जालना: ग्रामीण क्षेत्र के पीरकल्याण-धारकल्याण सर्कल में पिछले सात-आठ दिनों से बार-बार बिजली कटौती और अनियमित बिजली सप्लाई से परेशान किसानों का गुस्सा शुक्रवार को फूट पड़ा। किसानों ने मस्तगढ़ स्थित महावितरण कार्यालय पहुंचकर करीब दो घंटे तक धरना दिया। इस दौरान किसानों ने कार्यकारी अभियंता का घेराव करते हुए साफ कहा कि जब तक बिजली सप्लाई नियमित नहीं होती, तब तक वे कार्यालय से नहीं उठेंगे।
आंदोलन के दौरान किसानों और महावितरण अधिकारियों के बीच तीखी बहस भी हुई। किसानों का कहना है कि बिजली की समस्या को लेकर कई बार शिकायत करने के बावजूद स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।
8 से 10 गांव बिजली कटौती से परेशान
धारकल्याण सब-स्टेशन के अंतर्गत आने वाले कडवंची, नंदापुर, नावा, धारकल्याण, पीरकल्याण, वरुड सहित करीब 8 से 10 गांवों के किसान लोड शेडिंग और बार-बार बिजली गुल होने से परेशान हैं।
पिछले कई दिनों से खेतों में बिजली की सप्लाई बार-बार बंद हो रही है। ऐसे में किसानों के लिए फसलों को पानी देना मुश्किल हो गया है। पहले ही करीब एक महीने से बारिश नहीं होने के कारण किसान चिंता में हैं। अब बिजली की समस्या ने उनकी परेशानी और बढ़ा दी है।
फसलों को पानी देने की बढ़ी चिंता
बारिश नहीं होने के कारण खेतों में खड़ी फसलों को सिंचाई की जरूरत है। लेकिन बिजली उपलब्ध नहीं होने से किसान समय पर मोटर नहीं चला पा रहे हैं। इससे फसलों को नुकसान होने का खतरा बढ़ गया है।
आंदोलन कर रहे किसानों ने सवाल उठाया, “एक तरफ बारिश नहीं हो रही और फसलें संकट में हैं, दूसरी तरफ बिजली भी नहीं मिल रही। ऐसे में फसलों को पानी कैसे दें?”
बैलपोला के दिन भी कई इलाकों में अंधेरा
किसानों का कहना है कि बिजली कटौती का असर बैलपोला त्योहार पर भी पड़ा। त्योहार से एक दिन पहले बिजली नहीं होने के कारण बैलों को नहलाने और त्योहार की तैयारियों में परेशानी हुई। वहीं बैलपोला के दिन रात में भी कई इलाकों में बिजली नहीं होने से ग्रामीणों को अंधेरे में त्योहार मनाना पड़ा।
बार-बार शिकायत के बाद भी नहीं हुआ समाधान
किसानों के अनुसार, बिजली की समस्या को लेकर संबंधित अधिकारियों से कई बार शिकायत की गई। इसके बावजूद स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। आखिरकार परेशान किसानों ने सीधे मस्तगढ़ स्थित महावितरण कार्यालय पहुंचकर आंदोलन करने का फैसला किया।
कार्यालय पहुंचते ही किसानों ने कार्यकारी अभियंता का घेराव किया और बिजली सप्लाई तत्काल नियमित करने की मांग की। करीब दो घंटे तक किसान कार्यालय में डटे रहे और अधिकारियों से ठोस आश्वासन की मांग करते रहे।
“सिर्फ आश्वासन नहीं, बिजली चाहिए”
आंदोलन की जानकारी मिलने के बाद अधिकारियों ने संबंधित क्षेत्रों में बिजली सप्लाई सुचारू करने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। हालांकि किसानों ने साफ कर दिया कि उन्हें केवल आश्वासन नहीं चाहिए, बल्कि वास्तव में बिजली सप्लाई नियमित चाहिए।
किसानों ने यह भी सवाल उठाया कि ग्रामीण इलाकों की गंभीर समस्याओं को लेकर अधिकारियों की जवाबदेही तय क्यों नहीं की जा रही है। उनका आरोप है कि कुछ अधिकारी किसानों से उचित तरीके से बात करने के बजाय कथित तौर पर सख्त और अड़ियल रवैया अपनाते हैं। इन आरोपों पर संबंधित विभाग का आधिकारिक पक्ष इस खबर के प्रकाशन तक उपलब्ध नहीं हो सका।
बारिश की देरी और बिजली संकट से दोहरी मार
बारिश में देरी से पहले ही संकट झेल रहे किसानों के सामने अब बिजली की समस्या भी खड़ी हो गई है। जालना में मौसम और खेती से जुड़ी चुनौतियों पर हमारी जालना में सूखे और बारिश के संकट की रिपोर्ट भी पढ़ सकते हैं।
जिले में किसानों से जुड़े अन्य मुद्दों के लिए NewsNationOnline का जालना न्यूज़ सेक्शन देखें। बिजली से जुड़ी स्थानीय समस्या पर हमारी हाल की जालना में बिजली के खंभे में करंट उतरने की खबर भी पढ़ें।
महावितरण से शिकायत कैसे करें?
बिजली सप्लाई, बिल या अन्य उपभोक्ता सेवाओं से जुड़ी शिकायत के लिए उपभोक्ता महावितरण के आधिकारिक उपभोक्ता सेवा पोर्टल का उपयोग कर सकते हैं।
निष्कर्ष: पीरकल्याण-धारकल्याण क्षेत्र के किसानों की मांग अब साफ है—सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि खेतों के लिए नियमित और भरोसेमंद बिजली सप्लाई। महावितरण प्रशासन इस समस्या का स्थायी समाधान कितनी जल्दी करता है, इस पर किसानों और ग्रामीणों की नजर बनी हुई है।
नोट: किसानों द्वारा लगाए गए आरोप और आंदोलन से जुड़ी जानकारी स्थानीय स्तर से प्राप्त विवरण पर आधारित है। संबंधित विभाग का आधिकारिक पक्ष उपलब्ध होने पर खबर को अपडेट किया जाएगा।


