अंबड, 5 नवंबर 2026 — इस साल कम बारिश और सूखे जैसे हालात का असर अब जालना जिले के फल बागानों पर साफ दिखने लगा है. मोसंबी और अनार के बाद अब पपीता बाग सूखा की चपेट में हैं. अंबड तालुका के लोणार भायगांव के किसान सुरेश हरिभाऊ दसगुडे का दो एकड़ में लगा पपीते का बाग पानी की कमी से खतरे में आ गया है.

कम खर्च की फसल समझकर लगाया था पपीता
पपीता कम लागत और कम पानी में अच्छी आमदनी देने वाली फसल मानी जाती है. इसी उम्मीद में सुरेश दसगुडे ने अपने दो एकड़ खेत में पपीते के पौधे लगाए थे. लेकिन बारिश ने साथ नहीं दिया. जमीन में नमी घटने से पौधों की बढ़वार रुक गई है और फलों का आकार व गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो रहे हैं.
पानी की कमी के कारण सिंचाई का खर्च बढ़ गया है, जबकि उपज घटने का डर है. ऐसे में किसान के सामने लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है.
मोसंबी, अनार के बाद अब पपीता भी मार में
जालना जिला मोसंबी और अनार के बागानों के लिए जाना जाता है, लेकिन पिछले कुछ सालों में किसान कम पानी वाली फसल के रूप में पपीते की ओर भी मुड़े हैं. इस बार कम बारिश ने इस विकल्प को भी जोखिम में डाल दिया है. किसान अब सरकारी मदद की उम्मीद लगाए हैं.
- गांव: लोणार भायगांव, तालुका अंबड
- किसान: सुरेश हरिभाऊ दसगुडे
- रकबा: 2 एकड़ पपीता बाग
- कारण: कम बारिश, जमीन में नमी की कमी
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पपीता बाग सूखा: किसान क्या कर सकते हैं
कृषि जानकार आम तौर पर सूखे के दिनों में फल बागानों में टपक सिंचाई, पौधों के आसपास पुआल या घास की परत (मल्चिंग) बिछाने और सुबह-शाम सिंचाई करने की सलाह देते हैं, ताकि कम पानी में ज्यादा दिन तक नमी बनी रहे. नुकसान होने पर किसान कृषि विभाग से पंचनामा कराने की मांग भी कर सकते हैं.
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न्यूज़ नेशन ऑनलाइन डेस्क
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