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सैफ अली खान ‘शत्रु संपत्ति’ मामला: क्या हैं ये संपत्तियाँ और क्या कहता है कानून?

कंप्यूटर द्वारा तैयार हिंदी ऑडियो

Saif Ali Khan ‘enemy property’ case: What are these properties and what does the law say?(Hindi)

बॉलीवुड अभिनेता सैफ अली खान एक बार फिर चर्चा में हैं, लेकिन इस बार किसी फिल्म को लेकर नहीं, बल्कि भोपाल स्थित उनकी पैतृक संपत्तियों को लेकर, जिन्हें केंद्र सरकार ने “शत्रु संपत्ति” घोषित किया है। इन संपत्तियों की अनुमानित कीमत लगभग 15,000 करोड़ रुपये बताई जा रही है। सैफ अली खान ने इस फैसले के खिलाफ मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। कोर्ट ने उन्हें सरकार द्वारा गठित अपीलीय प्राधिकरण से संपर्क करने को कहा है।

मामले की पृष्ठभूमि

भोपाल के अंतिम नवाब हमीदुल्लाह खान, जो भारत विभाजन के समय भोपाल के शासक थे, की तीन बेटियाँ थीं। उनकी सबसे बड़ी बेटी, आबिदा सुल्तान, 1950 में पाकिस्तान चली गईं और वहां की नागरिकता ले ली। उनकी दूसरी बेटी, साजिदा सुल्तान, भारत में ही रहीं और नवाब इफ्तिखार अली खान पटौदी से विवाह किया, जो भारत और इंग्लैंड के लिए क्रिकेट खेल चुके थे। उनके बेटे, प्रसिद्ध क्रिकेटर मंसूर अली खान पटौदी, साजिदा सुल्तान के उत्तराधिकारी बने, और बाद में उनकी संपत्ति का उत्तराधिकार सैफ अली खान को मिला।

सरकार का दावा है कि चूंकि आबिदा सुल्तान पाकिस्तान चली गई थीं, इसलिए उनकी संपूर्ण संपत्ति “शत्रु संपत्ति” के अंतर्गत आती है और अब इस पर भारत सरकार का नियंत्रण रहेगा।

कौन-कौन सी संपत्तियाँ शत्रु संपत्ति घोषित की गई हैं?

  • भोपाल में सैफ अली खान के परिवार की कई ऐतिहासिक संपत्तियाँ हैं, जिनमें शामिल हैं:
  • फ्लैग स्टाफ हाउस – सैफ का बचपन इसी भव्य बंगले में बीता।
  • नूर-उस-सबाह पैलेस – वर्तमान में एक लग्ज़री होटल के रूप में संचालित है।
  • दर-उस-सलाम – ऐतिहासिक महत्व की संपत्ति।
  • बंगला ऑफ हबीबी – परिवार की निजी संपत्ति।
  • अहमदाबाद पैलेस – ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व की संपत्ति।
  • कोहेफिजा संपत्ति – भोपाल के प्रमुख इलाकों में स्थित संपत्ति।

सैफ अली खान का पक्ष

सैफ अली खान का तर्क है कि उनकी दादी साजिदा सुल्तान ने कभी भारत नहीं छोड़ा, इसलिए उनके हिस्से की संपत्ति को “शत्रु संपत्ति” घोषित करना अनुचित है। उन्होंने 2014 में सरकार द्वारा जारी अधिसूचना को चुनौती दी थी, जिसके तहत उनकी पैतृक संपत्ति को “शत्रु संपत्ति” घोषित किया गया था।

2016 में सरकार ने “शत्रु संपत्ति (संशोधन एवं प्रमाणीकरण) अधिनियम” लाया, जिसने उत्तराधिकारियों के दावों को निरस्त कर दिया।

शत्रु संपत्ति क्या होती है?

