जालना, 1 नवंबर 2026 — महर्षि वाल्मीकि की रची वाल्मीकि रामायण को आदिकाव्य माना जाता है और भारतीय संस्कृति, साहित्य व जीवन मूल्यों पर इसका गहरा असर है। यह बात पंडित सत्यनारायण व्यास ने साहित्य भारती की जालना शाखा की ओर से आयोजित कार्यक्रम में कही।
देवगिरी प्रांत साहित्य भारती, जालना शाखा ने महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर ‘ग्रंथ संग्रहालय श्रीराम वाचनालय’ में इस व्याख्यान का आयोजन किया था।

एक नजर में
- आयोजक: देवगिरी प्रांत साहित्य भारती, जालना शाखा
- अवसर: महर्षि वाल्मीकि जयंती
- स्थान: ग्रंथ संग्रहालय श्रीराम वाचनालय, जालना
- वक्ता: पंडित सत्यनारायण व्यास
- विषय: वाल्मीकि रामायण – भारतीय संस्कृति, साहित्य और जीवन मूल्यों की सीख
वाल्मीकि रामायण को क्यों कहा जाता है आदिकाव्य
पंडित व्यास ने कहा कि वाल्मीकि रामायण को दुनिया का पहला महाकाव्य, यानी ‘आदिकाव्य’ माना जाता है। इस ग्रंथ की रचना ‘अनुष्टुप छंद’ में हुई है।
उन्होंने बताया कि क्रौंच पक्षी के वध से महर्षि वाल्मीकि के मन में जो शोक उपजा, उसी से इस छंद और रामायण की रचना की प्रेरणा मिली।
मानवीय मूल्यों और आदर्शों का चित्रण
पंडित व्यास के अनुसार रामायण केवल एक राजा की कहानी नहीं, बल्कि मानव जीवन के ऊंचे आदर्श सिखाने वाली संहिता है। इसमें पितृभक्ति, भाई-भाई का प्रेम, पतिव्रता धर्म, आदर्श मित्रता और निष्ठावान सेवा का सुंदर चित्रण मिलता है।
उन्होंने कहा कि श्रीराम को ‘मर्यादा पुरुषोत्तम’ के रूप में दिखाते हुए यह ग्रंथ बताता है कि इंसान को कैसे जीना चाहिए। हर व्यक्ति को अपने कर्म का फल मिलता है और अंत में धर्म की ही जीत होती है – यह शाश्वत संदेश रामायण से मिलता है।
पंडित व्यास ने कहा कि वाल्मीकि रामायण केवल एक ऐतिहासिक महाकाव्य नहीं, बल्कि भारतीय जीवन पद्धति की नींव और मानव संस्कृति की अनमोल धरोहर है, जिसे आज के दौर में भी संजोकर रखना चाहिए।
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कार्यक्रम में ये रहे मौजूद
कार्यक्रम में डॉ. सतीश मोरे, उद्योगपति अभय साहनी, साहित्य भारती जालना शाखा के मार्गदर्शक रमेशराव देहेडकर और ग्रंथपाल श्याम शेलगावकर प्रमुख रूप से मौजूद थे। संचालन डॉ. सुहास सदाव्रते ने किया। इस मौके पर श्रीकांत शेलगावकर का विशेष सम्मान किया गया।
कार्यक्रम में सहायक ग्रंथपाल शैलेंद्र बदनापुरकर, बद्रीप्रसाद सोनी, पांडुरंग काले, डॉ. प्रभाकर शेलके, संदीप इंगोले, सुधाकर भालेराव, शंकर देवावाले, पद्मिनी कुलकर्णी, कीर्ति शेलगावकर, वसंत देहेडकर और विजया कुलकर्णी भी उपस्थित रहे।
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रिपोर्ट: इमरान सिद्दीकी, जालना
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