जालना: शहर के चंदनझिरा इलाके में आवारा कुत्तों की समस्या एक बार फिर गंभीर रूप से सामने आई है। सागर कॉलोनी में जमीर पटेल के डेढ़ साल के मासूम बच्चे को आवारा कुत्ते ने काट लिया। शनिवार, 12 तारीख को सामने आई इस घटना के बाद इलाके के लोगों में डर और चिंता का माहौल है।
मासूम को कुत्ते के काटने की घटना के बाद स्थानीय नागरिकों ने चंदनझिरा क्षेत्र में बढ़ती आवारा कुत्तों की संख्या को लेकर नगर निगम प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। लोगों का कहना है कि लंबे समय से समस्या बनी हुई है, लेकिन इसका स्थायी समाधान दिखाई नहीं दे रहा है।
बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर चिंता
स्थानीय नागरिकों के मुताबिक, चंदनझिरा इलाके की कई सड़कों और गलियों में आवारा कुत्ते घूमते रहते हैं। इससे छोटे बच्चों, स्कूल जाने वाले विद्यार्थियों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। खासकर बच्चों को अकेले बाहर भेजने में अभिभावक डर महसूस कर रहे हैं।
चिकन-मटन की दुकानों को लेकर भी शिकायत
नागरिकों का आरोप है कि इलाके में कई जगह चिकन और मटन की दुकानें खुले में चल रही हैं। इन दुकानों से निकलने वाले मांस के अवशेष और कचरे के कारण आवारा कुत्तों का जमावड़ा बढ़ रहा है। लोगों की मांग है कि ऐसे कचरे के उचित निपटारे पर भी प्रशासन को ध्यान देना चाहिए।
रात में भौंकने से भी नागरिक परेशान
लोगों की परेशानी सिर्फ दिन के समय तक सीमित नहीं है। स्थानीय नागरिकों के अनुसार, रात में बड़ी संख्या में कुत्ते सड़कों पर घूमते हैं और लगातार भौंकते रहते हैं। इससे छोटे बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों की नींद प्रभावित होने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
कई महीनों से समस्या, स्थायी समाधान की मांग
स्थानीय लोगों का कहना है कि चंदनझिरा में आवारा कुत्तों की समस्या पिछले कई महीनों से बनी हुई है। नगर निगम की ओर से समय-समय पर कुत्तों को पकड़ने की कार्रवाई किए जाने की बात कही जाती है, लेकिन नागरिकों के अनुसार अभियान नियमित नहीं रहता। उनका आरोप है कि कुछ कुत्तों को पकड़ने के बाद कार्रवाई फिर धीमी पड़ जाती है और कुछ समय बाद स्थिति पहले जैसी हो जाती है।
नसबंदी के बाद दोबारा छोड़ने का दावा
नागरिकों का यह भी दावा है कि पकड़े गए कुत्तों की नसबंदी करने के बाद उन्हें कुछ दिनों में दोबारा उसी इलाके में छोड़ दिया जाता है। लोगों का कहना है कि आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने के लिए सिर्फ कभी-कभार पकड़ने की कार्रवाई काफी नहीं है। इसके लिए लगातार और प्रभावी व्यवस्था की जरूरत है।
कुत्ते के काटने की घटनाओं को लेकर चिंता
स्थानीय नागरिकों के मुताबिक, आवारा कुत्तों के हमले और काटने की घटनाएं चिंता का विषय बनी हुई हैं। उनका कहना है कि पिछले कुछ महीनों में शासकीय सामान्य अस्पताल में कुत्ते के काटने के इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों की संख्या से भी समस्या की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। इस आंकड़े की आधिकारिक पुष्टि इस खबर के प्रकाशन तक उपलब्ध नहीं है।
अब नगर निगम से ठोस कार्रवाई की उम्मीद
डेढ़ साल के मासूम को आवारा कुत्ते द्वारा काटे जाने की घटना के बाद चंदनझिरा के नागरिकों ने नगर निगम प्रशासन से तत्काल कदम उठाने की मांग की है। लोगों का कहना है कि बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए आवारा कुत्तों की समस्या पर लगातार निगरानी और प्रभावी नियंत्रण जरूरी है।
इसके साथ ही खुले में मांस के अवशेष फेंके जाने की शिकायतों पर भी कार्रवाई की मांग की जा रही है, ताकि कुत्तों के जमावड़े को कम किया जा सके।
अब सवाल यही है कि इस घटना के बाद नगर निगम प्रशासन आवारा कुत्तों की समस्या को कितनी गंभीरता से लेता है और चंदनझिरा के नागरिकों को राहत देने के लिए क्या कदम उठाता है।
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नोट: आवारा कुत्तों की संख्या, खुले में मांस की दुकानों और नगर निगम की कार्रवाई को लेकर ऊपर दी गई जानकारी स्थानीय नागरिकों की शिकायतों और दावों पर आधारित है। संबंधित प्रशासन का आधिकारिक पक्ष मिलने पर खबर को अपडेट किया जाएगा।

