफ हैं. उन्होंने आशंका जताई कि इसकी आड़ में एक समाज के रीति-रिवाज दूसरे समाजों पर थोपे जा सकते हैं और देश की विविधता भरी तहजीब पर असर पड़ेगा.

यूनिफॉर्म सिविल कोड पर राय देने की अपील

प्रेस नोट में कहा गया है कि लॉ कमीशन ऑफ इंडिया ने इस बारे में धार्मिक संगठनों और आम लोगों से राय मांगी है. जमीयत ने कहा कि सभी मुसलमान अपनी राय भेजें और इस समय भावुकता से बचते हुए संगठित तरीके से काम करने की जरूरत है. संगठन के पोस्टर में महाराष्ट्र सरकार की यूनिफॉर्म सिविल कोड प्रश्नावली पर राय देने की बात कही गई है.

  • जमीयत उलमा महाराष्ट्र के अध्यक्ष मौलाना हलीमुल्लाह कासमी ने राज्य की सभी इकाइयों को प्रश्नावली पर राय देने का सख्त आदेश दिया है.
  • ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इसके लिए एक लिंक और QR कोड तैयार किया है, जिसे जमीयत उलमा महाराष्ट्र और दूसरे संगठनों ने भी जारी किया है.
  • लोगों से इस लिंक या QR कोड से ई-मेल के जरिए राय भेजने को कहा गया है.
  • इमामों और उलमा से इस पर बयान करने और सोशल मीडिया पर सक्रिय लोगों से लिंक व QR कोड फैलाने की अपील की गई है.

प्रेस नोट में यह भी कहा गया है कि शरीअत में दखल तभी होता है जब मुसलमान खुद शरीअत पर अमल नहीं करते. अगर मुसलमान शरीअत के आदेशों पर अमल करें तो कोई कानून उन्हें इससे नहीं रोक पाएगा.

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अपील करने वाले पदाधिकारी

यह अपील जमीयत उलमा के महासचिव मुहम्मद अयूब खान, उपाध्यक्ष मुहम्मद इफ्तिखारुद्दीन, हाफिज अब्दुल सलाम कुरैशी, मुहम्मद कासिम एजाज सिद्दीकी, मौलाना सैयद एहसान नदवी, एडवोकेट मुहम्मद अशफाक कागजी, हाजी मुहम्मद सलीम बावा, मुहम्मद शारिक अनवर कुरैशी, हाजी मुहम्मद एहतेशामुद्दीन बागबान, मौलाना गुलाम हक्कानी, मुफ्ती सैयद नोमान नदवी और दूसरे सदस्यों ने की है.

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लॉ कमीशन ऑफ इंडिया की आधिकारिक जानकारी आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध है.

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रिपोर्ट: इमरान सिद्दीकी, जालना


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Imran Siddiqui
Imran Siddiqui is a senior journalist and editor of NewsNationOnline, with over 17 years of experience covering news, politics, education and social issues in Maharashtra.

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