“शत्रु संपत्ति” उन संपत्तियों को कहा जाता है जो ऐसे व्यक्तियों द्वारा छोड़ी गई हैं, जिन्होंने भारत के विभाजन या युद्ध के दौरान पाकिस्तान या चीन की नागरिकता ले ली। भारत सरकार ने 1965 और 1971 में पाकिस्तान और 1962 में चीन के साथ युद्ध के बाद इन संपत्तियों को अपने कब्जे में ले लिया।

मुख्य प्रावधान:

इन संपत्तियों की देखरेख शत्रु संपत्ति के संरक्षक (Custodian of Enemy Property) द्वारा की जाती है।

संपत्तियाँ भारत सरकार के स्वामित्व में रहती हैं और उत्तराधिकारियों को इनमें कोई कानूनी अधिकार नहीं दिया जाता।

2017 के संशोधन के तहत, यदि कोई उत्तराधिकारी भारतीय नागरिक भी हो, तब भी संपत्ति सरकार के पास ही रहेगी।

  • क्या कानूनी उत्तराधिकारियों को संपत्ति का अधिकार मिल सकता है?
  • 1968 में पारित “शत्रु संपत्ति अधिनियम” के अनुसार, शत्रु संपत्ति पर कानूनी उत्तराधिकारियों का कोई दावा नहीं बनता।
  • 2017 में संशोधित अधिनियम के अनुसार:
  • उत्तराधिकार का कोई दावा मान्य नहीं होगा, भले ही व्यक्ति भारतीय नागरिक हो।
  • संपत्ति को बिक्री या सरकार के नियंत्रण में रखा जा सकता है।
  • शत्रु संपत्ति को भारत सरकार के नियंत्रण में स्थायी रूप से रखा गया है।

सैफ अली खान के मामले में कानूनी लड़ाई

सैफ अली खान ने 2015 में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी थी, लेकिन सरकार ने हाल ही में यह तर्क दिया कि अब एक अपीलीय प्राधिकरण बनाया गया है, जिसमें उन्हें आवेदन देना चाहिए।

हाल ही में 13 दिसंबर 2024 को कोर्ट ने सैफ को निर्देश दिया था कि वह 30 दिनों के भीतर अपीलीय प्राधिकरण में आवेदन करें। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि सैफ ने यह कदम उठाया है या नहीं।

सरकार की योजना और संभावनाएँ

भारत सरकार ने अब तक हजारों शत्रु संपत्तियों को नीलामी के जरिए बेचने की योजना बनाई है। 2018 में, सरकार ने ऐसी संपत्तियों से लगभग 3,000 करोड़ रुपये अर्जित किए थे, और 2020 में शत्रु संपत्तियों का मूल्यांकन 1 लाख करोड़ रुपये तक आंका गया था।

  • सरकार द्वारा इन संपत्तियों को नीलाम करने के लिए बनाई गई योजना के अनुसार:
  • 1. रिकॉर्ड सत्यापन: शत्रु संपत्तियों का विस्तृत मूल्यांकन किया जाता है।
  • 2. मूल्य निर्धारण: जिला प्रशासन द्वारा संपत्ति का मूल्य तय किया जाता है।
  • 3. नीलामी प्रक्रिया: सरकार उच्चतम बोलीदाता को संपत्तियाँ बेचती है।
  • 4. आर्थिक लाभ: इस प्रक्रिया से प्राप्त राशि को भारत सरकार के समेकित कोष में जमा किया जाता है।

निष्कर्ष

सैफ अली खान के मामले ने एक बार फिर शत्रु संपत्ति कानून को चर्चा में ला दिया है। इस मामले का न केवल ऐतिहासिक महत्व है, बल्कि इससे कई अन्य लोगों की संपत्तियों को लेकर भी सवाल खड़े हो सकते हैं।

यदि सैफ की याचिका खारिज हो जाती है, तो सरकार उनके पैतृक घर और संपत्तियों को नीलाम कर सकती है, जो भोपाल के ऐतिहासिक स्थलों में गिने जाते हैं। वहीं, यदि सैफ को राहत मिलती है, तो यह अन्य मामलों के लिए भी एक मिसाल बन सकती है।

अब सभी की नजरें इस कानूनी लड़ाई के अगले कदम पर टिकी हैं, क्योंकि यह मामला भारत में विरासत और संपत्ति अधिकारों के दृष्टिकोण से एक महत्वपूर्ण निर्णय साबित हो सकता है।


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Imran Siddiqui
Imran Siddiqui is a journalist based in Jalna, Maharashtra, and district representative for Navbharat (previously with Lokmat Samachar). He edits NewsNation Online, covering Jalna, Marathwada, Maharashtra and India, and ImranJalna, covering Islamic knowledge and Muslim-world news in English, Hindi and Urdu.

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